MP News: मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक फैसला, अब तलाकशुदा बेटियां भी होंगी परिवार पेंशन की हकदार
MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और संवेदनशील निर्णय लिया है। अब तलाकशुदा बेटियां भी अपने माता-पिता की परिवार पेंशन (Family Pension) की पात्र होंगी। बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
इस फैसले से प्रदेश की हजारों तलाकशुदा, विधवा और परित्यक्त बेटियों को आर्थिक सुरक्षा का मजबूत सहारा मिलेगा, जो अब तक नियमों की अस्पष्टता के कारण परिवार पेंशन से वंचित रह जाती थीं।

पात्रता का दायरा बढ़ा, नियमों की अस्पष्टता खत्म
अब तक मध्य प्रदेश के परिवार पेंशन नियमों में तलाकशुदा बेटियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। कई विभागीय स्तर पर उन्हें पेंशन से बाहर कर दिया जाता था। नए फैसले के तहत तलाकशुदा बेटियों को स्पष्ट रूप से पात्र श्रेणी में शामिल कर दिया गया है, जिससे अब किसी तरह की व्याख्या या भेदभाव की गुंजाइश नहीं रहेगी। सरकार का कहना है कि यह संशोधन सामाजिक न्याय की भावना के अनुरूप किया गया है।
क्या होंगी शर्तें, किन्हें मिलेगा लाभ?
सरकार द्वारा तय शर्तों के अनुसार, बेटी की उम्र की कोई सीमा नहीं होगी, लेकिन उसे आर्थिक रूप से असहाय होना जरूरी है। यदि तलाकशुदा बेटी की अपनी कोई स्थायी आय, नौकरी या पेंशन नहीं है, तभी वह परिवार पेंशन की हकदार होगी। माता-पिता की मृत्यु के बाद उसे परिवार पेंशन का 50 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। यदि परिवार में अन्य पात्र सदस्य होंगे तो नियमानुसार पेंशन का विभाजन किया जाएगा।
फैसले की पृष्ठभूमि: कोर्ट के आदेश और सामाजिक जरूरत
यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। बीते वर्षों में उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में यह स्पष्ट किया गया था कि तलाकशुदा बेटियां भी परिवार पेंशन की पात्र हो सकती हैं, यदि वे आर्थिक रूप से निर्भर हों। इसके बावजूद प्रदेश में नियमों में स्पष्ट प्रावधान न होने के कारण कई मामलों में बेटियों को पेंशन नहीं मिल पाई। सरकार ने अब न्यायालयों की भावना के अनुरूप नियमों में संशोधन कर इस विसंगति को दूर किया है।
मुख्यमंत्री बोले-संवेदनशीलता और न्याय का प्रतीक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "तलाकशुदा बेटियां भी समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्हें परिवार पेंशन से वंचित रखना अन्याय है। यह निर्णय संवेदनशीलता, समानता और सामाजिक न्याय का प्रतीक है।"
कितनी बेटियों को मिलेगा सीधा फायदा?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अनुमानित 15 से 20 हजार तलाकशुदा बेटियां इस फैसले से सीधे लाभान्वित हो सकती हैं। इनमें से अधिकांश बेटियां तलाक के बाद आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में जीवन यापन कर रही हैं। पेंशन राशि माता-पिता की मूल पेंशन के आधार पर तय होगी, जिससे कई मामलों में 10 हजार से 25 हजार रुपये प्रतिमाह तक का सहारा मिल सकता है।
नियमों में संशोधन का व्यापक प्रभाव
इस फैसले से सिर्फ बेटियों को ही नहीं, बल्कि उनके बच्चों और परिवार को भी आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। यह कदम तलाकशुदा महिलाओं के प्रति समाज में मौजूद नकारात्मक सोच और भेदभाव को तोड़ने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। साथ ही मध्य प्रदेश अब उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जहां पहले से ही तलाकशुदा बेटियों को परिवार पेंशन का लाभ दिया जा रहा है।
कर्मचारी संगठनों और महिला संगठनों की प्रतिक्रिया
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ सहित कई कर्मचारी संगठनों और महिला अधिकार संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। एक महिला कार्यकर्ता ने कहा कि तलाक के बाद महिलाएं सबसे ज्यादा आर्थिक असुरक्षा का सामना करती हैं और यह फैसला उन्हें सम्मान के साथ जीने का अवसर देगा। संगठनों ने यह मांग भी की है कि पुराने मामलों में भी पेंशन बहाल करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए, जहां बेटियों को पहले नियमों की अस्पष्टता के कारण पेंशन नहीं मिल पाई थी।
जल्द होगी अधिसूचना, पात्र बेटियों को मिलेगा लाभ
सरकार ने स्पष्ट किया है कि संशोधित परिवार पेंशन नियमों की अधिसूचना जल्द जारी की जाएगी। इसके बाद पात्र तलाकशुदा बेटियां आवेदन कर पेंशन का लाभ ले सकेंगी। यह फैसला मध्य प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है।












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