MP भोपाल की समरीन की गुहार— मेरे जिगर के टुकड़ों को मुझसे जुदा न करें, बच्चों को अकेले पाकिस्तान कैसे भेजूं?

MP News: एक मां की आंखें डबडबाई हैं, दिल में डर है, और होठों पर दुआ - सिर्फ इतनी सी मांग है कि उसके मासूम बच्चों को उससे जुदा न किया जाए। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रहने वाली समरीन, इन दिनों एक असमंजस और मानसिक पीड़ा के दौर से गुजर रही हैं।

वजह है भारत सरकार का ताजा निर्देश, जिसमें पाकिस्तानी नागरिकता रखने वाले लोगों को तत्काल भारत छोड़ने के लिए कहा गया है। समरीन के दो बच्चे - एक साल की जुनेरा और छह साल का शाज़िल, पाकिस्तान के नागरिक हैं, और फिलहाल भारत में वीजा की मियाद खत्म हो चुकी है।

MP News Bhopal Samreen plea How can I send my small children alone to Pakistan

समरीन खुद भारतीय नागरिक हैं, लेकिन शादी के बाद पाकिस्तान गई थीं। अब जब वह अपने दोनों बच्चों को भारत लाकर नानी से मिलाने और पासपोर्ट रिन्यू कराने आईं, तो हालात कुछ ऐसे बने कि वापसी असंभव होती जा रही है - और अब सवाल है कि क्या ये मासूम बच्चे मां से अलग होकर अकेले पाकिस्तान भेजे जाएंगे?

MP News: पहली बार भारत लौटीं, मगर फंस गईं मुश्किल में

समरीन छह साल बाद पहली बार अपने बच्चों को लेकर भारत लौटी थीं, ताकि जुनेरा और शाज़िल अपनी नानी से मिल सकें। वे दो महीने से भोपाल में हैं और इस दौरान उनका पासपोर्ट, जो दिसंबर 2025 में समाप्त होने वाला है, रिन्यू कराने और पाकिस्तानी वीजा के एक्सटेंशन का काम पूरा करने की योजना थी। लेकिन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले ने उनके सारे प्लान पर पानी फेर दिया। इस हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं निलंबित कर दीं और सभी पाकिस्तानी नागरिकों को 27 अप्रैल तक देश छोड़ने का आदेश दिया।

इस फैसले ने समरीन के सामने एक असमंजस की स्थिति पैदा कर दी। उनके बच्चों के पास पाकिस्तानी नागरिकता है, और सरकार के आदेश के मुताबिक, उन्हें पाकिस्तान लौटना होगा। लेकिन समरीन का पाकिस्तानी वीजा समाप्त हो चुका है, और नया वीजा लेना मौजूदा हालात में लगभग असंभव है। समरीन कहती हैं, "मैं अपने सवा साल की बेटी और छह साल के बेटे को अकेले पाकिस्तान कैसे भेज दूं? वहां मेरी बीमार और बुजुर्ग सास के अलावा कोई नहीं है। मेरे पति दुबई में नौकरी करते हैं। इतने छोटे बच्चे मां के बिना कैसे रहेंगे?"

"बच्चों को मुझसे अलग करना नामुमकिन"

समरीन ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा, "मैंने बच्चों के वीजा एक्सटेंशन के लिए आवेदन दिया था, लेकिन लगता है वह खारिज हो गया। मेरा पासपोर्ट रिन्यू होने का इंतज़ार है, और मैं लखनऊ जाकर प्रक्रिया पूरी कर चुकी हूं। लेकिन अब तक पासपोर्ट नहीं आया।" वे आगे कहती हैं, "पाकिस्तान में हमारे घर में कोई नहीं है। मेरी सास बीमार हैं, और पति दुबई में हैं। बच्चों की देखभाल वहां कौन करेगा? मैं सरकार से मानवीय आधार पर अपील करती हूं कि मेरे बच्चों का वीजा बढ़ाया जाए। जब हालात सामान्य होंगे और मेरा पासपोर्ट रिन्यू हो जाएगा, मैं खुद उन्हें लेकर पाकिस्तान जाऊंगी।"

समरीन ने यह भी बताया कि उन्होंने पाकिस्तानी नागरिकता नहीं ली, ताकि भारत लौटने का रास्ता खुला रहे। वे कहती हैं, "मैं वीजा एक्सटेंशन पर पाकिस्तान में रह रही थी। 2021 में मेरा वीजा खत्म हुआ था, तब भी एक्सटेंशन लेकर रुकी। भारत लौटने के लिए मैंने एग्ज़िट परमिट लिया था, लेकिन अब नया वीजा मिलना मुश्किल है।"

MP News: पुलिस को दी अर्जी, इंतज़ार में समरीन

समरीन ने अपनी स्थिति भोपाल पुलिस को बताई और थाने में लिखित आवेदन भी जमा किया। पुलिस ने उन्हें फिलहाल यहीं रहने को कहा है और मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया है। समरीन कहती हैं, "पुलिस ने कहा है कि एक बैठक चल रही है, और जल्द फैसला बताया जाएगा। मैं बस यही चाहती हूं कि मेरे बच्चों को मुझसे अलग न किया जाए।"

वे पहलगाम हमले की निंदा करते हुए कहती हैं, "जो हुआ, वह बहुत गलत था। दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। लेकिन इसकी सजा हम जैसे आम लोगों को क्यों? हम दशकों से अपने परिवारों के साथ शांति से रह रहे हैं। अचानक हमें देश छोड़ने को कहना ठीक नहीं।"

मध्य प्रदेश में 9 बच्चों का मामला

समरीन के बच्चों सहित मध्य प्रदेश में कुल नौ ऐसे बच्चे हैं, जिनके पिता पाकिस्तानी और मां भारतीय हैं। इनमें चार बच्चे इंदौर, तीन जबलपुर, और दो भोपाल में हैं। इन बच्चों की कस्टडी और नागरिकता को लेकर प्रशासन असमंजस में है। मध्य प्रदेश पुलिस ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय से मार्गदर्शन मांगा है।

इसके अलावा, भोपाल में एक अन्य पाकिस्तानी हिंदू, सुनील, भी इसी तरह की स्थिति का सामना कर रहे हैं। उनके परिवार को लॉन्ग टर्म वीजा मिल चुका है, लेकिन सुनील विजिटर वीजा पर हैं। वे भी सवाल उठाते हैं, "अकेले पाकिस्तान कैसे लौटूं?"

मानवीय संकट और सवाल

समरीन का मामला न केवल कानूनी, बल्कि गहरा मानवीय संकट भी दर्शाता है। क्या इतने छोटे बच्चों को उनकी मां से अलग करना उचित है? क्या सरकार इस तरह के मामलों में मानवीय आधार पर कोई राहत दे सकती है? समरीन और उनके जैसे कई परिवार केंद्र सरकार के अगले फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं।

फिलहाल, समरीन की गुहार यही है-उनके बच्चों को उनके साथ रहने की इजाज़त दी जाए, ताकि जब हालात सामान्य हों, वे खुद अपने परिवार के साथ सम्मानजनक तरीके से पाकिस्तान लौट सकें।

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