मप्र चुनाव : विकास बनाम भ्रष्टाचार पर सिमटी लड़ाई

किसी दल के पक्ष या विरोध में हवा नहीं है। दोनों दलों में अपनी जीत की भावनाएं बनी हुई हैं। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी सहित पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह, लालकृष्ण आडवाणी और अन्य बड़े नेता लगातार सभाएं कर रहे हैं तो कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राहुल गांधी सभाएं कर रहे हैं। भाजपा विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सभाओं में बीते 10 वर्षो के विकास कार्यों का ब्यौरा दे रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा ने राज्य की तस्वीर बदल दी है।
नरेंद्र मोदी भी चौहान का बखान कर रहे हैं। उन्होंने सोमवार को राज्य सरकार के विकास कार्यों का ब्यौरा दिया। सरकार को जनकल्याणकारी सरकार करार दिया। साथ ही केंद्र सरकार का अपेक्षित सहयोग न मिलने के बावजूद राज्य में विकास के लिए चौहान को पूरा श्रेय दिया। भाजपा सिर्फ बयान ही नहीं दे रही, बल्कि संचार माध्यमों में विज्ञापन भी जारी कर रही है।
इसके ठीक उलट कांग्रेस, राज्य सरकार पर अपनी जेब भरने के आरोप लगा रही है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने तो केंद्र की योजनाओं का पैसा भाजपा से जुड़े लोगों की जेब में जाने का आरोप लगाया और कहा कि राज्य सरकार के कई मंत्रियों पर लोकायुक्त में मामले दर्ज हैं, मगर सरकार लोकायुक्त को कार्रवाई की अनुमति नहीं दे रही है। पार्टी की प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया कहते हैं कि आने वाले समय में राज्य में तो रेत भी राशन में मिलेगी।
इसके अलावा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भाजपा सरकार के काल का लेखाजोखा जारी कर राज्य में एक लाख छियालीय हजार करोड़ रुपये का घोटाले होने का आरोप लगाया है। इस आरोप पत्र में कथित तौर पर कई घोटालों का ब्यौरा दिया गया है। एक तरफ कांग्रेस नेता भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं तो दूसरी ओर पार्टी की ओर से जारी विज्ञापन पूरी तरह भ्रष्टाचार की कहानी सुनाते नजर आते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार लज्जा शंकर हरदेनिया का कहना है कि दोनों ही दल ऐसे वादे करते हैं जिनको पूरा करना आसान नहीं है। उन्हें आम आदमी की सुविधाओं की चिता नहीं है, वे सिर्फ वादे करते हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्थागत ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। पिछड़े, दलित अल्पसंख्यक वर्ग के लिए ऐसी कोई योजना नहीं बनाई जिसे वे गिना सकें। चुनाव प्रचार का रुख बता रहा है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों के एक-दूसरे पर हमले और तेज होंगे।












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