मऊगंज तहसीलदार बीके पटेल सस्पेंड, किसान की कॉलर पकड़ने का VIDEO वायरल, CM के निर्देश पर रीवा कमिश्नर का एक्शन
MP News: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में प्रशासनिक अखाड़े में हंगामा मच गया है। उप तहसील देवतालाब के तहसीलदार बीके पटेल को रीवा डिवीजन के कमिश्नर बीएस जामोद ने सस्पेंड कर दिया है। मामला एक किसान की कॉलर पकड़कर झूमाझटकी करने का है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
घटना 25 सितंबर को गनिगमा गांव में हुई, लेकिन वीडियो शनिवार को सामने आने के बाद पूरे राज्य में सनसनी फैल गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को जब इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में किसानों के साथ होने वाले बर्ताव पर भी सवाल खड़े कर रही है।

मऊगंज, जो 2023 में रीवा से अलग होकर मध्य प्रदेश का 53वां जिला बना, यहां जमीन विवादों के मामले आम हैं। लेकिन इस बार का वीडियो इतना विवादास्पद है कि यह राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्ष ने इसे "प्रशासन की गुंडागर्दी" करार दिया है, जबकि प्रशासन इसे "कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश" बता रहा है। आइए, जानते हैं इस मामले की पूरी कहानी, तहसीलदार के बचाव से लेकर जांच तक।
वायरल वीडियो का खुलासा: कॉलर पकड़कर धमकी, "कौन है तू?"
घटना 25 सितंबर 2025 को उप तहसील देवतालाब के अंतर्गत आने वाले गनिगमा गांव में घटी। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि तहसीलदार बीके पटेल एक किसान सुषमेश पांडे की कॉलर पकड़कर उन्हें झकझोरते हुए कह रहे हैं, "कौन है तू? बकवास मत करना।" वीडियो की लंबाई मात्र 15-20 सेकंड है, लेकिन इसमें तहसीलदार का गुस्सा और किसान का अपमान साफ झलक रहा है। वीडियो सबसे पहले स्थानीय सोशल मीडिया ग्रुपों में शेयर हुआ और अब ट्विटर (एक्स) पर #TehsildarMisconduct और #MauganjVideo जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
एक अन्य किसान कौशलेश प्रजापति ने भी तहसीलदार पर गाली देने का आरोप लगाया है। कौशलेश ने बताया, "हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करने गए थे, लेकिन तहसीलदार साहब ने हमें अपमानित किया।" वीडियो वायरल होते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। कई किसानों ने कलेक्ट्रेट का घेराव करने की धमकी दी, लेकिन पुलिस ने स्थिति संभाल ली। यह वीडियो न केवल मऊगंज बल्कि रीवा डिवीजन के अन्य जिलों में भी चर्चा का विषय बन गया है।
जमीन विवाद की जड़: दो प्रजापति परिवारों के बीच पुरानी दुश्मनी
दरअसल, यह घटना गनिगमा गांव में दो प्रजापति परिवारों - रामप्रकाश प्रजापति और हरिशंकर प्रजापति - के बीच लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद से जुड़ी है। विवादित जमीन करीब 5 एकड़ की बताई जा रही है, जो दशकों पुरानी है। सिविल कोर्ट ने हाल ही में रामप्रकाश पक्ष के हक में फैसला सुनाया था। कोर्ट के आदेश पर प्रशासनिक टीम - जिसमें तहसीलदार बीके पटेल, नायब तहसीलदार, राजस्व अमला और पुलिस बल शामिल था - 25 सितंबर को कब्जा दिलाने पहुंची।
हरिशंकर पक्ष के किसानों ने इसका विरोध किया। ग्रामीणों के अनुसार, जब टीम ने कब्जा प्रक्रिया शुरू की, तो तनाव बढ़ गया। किसानों ने कथित तौर पर लोहे की सब्बल (कुदाल जैसा औजार) निकाल लीं और धमकी देने लगे। इसी दौरान तहसीलदार पटेल ने सुषमेश पांडे को रोका और कॉलर पकड़ लिया। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "विवाद पुराना है, लेकिन प्रशासन की टीम को ज्यादा बल की जरूरत थी। तहसीलदार अकेले ही आगे बढ़ गए।" कोर्ट का फैसला लागू कराने के लिए प्रशासन को कई बार गांव जाना पड़ा, लेकिन हर बार विरोध हुआ। इस बार वीडियो कैद हो गया, जो अब सबूत बन चुका है।
तहसीलदार का बचाव: "वीडियो एडिटेड, सब्बल से धमकी मिली - बचाव में कार्रवाई की"
मामले पर सफाई देते हुए तहसीलदार बीके पटेल ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो भ्रामक और एडिटेड है। उन्होंने बताया, "हम कोर्ट के आदेश का पालन करने गए थे, जो प्रशासन के लिए अनिवार्य है। वहां हारने वाले पक्ष के लोगों ने लोहे की सब्बल निकालकर हमें धमकाया। मारपीट की नीयत से दौड़े। ऐसी स्थिति में मैंने किसानों के खिलाफ कार्रवाई की ताकि कानून-व्यवस्था बिगड़े नहीं। वीडियो का पूरा संदर्भ नहीं दिखाया गया।" पटेल ने यह भी कहा कि वे खुद घायल हो सकते थे, इसलिए यह स्व-रक्षा थी।
मऊगंज कलेक्टर संजय कुमार ने तहसीलदार के जवाब का हवाला देते हुए कहा, "पटेल ने अपनी सफाई में बताया कि स्थिति तनावपूर्ण थी। लेकिन वीडियो से मामला गंभीर लग रहा है। हम जांच के बाद ही अंतिम फैसला लेंगे।" कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि तहसीलदार को नोटिस जारी किया गया था, और उनका जवाब रिकॉर्ड पर है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि वीडियो एडिटेड नहीं लगता, और यह प्रशासन की अहंकारी छवि को मजबूत करता है।
सीएम के हस्तक्षेप से तत्काल कार्रवाई: सस्पेंशन और जांच के आदेश
वीडियो वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को जब इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत रीवा डिवीजन के कमिश्नर बीएस जामोद को फोन कर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। कमिश्नर जामोद ने रविवार सुबह ही तहसीलदार बीके पटेल को सस्पेंड कर दिया। सस्पेंशन आदेश में कहा गया है कि "अनुशासनहीनता और किसान के साथ दुर्व्यवहार के आरोप सिद्ध होने पर यह कार्रवाई की जा रही है।" पटेल को विभागीय जांच का सामना करना पड़ेगा।
कलेक्टर संजय कुमार ने बताया, "मामले की जांच अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) को सौंपी गई है। एडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वे रविवार (29 सितंबर) तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। जांच में वीडियो का फॉरेंसिक परीक्षण, गवाहों के बयान और घटनास्थल का दौरा शामिल होगा।" मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इसकी पुष्टि की है कि "किसानों के हित में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" यह कार्रवाई मध्य प्रदेश सरकार की "किसान हितैषी" छवि को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।
राजनीतिक रंग: विपक्ष का हमला, प्रशासन पर सवाल
यह मामला तेजी से राजनीतिक हो गया है। कांग्रेस ने इसे "भाजपा सरकार में प्रशासन की गुंडागर्दी" बताते हुए हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट किया, "मऊगंज में तहसीलदार का किसान पर अत्याचार - यह है मोहन यादव सरकार का असली चेहरा।" विपक्षी नेता ने मांग की है कि तहसीलदार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो। वहीं, भाजपा ने कहा कि "कार्रवाई हो चुकी है, जांच पूरी होने पर सजा मिलेगी।"
मऊगंज के विधायक (भाजपा) ने भी बयान जारी कर कहा, "प्रशासन गलत था, लेकिन किसानों का भी सहयोग जरूरी।" स्थानीय स्तर पर किसान संगठनों ने विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है। मऊगंज, जो हाल ही में नया जिला बना है, यहां प्रशासनिक सुधारों की मांग लंबे समय से चल रही है। 2023 में जिला बनने के बाद भी कई विवादों ने सुर्खियां बटोरी हैं, जैसे अतिक्रमण हटाने पर हिंसा और रिश्वत के मामले।
नया जिला, पुराने विवाद
मऊगंज को 2023 में रीवा से अलग कर मध्य प्रदेश का 53वां जिला बनाया गया था। इसमें मऊगंज, हनुमना, नईगढ़ी और देवतालाब तहसीलें शामिल हैं। क्षेत्रफल 1866 वर्ग किलोमीटर है, और यह प्रयागराज व मिर्जापुर (यूपी) से सटा हुआ है। यहां कृषि मुख्य व्यवसाय है, लेकिन जमीन विवाद आम हैं। हाल ही में मऊगंज में अन्य घटनाएं भी सुर्खियां बनीं, जैसे बिजली पोल गिरने से किसान की मौत और अतिक्रमण पर हिंसा। यह सस्पेंशन जिले की प्रशासनिक छवि पर एक और सवालिया निशान लगाता है।
प्रभावित किसानों की जुबानी: "अपमान सहना पड़ा, न्याय चाहते हैं"
पीड़ित किसान सुषमेश पांडे ने बताया, "हम कोर्ट का फैसला मानने को तैयार थे, लेकिन तहसीलदार ने हमें जानवरों जैसा व्यवहार दिया। कॉलर पकड़कर धमकाया। अब सस्पेंशन हुआ, लेकिन हमारी इज्जत का क्या?" कौशलेश प्रजापति ने कहा, "गांव में सब डर गए हैं। प्रशासन का डर किसानों को और कमजोर कर रहा है।" किसान संगठनों ने एडीएम जांच पर भरोसा जताया, लेकिन चेतावनी दी कि अगर न्याय न मिला तो आंदोलन होगा।
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