भोपाल में RSS की भगवान शिव से तुलना क्यों? प्रदीप मिश्रा बोले – “ संघ भी विष पीकर राष्ट्र की रक्षा करता है”
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित "सामाजिक सद्भाव बैठक" में प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के सामने संघ की तुलना भगवान शिव से कर सभी को चौंका दिया। मिश्रा ने कहा, "शिव भी विष पीते हैं और राष्ट्र की रक्षा करते हैं।
संघ भी विष पीकर राष्ट्र की रक्षा करने में लगा हुआ है।" उनका इशारा संघ पर लगने वाले आरोपों की ओर था, जिन्हें संघ "विष" की तरह पीकर भी राष्ट्रहित में कार्य करता है। इस बयान से सभागार में तालियां गूंजीं और सामाजिक सद्भाव का संदेश और मजबूत हुआ।

यह बैठक दो सत्रों में आयोजित हुई, जिसमें मध्यभारत प्रांत के 16 जिलों से विभिन्न वर्गों और संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक सद्भाव कोई नई अवधारणा नहीं, बल्कि हमारे समाज का स्वभाव है। सज्जन शक्ति का जागरण, आचरण में पंच परिवर्तन और निरंतर सद्भावना संवाद आज की जरूरत है।
इस सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन दो सत्रों में किया गया, जिसमें मध्यभारत प्रांत के 16 जिलों से समाज के विभिन्न वर्गों, संगठनों और प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। पहले सत्र में पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने आशीर्वचनों में समाज और राष्ट्र के रिश्ते पर जोर देते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार या किसी संगठन का काम नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि "हमने राष्ट्र को क्या दिया?" और इसी भाव के साथ जाति, वर्ग और क्षेत्र से ऊपर उठकर हिंदू, सनातनी और भारतीय पहचान को मजबूत करने का आह्वान किया। मिश्रा ने धर्मांतरण को आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जोड़ते हुए समाज को सजग रहने की अपील की और कहा कि सामाजिक एकता ही ऐसे प्रयासों का सबसे बड़ा उत्तर है। उन्होंने 'ग्रीन महाशिवरात्रि' जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे पर्यावरण, आस्था और समरसता को एक साथ जोड़ा जा सकता है।
बैठक के दूसरे सत्र में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सामाजिक सद्भाव को कोई नई अवधारणा मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह भारतीय समाज का स्वाभाविक गुण है। उन्होंने कहा कि समाज में सज्जन शक्ति का जागरण, आचरण में पंच परिवर्तन और निरंतर संवाद आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। भागवत ने स्पष्ट किया कि जब समाज संगठित और सद्भावपूर्ण होता है, तभी राष्ट्र मजबूत बनता है। उनका यह संदेश केवल वैचारिक नहीं, बल्कि व्यवहारिक बदलाव की ओर संकेत करता है, जिसमें हर व्यक्ति की भूमिका अहम है।
इस आयोजन का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाकर एकता, समरसता और राष्ट्रोत्थान के विचार को मजबूत करना था। मंच पर मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पांडेय सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे और कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन तथा भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पण के साथ हुआ।
पंडित प्रदीप मिश्रा, जो सीहोर के कुबेरेश्वर धाम से जुड़े हैं और शिव महापुराण कथा के माध्यम से देश-विदेश में लाखों श्रद्धालुओं तक अपनी बात पहुंचाते हैं, इस बैठक में एक कथावाचक से आगे बढ़कर सामाजिक संदेशवाहक के रूप में नजर आए। उनके वक्तव्य ने धार्मिक प्रतीकों के माध्यम से सामाजिक एकता का संदेश दिया, जिसे समर्थकों ने प्रेरणादायक बताया, वहीं कुछ राजनीतिक दलों ने इसे वैचारिक रंग देने का प्रयास बताया।
कुल मिलाकर, संघ की सामाजिक सद्भाव बैठक में प्रदीप मिश्रा का "संघ-शिव" तुलना वाला बयान इस आयोजन का सबसे चर्चित पहलू बनकर उभरा। विष पीकर रक्षा करने का यह प्रतीकात्मक संदेश समाज में सहनशीलता, एकता और राष्ट्रहित के लिए त्याग का भाव जगाता दिखा। नए साल की शुरुआत में आयोजित इस बैठक ने सामाजिक सद्भाव और एकजुटता को लेकर एक बार फिर व्यापक बहस और संवाद को जन्म दिया है।
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