इंदौर में 65.57 लाख की ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी, फेसबुक रील से शुरू हुआ खेल, फर्जी ऐप में 4 करोड़ का दिखाया प्रॉफिट
Online Trading Fraud: इंदौर में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर एक व्यापारी के साथ 65 लाख 57 हजार रुपये की बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। एरोड्रम पुलिस ने सोमवार को महेश एवेन्यू छोटा बांगड़दा रोड निवासी दीपक चांदोरे की शिकायत पर 4 मोबाइल नंबरों के आधार पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ठगों ने फेसबुक रील्स से शुरू कर फर्जी ग्रुप, ऐप और IPO निवेश के झांसे में व्यापारी को लूट लिया। पीड़ित ने बताया कि शुरुआत में छोटी रकम पर मुनाफा दिखाकर भरोसा बढ़ाया गया, फिर करोड़ों का प्रॉफिट दिखाकर लगातार बड़ी रकम ट्रांसफर कराई गई। जब पैसे निकालने की कोशिश की तो टालमटोल शुरू हो गया।

ठगी कैसे हुई? पीड़ित दीपक चांदोरे का पूरा बयान
दीपक चांदोरे ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि दिसंबर 2025 में वह फेसबुक पर रील्स देख रहा था। तभी एक ट्रेडिंग लिंक का विज्ञापन दिखाई दिया। लिंक पर क्लिक करने के बाद वह "A69 ABCL Wealth Navigator Club" नाम के एक व्हाट्सएप/टेलीग्राम ग्रुप से जुड़ गया। ग्रुप में रोजाना सदस्य मुनाफे के स्क्रीनशॉट, मैसेज, शॉर्ट वीडियो और ऑनलाइन लेक्चर शेयर करते थे। करीब एक महीने तक गतिविधियां देखने के बाद दीपक को पूरा भरोसा हो गया कि यह प्लेटफॉर्म सही है और इसमें ठगी नहीं हो सकती।
ग्रुप में इन्वेस्टमेंट के लिए मैसेज करने पर एक व्हाट्सएप नंबर से दीया मेहरा नाम की युवती ने संपर्क किया। उसने अकाउंट खोलने की प्रक्रिया बताई और एक लिंक भेजी, जिसमें Aditya Birla Capital का नाम लिखा था। लिंक पर एक फॉर्म भरा गया। फिर प्ले स्टोर से एक ऐप डाउनलोड कराया गया। बताया गया कि अकाउंट संबंधी सभी काम इसी ऐप से होंगे और बैंक का पूरा लेन-देन भी यहीं से देखा जा सकता है। आइडी-पासवर्ड किसी को नहीं बताने की सलाह दी गई। शुरुआत में 5 हजार रुपये डलवाए गए। रकम पर मुनाफा दिखाकर भरोसा बढ़ाया गया।
29 जनवरी 2026 से दीपक ने लगातार रकम ट्रांसफर करना शुरू किया। दीया मेहरा ने व्हाट्सएप पर काउंसलिंग करते हुए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर रुपए इनवेस्ट करने के प्लान बताए। दीपक उसके बताए अनुसार रुपए डालता रहा। 20 फरवरी 2026 तक ऐप पर करीब 4 करोड़ रुपये का प्रॉफिट दिखाया गया।
जब दीपक ने ऐप से अपने अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने की कोशिश की, तो तकनीकी कारण बताकर टालमटोल किया गया। बाद में मोबाइल नंबरों से संपर्क कर नए IPO में निवेश का झांसा दिया गया। इसके बाद भी दीपक रुपए निकालने की कोशिश करता रहा। जब रुपए नहीं निकले तो उसे संदेह हुआ। तब तक उससे 65 लाख 57 हजार रुपये ठगे जा चुके थे। दीपक ने साइबर सेल में शिकायत की, जिसके बाद मामला एरोड्रम पुलिस को ट्रांसफर हुआ।
पुलिस ने क्या किया?
एरोड्रम पुलिस ने 4 मोबाइल नंबरों के आधार पर सोमवार को FIR दर्ज कर ली है। पुलिस ने बताया कि जांच शुरू हो चुकी है। ठगों के मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, ऐप और ट्रांजेक्शन डिटेल्स की जांच की जा रही है। साइबर सेल भी जांच में शामिल है। पुलिस का कहना है कि ठगों ने फर्जी ऐप और ग्रुप बनाकर व्यवस्थित तरीके से ठगी की है। जांच में पता चला है कि ठगों ने कई अन्य लोगों को भी इसी तरह फंसाया है।
ठगी का पैटर्न और सावधानियां
- सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन और रील्स से ग्रुप में जोड़ा जाता है।
- ग्रुप में मुनाफे के फर्जी स्क्रीनशॉट और वीडियो शेयर कर भरोसा बनाया जाता है।
- छोटी रकम पर मुनाफा दिखाकर बड़ा निवेश कराया जाता है।
- ऐप से पैसे निकालने पर टालमटोल या नया निवेश का झांसा दिया जाता है।
- अंत में अकाउंट ब्लॉक या ऐप बंद कर ठग भाग जाते हैं।
पुलिस ने शहरवासियों से अपील की है कि:
किसी भी अनजान ट्रेडिंग ग्रुप या ऐप पर भरोसा न करें। छोटी रकम पर मुनाफा दिखाने वाले दावों से सावधान रहें।
निवेश से पहले SEBI रजिस्टर्ड ब्रोकर या बैंक से सलाह लें। संदिग्ध लिंक या ऐप डाउनलोड न करें। ठगी होने पर तुरंत साइबर सेल (1930) या नजदीकी थाने में शिकायत करें।
यह मामला इंदौर में ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी के बढ़ते मामलों को फिर से उजागर करता है। पुलिस ने कहा कि जांच पूरी होने पर ठगों के नेटवर्क का खुलासा होगा। फिलहाल, दीपक चांदोरे के खाते से ट्रांसफर हुई राशि की डिटेल्स और नंबरों की जांच तेज कर दी गई है।












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