Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

मालेगांव ब्लास्ट केस: साध्वी प्रज्ञा को क्लीन चिट पर दिग्विजय के बयान पर BJP प्रवक्ता केसवानी का तीखा हमला

मालेगांव बम विस्फोट मामले में 17 साल बाद विशेष NIA कोर्ट द्वारा साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और अन्य छह आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले ने देश में सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के बयान ने नया विवाद पैदा कर दिया।

उनके बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश केसवानी ने तीखा हमला बोला है, इसे कांग्रेस की सांप्रदायिक साजिश और हिंदुओं को बदनाम करने की कोशिश करार दिया।

Malegaon blast case Digvijay Singh statement on clean chit to Sadhvi Pragya Singh

डॉ केसवानी ने कहा, "सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। यह कोर्ट का फैसला दिग्विजय सिंह और कांग्रेस के मुंह पर तमाचा है।" इस खबर में हम मालेगांव ब्लास्ट केस, कोर्ट के फैसले, दिग्विजय सिंह के बयान, और डॉ. केसवानी की प्रतिक्रिया को विस्तार से देखेंगे।

मालेगांव ब्लास्ट केस: पृष्ठभूमि और कोर्ट का फैसला

29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में रमजान के पवित्र महीने और नवरात्रि से ठीक पहले भीकू चौक पर एक मोटरसाइकिल में हुए बम विस्फोट में 6 लोगों की मौत हो गई थी और 101 लोग घायल हुए थे। मृतकों में फरहीन उर्फ शगुफ्ता शेख लियाकत, शेख मुश्ताक यूसुफ, शेख रफीक मुस्तफा, इरफान जियाउल्लाह खान, सैयद अजहर सैयद निसार, और हारून शाह मोहम्मद शाह शामिल थे। इस मामले की शुरुआती जांच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने की, जिसने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्विवेदी, और समीर कुलकर्णी को आरोपी बनाया। ATS ने दावा किया था कि विस्फोट में इस्तेमाल हुई LML फ्रीडम मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा के नाम पर रजिस्टर्ड थी और कर्नल पुरोहित ने कश्मीर से RDX उपलब्ध कराया था।

2011 में जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई। NIA ने 2016 में साध्वी प्रज्ञा और अन्य के खिलाफ अपर्याप्त सबूतों का हवाला देते हुए नई चार्जशीट दाखिल की और मकोका (MCOCA) हटा दिया। 17 साल की लंबी सुनवाई के बाद, 31 जुलाई 2025 को विशेष NIA कोर्ट ने जज ए.के. लाहोटी की अगुवाई में सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जांच एजेंसियां आरोप साबित करने में नाकाम रहीं। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

बाइक का मालिकाना: कोर्ट ने माना कि विस्फोट में इस्तेमाल बाइक का चेसिस नंबर रिकवर नहीं हुआ, और यह साबित नहीं हुआ कि बाइक साध्वी प्रज्ञा की थी।

RDX का सबूत: कर्नल पुरोहित के घर से RDX मिलने का कोई सबूत नहीं मिला।

UAPA और MCOCA: UAPA लागू करने के लिए जरूरी मंजूरी नहीं ली गई, और MCOCA के तहत बयान वैध नहीं माने गए।

गवाहों की विश्वसनीयता: 323 गवाहों में से 39 अपने बयान से पलट गए, और 26 की गवाही से पहले मृत्यु हो गई।

जांच में लापरवाही: घटनास्थल से फिंगरप्रिंट, डंप डेटा, या अन्य ठोस सबूत नहीं जुटाए गए। पंचनामा में भी खामियां थीं।

कोर्ट ने यह भी कहा, "आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता," और शक के आधार पर किसी को सजा नहीं दी जा सकती। पीड़ित परिवारों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया।

दिग्विजय सिंह का बयान और विवाद

कोर्ट के फैसले के बाद दिग्विजय सिंह ने कहा, "मैंने कभी नहीं कहा कि मुंबई आतंकी हमले में RSS का हाथ था। मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं।" यह बयान उनके पिछले रुख से अलग था, क्योंकि 2008 में तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम के बाद दिग्विजय सिंह ने "भगवा आतंकवाद" शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसे मालेगांव केस से जोड़ा गया। उनके इस बयान को BJP ने कांग्रेस की साजिश और हिंदुओं को बदनाम करने की कोशिश करार दिया।

डॉ. दुर्गेश केसवानी का तीखा हमला

BJP प्रवक्ता डॉ दुर्गेश केसवानी ने दिग्विजय सिंह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। X पर उनकी टिप्पणियों और बयानों के आधार पर, उन्होंने निम्नलिखित बातें कहीं: सत्य की जीत, "सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। मालेगांव ब्लास्ट केस में कोर्ट का फैसला दिग्विजय सिंह और कांग्रेस के मुंह पर तमाचा है। यह साबित करता है कि सनातनी और हिंदू कभी आतंकी नहीं हो सकते।"

वसुदेव कुटुंबकम: "सनातनी वसुदेव कुटुंबकम की बात करते हैं, जो विश्व बंधुत्व का संदेश देता है। दिग्विजय सिंह ने विशेष वर्ग की राजनीति के लिए 'हिंदू आतंकवाद' जैसे शब्द गढ़कर पाप किया है।"

दिग्विजय को सजा: "इस पाप की सजा दिग्विजय सिंह को जरूर मिलेगी। जनता उन्हें पसंद नहीं करती, इसलिए उन्हें घर बिठा दिया गया है।"

आतंकवादियों का समर्थन: "दिग्विजय सिंह हमेशा दिशा के विपरीत जाकर आतंकवादियों को 'जी' और जाकिर नायक जैसे लोगों को शांति का दूत बताते हैं। यह उनकी मानसिकता को दर्शाता है।"

डॉ. केसवानी ने दिग्विजय सिंह पर कांग्रेस के साथ मिलकर "हिंदू आतंकवाद" का नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया, जिसे उन्होंने "सनातन को बदनाम करने की साजिश" बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला न केवल साध्वी प्रज्ञा और अन्य आरोपियों की जीत है, बल्कि हिंदुत्व और सनातन धर्म की जीत है।

साध्वी प्रज्ञा की प्रतिक्रिया

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कोर्ट में भावुक होकर कहा, "मुझे 17 साल तक अपमानित किया गया। 13 दिन तक टॉर्चर किया गया। मुझे आतंकवादी बनाया गया, जबकि मैं सन्यासी जीवन जी रही थी। यह भगवा और हिंदुत्व की जीत है। जिन्होंने हिंदू आतंकवाद का शब्द गढ़ा, उन्हें दंड मिलेगा।" साध्वी ने ATS और तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे पर हिरासत में प्रताड़ना के आरोप लगाए, जो 26/11 मुंबई हमले में शहीद हो गए थे।

अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं

BJP विधायक रामेश्वर शर्मा: "यह फैसला कांग्रेस और दिग्विजय सिंह की साजिश का पर्दाफाश करता है। हिंदू कभी आतंकवादी नहीं था।"

उमा भारती: "साध्वी प्रज्ञा निर्दोष साबित हुईं। उन्हें बधाई और कोर्ट का अभिनंदन।"

बृजलाल (BJP सांसद): "कांग्रेस ने भगवा आतंकवाद का नैरेटिव बनाया। यह साजिश थी। कोर्ट को साधुवाद।"

असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM): "यह निराशाजनक फैसला है। छह लोगों को किसने मारा? पीड़ितों को न्याय कब मिलेगा?"

कमलनाथ (कांग्रेस): पीड़ितों के लिए ऊपरी अदालत में अपील की बात कही।

विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञ डॉ. अनिल वर्मा ने कहा, "NIA की जांच में खामियां थीं। गवाहों के बयान बदलने और सबूतों की कमी ने फैसले को प्रभावित किया। लेकिन पीड़ितों के लिए न्याय का सवाल अब भी अनुत्तरित है।" सामाजिक कार्यकर्ता रमेश आदिवासी ने कहा, "यह मामला सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील रहा। फैसले को सांप्रदायिक रंग देने से बचना चाहिए।"

यह फैसला कई सवाल छोड़ गया है:

पीड़ितों को न्याय: छह लोगों की मौत और 101 घायलों के लिए जिम्मेदार कौन है? पीड़ित परिवार ऊपरी अदालत में अपील की तैयारी कर रहे हैं।

सांप्रदायिक तनाव: "हिंदू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" जैसे शब्दों ने सामाजिक तनाव को बढ़ाया है।

जांच की विश्वसनीयता: ATS और NIA की जांच में लापरवाही और गवाहों के बयान बदलने ने सवाल उठाए हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+