MP News: जानिए नगरपालिका-परिषद अध्यक्षों के चुनाव कैसे होंगे डायरेक्ट, विधानसभा में संशोधन विधेयक पारित
MP News: मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन आज नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 और नगर निगम (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 को पारित कर दिया। इन संशोधनों से राज्य में नगरपालिका और नगर परिषद के अध्यक्षों का चुनाव दोबारा प्रत्यक्ष (डायरेक्ट) प्रणाली से होगा, यानी मतदाता सीधे अध्यक्ष चुनेंगे।
इसके साथ ही राइट-टू-रिकॉल (अविश्वास प्रस्ताव) का समय सीमा भी ढाई साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है। विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा ने इसे "स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने वाला कदम" बताया, जबकि कांग्रेस ने "पार्षदों की भूमिका कम करने का प्रयास" करार दिया।

सत्र में विधेयक को ध्वनिमत से पारित कराया गया, जिसमें कोई वोटिंग नहीं हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में कहा, "यह बदलाव 2022 के अप्रत्यक्ष चुनावों से उपजी समस्याओं का समाधान है। प्रत्यक्ष चुनाव से पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय नेतृत्व मजबूत होगा।" नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बताया कि यह संशोधन नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 43-क में किया गया है। विधेयक राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद कानून बन जाएगा, जिसका असर 2027 के नगरीय निकाय चुनावों पर पड़ेगा।
संशोधन का पूरा विवरण: डायरेक्ट चुनाव और राइट-टू-रिकॉल में बदलाव
2022 में तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार ने नगरपालिका और नगर परिषद के अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष (पार्षदों द्वारा) कराने का फैसला लिया था, जिससे कई जगह अविश्वास प्रस्तावों और पार्षदों की नाराजगी बढ़ी। अब मोहन यादव सरकार ने इसे पलट दिया है। मुख्य बदलाव:
1. डायरेक्ट चुनाव की वापसी
- नगरपालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव अब मतदाताओं द्वारा सीधा होगा, न कि पार्षदों के वोट से।
- इससे पहले 2022 चुनाव अप्रत्यक्ष थे, जिससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक घमासान बढ़ा था। अब मतदाता अध्यक्ष चुनेंगे, जो स्थानीय मुद्दों पर सीधे जवाबदेह होंगे।
2. राइट-टू-रिकॉल (अविश्वास प्रस्ताव) का समय तीन साल
- पहले अविश्वास प्रस्ताव ढाई साल बाद लाया जा सकता था, अब इसे तीन साल किया गया है।
- अविश्वास के लिए दो-तिहाई (2/3) की बजाय तीन-चौथाई (3/4) पार्षदों का समर्थन अनिवार्य।
- यदि अविश्वास सफल होता है, तो राज्य निर्वाचन आयोग उप-चुनाव कराएगा।
ये बदलाव नगरपालिका अधिनियम 1961 और नगर निगम अधिनियम 1956 में संशोधन से होंगे। कैबिनेट ने 25 नवंबर को इन्हें मंजूरी दी थी, और शीत सत्र में पेश किया गया।
सदन में चर्चा: भाजपा का बचाव, कांग्रेस का विरोध
सदन में विधेयक पर करीब डेढ़ घंटे चर्चा हुई। भाजपा के विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा, "प्रत्यक्ष चुनाव से स्थानीय स्तर पर सशक्त नेतृत्व बनेगा। राइट-टू-रिकॉल का समय बढ़ाने से स्थिरता आएगी।" नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया, "यह बदलाव पार्षदों की नाराजगी और अविश्वास प्रस्तावों के दुरुपयोग को रोकने के लिए है। 2022 चुनावों में 100 से अधिक अविश्वास प्रस्ताव आए थे।"
विपक्षी कांग्रेस ने तीखा विरोध जताया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, "यह विधेयक पार्षदों की आवाज दबाने का प्रयास है। डायरेक्ट चुनाव तो अच्छा है, लेकिन राइट-टू-रिकॉल को तीन साल करना लोकतंत्र के खिलाफ है। सरकार स्थानीय नेताओं को लंबे समय तक कुर्सी पर बिठाना चाहती है।" कांग्रेस विधायक सुखदेव पांसे ने आरोप लगाया, "2022 में अप्रत्यक्ष चुनाव भाजपा की हार बचाने के लिए था, अब डायरेक्ट से फिर वोट बटोरना चाहते हैं।" विपक्ष ने वॉकआउट की धमकी दी, लेकिन सदन ने ध्वनिमत से विधेयक पास करा लिया।
2022 का अप्रत्यक्ष चुनाव क्यों? अब क्यों बदलाव?
2022 के नगरीय निकाय चुनावों में भाजपा ने अधिकांश सीटें जीतीं, लेकिन अप्रत्यक्ष चुनाव से कई जगह पार्षदों के बीच फूट पड़ी। जुलाई 2022 से अब तक 150 से अधिक अविश्वास प्रस्ताव आए, जिनमें 40 सफल हुए। इससे स्थानीय प्रशासन ठप हो गया। मोहन यादव सरकार ने इसे सुधारने के लिए संशोधन लाया। विशेषज्ञों का कहना है कि डायरेक्ट चुनाव से पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन राइट-टू-रिकॉल का समय बढ़ाने से अध्यक्षों को स्थिरता मिलेगी।
राज्य निर्वाचन आयोग ने हाल ही में (24 नवंबर 2025) नगरपालिका चुनाव नियमों में पारदर्शिता के लिए शपथ-पत्र अनिवार्य किया है, जिसमें उम्मीदवारों को आपराधिक मामलों का ब्योरा देना होगा। यह बदलाव 2027 चुनावों में लागू होगा।
2027 चुनावों पर असर: स्थानीय स्वशासन में नई व्यवस्था
यह संशोधन 2027 के नगरीय निकाय चुनावों को प्रभावित करेगा, जहां 16 नगर निगम, 93 नगर पालिका और 415 नगर पंचायतों के चुनाव होंगे। डायरेक्ट चुनाव से मतदाता भागीदारी बढ़ेगी, लेकिन तीन साल का राइट-टू-रिकॉल समय अध्यक्षों को लंबे कार्यकाल देगा। ग्रामीण विकास विशेषज्ञ डॉ अजय सोनी ने कहा, "यह स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करेगा, लेकिन विपक्ष की भूमिका कम न हो।"
स्थानीय नेतृत्व को सशक्तिकरण, लेकिन सवाल बरकरार
विधानसभा में पारित इन विधेयकों से मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में नई हवा चलेगी। डायरेक्ट चुनाव और राइट-टू-रिकॉल में बदलाव स्थानीय स्वशासन को मजबूत बनाने का प्रयास है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह पार्षदों के अधिकारों का हनन है। राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद कानून बनेगा, और 2027 चुनावों में इसका असर दिखेगा। वनइंडिया हिंदी सत्र की अन्य कार्यवाही पर नजर बनाए हुए है। क्या आपको लगता है डायरेक्ट चुनाव बेहतर है? कमेंट में बताएं।
*(रिपोर्ट: वनइंडिया हिंदी संवाददाता। विधानसभा कार्यवाही, सरकारी आदेश और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर।)*
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