Noida के बाद MP में 3 जिंदगियां निगल गई पानी में गिरी कार, कैस हुआ इतना बड़ा हादसा, कौन जिम्मेदार?
Madhya Pradesh News: देश के दिल मध्य प्रदेश से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक, सड़कों पर मौत का तांडव जारी है। मध्य प्रदेश के इटारसी में शुक्रवार रात एक रूह कंपा देने वाला हादसा हुआ। पुराने भोपाल-बैतुल नेशनल हाईवे पर पत्थरोटा नहर पुल के पास एक कार अनियंत्रित होकर गहरी नहर में जा गिरी।
हादसा इतना भयानक था कि कार पूरी तरह डूब गई और उसमें सवार तीन लोगों को निकलने का मौका तक नहीं मिला। SDRF की टीम ने करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ट्रैक्टर की मदद से कार को बाहर निकाला, लेकिन तब तक सब खत्म हो चुका था। आइए विस्तार से जानते हैं क्या पूरा मामला..

टाउन इंस्पेक्टर संजीव सिंह ने बताया कि, 'हमें रात करीब 12 बजे सूचना मिली कि एक कार पथरोटा नहर में गिर गई है। SDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं और तीन शव बरामद किए गए हैं। इस बीच, SDRF प्लाटून कमांडर अमृता दीक्षित ने बताया कि बचाव अभियान में लगभग 1-1.5 घंटे लगे, क्योंकि कार नहर में काफी गहराई तक डूब गई थी।
कैस हुआ इतना बड़ा हादसा?
उन्होंने बताया कि गाड़ी में मिले एक पहचान पत्र पर लकी पटेल नाम लिखा है। इस तरह से मृतकों में से एक की पहचान लकी के रूप में हुई है। इसके अलावा, उन्होंने घटना के संभावित कारणों में स्टीयरिंग फेल होना या नशे में ड्राइविंग करना बताया।
उन्होंने बताया कि, 'हमें पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि पथरोटा में एक कार नहर में गिर गई है। मौके पर पहुंचने पर हमने देखा कि कार पूरी तरह डूब गई थी, फिर भी उसकी लाइटें दिख रही थीं। हमने ट्रैक्टर की मदद से कार को बाहर निकाला और उसमें से तीन शव बरामद किए। बचाव अभियान में लगभग 1-1.5 घंटे लगे। घटना की जांच जारी होने के कारण और जानकारी का इंतजार है।
इटारसी का हादसा अगर कुदरत या तकनीकी खराबी था, तो दिल्ली और नोएडा के मामले 'साफ कत्ल' की ओर इशारा करते हैं। कुछ ही दिनों के अंतराल पर दो युवकों-कमल और युवराज-की जान एक जैसे हादसों में गई।
दिल्ली के जनकपुरी का कांड
6 फरवरी को एचडीएफसी बैंक में काम करने वाले कमल का शव एक खुले गड्ढे से निकाला गया। दिल्ली जल बोर्ड ने गड्ढा खोदा, लेकिन बैरिकेड लगाना भूल गए। कमल रात में बाइक से लौट रहा था और अंधेरे में उसे वह काल नजर नहीं आया। परिवार रात भर पुलिस की मिन्नतें करता रहा, लेकिन मदद की जगह पुलिस ने कह दिया- 'लोकेशन 200 मीटर के पास है, खुद ढूंढ सको तो खोज लो'। सुबह जब लाश मिली, तब जाकर प्रशासन ने वहां पर्दा लगाया।
नोएडा सेक्टर 150 की लापरवाही
ठीक इसी तरह नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार प्राइवेट बिल्डर द्वारा खोदे गए गहरे गड्ढे में गिर गई थी। वहां भी न कोई चेतावनी बोर्ड था और न ही सुरक्षा के इंतजाम। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकारी एजेंसियों (जैसे दिल्ली जल बोर्ड) और प्राइवेट बिल्डर्स को मौत का गड्ढा खुला छोड़ने की इजाजत किसने दी? हादसे के बाद सुरक्षा के इंतजाम (पर्दे और बैरिकेड) किए जाते हैं, क्या यह जानबूझकर की गई लापरवाही नहीं है? आखिर कब तक आम आदमी इन 'डेथ ट्रैप्स' का शिकार होता रहेगा?












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