MP News: महाकाल संग खेली गई हर्बल गुलाल की होली, भस्मारती में अद्भुत नज़ारा, चंद्र ग्रहण के बीच ऐसे हुए दर्शन
तड़के 4 बजे भस्मारती के दौरान बाबा महाकाल संग हर्बल गुलाल की होली खेली गई। चंद्र ग्रहण के कारण पूरे प्रदेश में असमंजस के बीच उज्जैन महाकाल मंदिर में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।
MP News ujjain: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में मंगलवार को महाकालेश्वर मंदिर में होली का पर्व बड़ी धूमधाम और भक्ति भाव से मनाया गया। तड़के सुबह 4 बजे शुरू हुई भस्मारती के दौरान बाबा महाकाल के साथ पुजारी-पुरोहितों ने हर्बल गुलाल से होली खेली।
भगवान शिव के पूरे परिवार-माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय-को भी हर्बल गुलाल अर्पित किया गया। भगवान महाकाल का हरि ओम जल से अभिषेक करने के बाद दूध, दही, घी, शकर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन किया गया। नंदी जी का स्नान, ध्यान और विशेष पूजन हुआ।

भगवान महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों से बनी माला धारण की। भांग, फल और मिठाई का भोग लगाया गया।
इस वर्ष होली के दौरान चंद्र ग्रहण होने के कारण कई स्थानों पर धुलेंडी पर्व मनाने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उज्जैन के अलावा हरदा, शाजापुर, सीहोर, बड़वानी सहित कई जिलों में आज ही होली खेली जा रही है। महाकाल मंदिर में भी चंद्र ग्रहण के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गईं। ग्रहण शाम 6:32 से 6:46 बजे तक 14 मिनट का रहेगा, लेकिन इसका वेध काल सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा। इस कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शकर का भोग अर्पित किया गया।
ग्रहण के दौरान मंदिर की व्यवस्थाएं
शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने बताया कि चंद्र ग्रहण के कारण महाकाल मंदिर में भस्मारती से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक पट बंद नहीं किए जाएंगे। इस दौरान श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। हालांकि, वेध काल के चलते सुबह की नियमित भोग आरती में केवल शकर का भोग अर्पित किया जाएगा। ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके बाद भगवान का स्नान एवं पूजन होगा, फिर भोग अर्पित कर संध्या आरती होगी।
पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि महाकाल मंदिर पर ग्रहण का प्रभाव क्यों नहीं होता, इसका कारण यह है कि भगवान महाकाल कालों के काल कहलाते हैं। दक्षिण दिशा काल की मानी जाती है और महाकाल का मुख दक्षिण की ओर है। इसलिए वे काल पर नियंत्रण रखते हैं। इस कारण कोई भी ग्रह, नक्षत्र या ग्रहण महाकाल को प्रभावित नहीं कर सकता। ग्रहण के दिन मंदिर की व्यवस्थाएं सामान्य दिनों की तरह रहेंगी, लेकिन ग्रहण के दौरान न पुजारी और न ही श्रद्धालु भगवान को स्पर्श करेंगे। इस दौरान गर्भगृह में पुजारी मंत्रोच्चार करेंगे। ग्रहण समाप्त होने के बाद पुजारी स्नान कर मंदिर का शुद्धिकरण करेंगे, फिर भगवान का जलाभिषेक किया जाएगा। शाम को भोग अर्पित किया जाएगा।
कल से ठंडे जल से होगा स्नान
महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या में परिवर्तन होता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार आरती का समय तय होता है, जबकि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार समय तय किया जाता है। इस साल 4 मार्च से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा शुरू हो रही है, जिससे भगवान महाकाल की दिनचर्या में भी परिवर्तन होगा। इस दिन से गर्मी की शुरुआत मानी जाती है। भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। यह क्रम शरद पूर्णिमा तक चलेगा। इस अवधि में प्रतिदिन होने वाली 5 आरतियों में से 3 के समय में परिवर्तन किया जाएगा।
श्रद्धालुओं में भक्ति और उत्साह
होलिका दहन के साथ ही महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लोग बाबा महाकाल के दर्शन कर होली की बधाई दे रहे थे। भस्मारती के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों ने हर्बल गुलाल उड़ाया और "हर हर महादेव" के जयकारे लगाए। ग्रहण के कारण भोग में बदलाव के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। कई श्रद्धालु शाम को ग्रहण समाप्त होने के बाद भी मंदिर पहुंचकर दर्शन करने की तैयारी में हैं।
यह होली महाकाल नगरी में एक अलग ही रंग लेकर आई है। जहां एक ओर त्योहार का उत्साह है, वहीं दूसरी ओर चंद्र ग्रहण के कारण मंदिर की व्यवस्थाओं में विशेष सावधानियां बरती गई हैं। महाकाल मंदिर की यह परंपरा और भक्ति भाव प्रदेश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।












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