Indore News: इंदौर के भागीरथपुरा में जनाक्रोश, मौतों से टूटा सब्र, नेताओं को दिखाया ‘वापसी का रास्ता’

MP News: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हो रही लगातार मौतों के बाद अब लोगों का धैर्य जवाब दे गया है। जिस मोहल्ले में मातम पसरा है, वहीं आज गुस्से की चिंगारी सड़कों पर साफ दिखाई दी।

अपनों को खोने का दर्द झेल रहे लोगों का आक्रोश नेताओं पर फूट पड़ा और हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें इलाके से लौटने पर मजबूर होना पड़ा।

Public anger in Indore Bhagirathpura as deaths shattered patience leaders were reprimanded

नेताओं के पहुंचते ही भड़का गुस्सा

शुक्रवार को जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन वर्मा सहित अन्य नेता भागीरथपुरा पहुंचे, तो स्थानीय लोगों ने उनका जोरदार विरोध किया। क्षेत्रवासियों ने "वापस जाओ... वापस जाओ" के नारे लगाए और काले झंडे दिखाकर नाराजगी जाहिर की। गुस्साए लोगों का कहना था कि जब उनके घरों में मौतें हो रही थीं, तब न तो जनप्रतिनिधि पहुंचे और न ही प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया। अब सिर्फ हालात बिगड़ने के बाद संवेदना दिखाने आना उन्हें मंजूर नहीं।

'हमें बयान नहीं, जवाब चाहिए'

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने साफ कहा कि उन्हें नेताओं के बयान और आश्वासन नहीं चाहिए, बल्कि यह जानना है कि दूषित पानी की सप्लाई आखिर किसकी लापरवाही से हुई और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। महिलाओं और युवाओं ने आक्रोशित होकर कहा कि महीनों से गंदे पानी की शिकायत की जा रही थी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। आज जब जानें चली गईं, तब सभी राजनीतिक दल मौके पर पहुंच रहे हैं।

काले झंडे, नारों और आक्रोश का माहौल

इलाके में हालात तनावपूर्ण रहे। हाथों में काले झंडे लिए लोग सड़कों पर उतर आए और नेताओं के काफिले के सामने जमकर नारेबाजी की। कुछ देर के लिए स्थिति ऐसी बन गई कि पुलिस और प्रशासन को बीच-बचाव करना पड़ा। स्थानीय लोगों के विरोध के चलते नेताओं को बिना बातचीत किए ही लौटना पड़ा।

सत्ता और विपक्ष दोनों से नाराज जनता

भागीरथपुरा की जनता का गुस्सा सिर्फ एक दल तक सीमित नहीं दिखा। लोगों का कहना है कि चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी ने चुनाव के वक्त वादे किए, लेकिन बुनियादी सुविधा जैसे साफ पानी की व्यवस्था तक नहीं हो पाई। यही वजह है कि अब हर राजनीतिक चेहरे को शक की नजर से देखा जा रहा है।

मौतों ने बदला माहौल, भरोसा टूटा

दूषित पानी से हो रही मौतों ने पूरे इलाके का माहौल बदल दिया है। जिन घरों में कल तक चूल्हे जलते थे, वहां आज मातम पसरा है। लोगों का कहना है कि यह हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी है। भरोसा टूट चुका है और अब जनता जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है।

आगे क्या?

भागीरथपुरा में फूटा जनाक्रोश इस बात का संकेत है कि मामला सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं रहा, बल्कि जनप्रतिनिधियों और जनता के बीच भरोसे की दरार बन चुका है। अगर जल्द ठोस कार्रवाई, पारदर्शी जांच और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था नहीं हुई, तो यह आक्रोश और उग्र रूप ले सकता है। फिलहाल, इंदौर के इस इलाके में गुस्सा, दर्द और असंतोष एक साथ उबाल पर है।

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