MP News: मालदार बाबू हिंगोरानी पर छापे के बाद उसके करीबी ज्वेलर्स-बिल्डर्स ने ठिकाने लगाई ब्लैकमनी
Bhopal News: मध्य प्रदेश तकनीकी शिक्षा संचालकालय के बाबू रमेश हिंगगोरानी के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई ने बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया है। शुक्रवार को हुए छापे में हिंगगोरानी के पास अब तक 100 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति का पता चला है। पुलिस ने उनके आवास सहित पांच अन्य स्थानों पर छापा मारकर इस धन की बरामदगी की।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हिंगगोरानी ने बैरागढ़ के कई बिल्डरों, ज्वेलर्स, मैरिज गार्डन संचालकों और होटल व्यवसायियों के पैसे को 'नंबर दो' के कामों में लगाया था। यह धन हवाला के माध्यम से इधर-उधर किया जाता था, जिसके बदले हिंगगोरानी अच्छी खासी रकम वसूलता था।

लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद बैरागढ़ के दर्जनभर लोगों ने अपनी 'ब्लैक मनी' को दूसरी जगह ठिकाने लगा दिया है। अब अगर पुलिस इन लोगों पर कार्रवाई करती है, तो उन्हें भी करोड़ों रुपए की आय का खुलासा होने की संभावना है।
सरकारी बाबू की अनकही कहानी
रमेश हिंगगोरानी की उम्र 57 साल है, और वह सालों से सरकारी नौकरी कर रहे थे, लेकिन उन्हें प्रदेश में कम ही लोग जानते थे। मंगलवार को लोकायुक्त के छापे के बाद उनका नाम अचानक सुर्खियों में आ गया। एक सामान्य सरकारी बाबू के पास 90 करोड़ की संपत्ति मिलना लोगों के लिए चौंकाने वाला था।
लोकायुक्त ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि हिंगगोरानी के घर पर की गई कार्रवाई में 70 लाख रुपए का एक किलो से अधिक सोना, 55 हजार रुपए की एक किलो से अधिक चांदी और 12 लाख 17 हजार रुपए कैश जब्त किए गए। कुल मिलाकर, एक करोड़ रुपए से कम का हिसाब-किताब सामने आया है, जबकि गाड़ियों और मकान का हिसाब अलग है।
इसके अलावा, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जिनका परीक्षण जारी है। इस पूरे मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है, जिससे कई और नाम सामने आ सकते हैं।

घर से मिले सोने पर हिंगोरानी ने कहा- सोने की कीमत बढ़ने पर मेरी क्या गलती?
लोकायुक्त की छापेमारी के बाद विवाद में आए मध्य प्रदेश तकनीकी शिक्षा विभाग के बाबू रमेश हिंगगोरानी ने अपने बचाव में कई बातें की हैं। उन्होंने वन इंडिया से बात-चीत में स्पष्ट किया कि उनके पास मिले सोने की कीमत में बढ़ोतरी पर उनकी कोई गलती नहीं है।
पाकिस्तान से विभाजन के बाद भोपाल आया था परिवार
हिंगगोरानी ने बातचीत में बताया कि उनके माता-पिता पाकिस्तान से विभाजन के बाद भोपाल आए थे, जहां उन्हें गांधी नगर में पुनर्वास विभाग द्वारा जमीन दी गई थी। वह अपने माता-पिता के इकलौते संतान हैं, और उनके पिता एक ड्राइवर थे, जिनकी सड़क दुर्घटना में मौत 1983 में हो गई थी, जब वह केवल 15 वर्ष के थे।
हिंगगोरानी ने कहा कि उन्होंने कठिनाइयों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी। साल 1987 में भोपाल गैस कांड के बाद उन्हें गैस कांड राहत विभाग में नौकरी मिली, जिसमें उन्हें 360 रुपए की पगार मिलती थी। इसके बाद, उन्होंने तकनीकी शिक्षा विभाग में लोअर डिवीजन क्लर्क के पद पर कार्य किया और फिर प्रमोशन पाकर सहायक ग्रेड एक के पद पर पहुंचे।
छापेमारी के दौरान हिंगगोरानी के घर से 70 लाख रुपए का सोना बरामद किया गया। उन्होंने इसका बचाव करते हुए कहा कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने बताया कि कुछ सोना उनकी मां पाकिस्तान से लाई थीं, कुछ उनकी पत्नी को मिला था, और कुछ उनकी बहुओं को शादी के दौरान दिया गया था।
उन्होंने कहा, "मेरी मां का पिछले साल देहांत हुआ था, और उन्होंने अपने नाती-पोतों को सोना देकर गईं। वही सोना लोकायुक्त की टीम को मिला है। पहले सोने की कीमत कम थी, अब बढ़ गई है, तो इसमें मेरी क्या गलती?"
इसके अलावा, हिंगगोरानी ने कहा कि उनके पास मिले 12 लाख रुपए भी सामान्य हैं, और यह राशि वह आसानी से रख सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनके तीनों बच्चे और बहुएं अच्छी कमाई कर रहे हैं।
इस पूरे मामले में हिंगगोरानी ने अपनी स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास किया, यह बताते हुए कि उनका कार्यकाल और आर्थिक स्थिति कहीं भी अनियमितता का संकेत नहीं देती।












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