कांग्रेस विधायक ने ऐसा क्यों कहा कि अब गंदगी खा लेना, दमोह पैर धुलाई कांड, परिजन से बातचीत का VIDEO वायरल
मध्य प्रदेश के दमोह जिले का सतरिया गांव एक बार फिर सुर्खियों में है। जहां हाल ही में हुए "पैर धुलाई कांड" के बाद अब कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा का एक नया वीडियो सामने आया है। वीडियो में विधायक एक बुजुर्ग को यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं - "अब गंदगी खा लेना..."
वीडियो के सामने आते ही सियासत गरमा गई है। बीजेपी ने इसे ओबीसी समाज का अपमान बताया है, जबकि कांग्रेस इसे साजिश कह रही है।

क्या है पूरा मामला
दरअसल, सतरिया गांव में ब्राह्मण और कुशवाहा समाज के बीच जातीय विवाद तब भड़का जब एक ब्राह्मण युवक अनुज पांडे ने एक ओबीसी युवक पुरुषोत्तम कुशवाहा से पैर धुलवाकर पानी पिलाया। इस अमानवीय हरकत का वीडियो वायरल होते ही पूरे मध्य प्रदेश में बवाल मच गया। ओबीसी संगठनों ने इसे जातीय अपमान करार दिया, तो राजनीतिक दलों की एंट्री भी होने लगी।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल पहुंचा सतरिया गांव
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर एक प्रतिनिधिमंडल गांव पहुंचा। इसमें सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा, दतिया विधायक फूल सिंह बरैया और पूर्व विधायक विनय सक्सेना शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित युवक और उसके परिजनों से मुलाकात की। यहीं से शुरू हुई विवाद की नई कहानी...
विधायक ने क्या कहा था?
पीड़ित युवक के चाचा से बातचीत के दौरान चाचा ने कहा - "हमें किसी से कोई डर नहीं, किसी की गलती नहीं थी।"
इतना सुनते ही विधायक कुशवाहा पास झुके और बोले - "अगली बार गंदगी खा लेना।" उन्होंने यह वाक्य दोहराया और आगे बढ़ गए। मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने मोबाइल से वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
बीजेपी का पलटवार
वीडियो सामने आते ही बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पार्टी के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा - "यह कांग्रेस की असंवेदनशीलता का चरम है।जो परिवार अपमान का शिकार हुआ, उसी को अब कांग्रेस विधायक गंदगी खाने को कह रहे हैं। राहुल गांधी और जीतू पटवारी को ओबीसी समाज से माफी मांगनी चाहिए।"
विधायक की सफाई
वहीं, विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने सफाई दी है। उन्होंने कहा -"मुझे नहीं पता किसने वीडियो बनाकर वायरल किया।मैंने पीड़ित के चाचा से कान में कहा था - 'डरो मत, हम सब तुम्हारे साथ हैं।' वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।"
गांव में तनाव, राजनीति तेज
फिलहाल सतरिया गांव में प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है।गांव में बाहरी लोगों के प्रवेश पर निगरानी रखी जा रही है। वहीं, सोशल मीडिया पर "जाति बनाम राजनीति" की बहस तेज है। एक ओर कांग्रेस विधायक विवादों में घिरे हैं, तो दूसरी ओर बीजेपी इसे ओबीसी अस्मिता से जोड़कर मैदान में उतर आई है।
अंत में सवाल वही है -
- क्या सतरिया गांव का यह मामला इंसाफ की लड़ाई बनेगा
- या जातीय और राजनीतिक जंग का नया मोर्चा?
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