Bhopal News: ट्रांसफर की धमकी देकर 80 हजार की रिश्वत मांगने वाला DPI का बाबू 25 हजार लेते रंगेहाथ पकड़ा गया
भोपाल, 13 सितंबर: भोपाल में लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 बाबू विश्वराज सिंह बैस को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ लिया।
आरोप है कि बाबू ने विक्रम सिंह नामक फरियादी को बैरसिया से किसी अन्य स्थान पर ट्रांसफर करवाने की धमकी देकर 80 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। विक्रम ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत लोकायुक्त पुलिस भोपाल से की थी, जिसके बाद लोकायुक्त ने एक जाल बिछाया और बाबू को रंगेहाथ पकड़ने का प्लान तैयार किया।

विक्रम सिंह, जो कि पचवारिया के निवासी हैं, ने बाबू विश्वराज सिंह द्वारा ट्रांसफर की धमकी मिलने के बाद लोकायुक्त को सूचित किया। लोकायुक्त ने शिकायत की सत्यता की जांच की और रिश्वतखोर बाबू को पकड़ने के लिए एक रणनीति बनाई। विक्रम ने बाबू को किस्तों में रिश्वत देने की पेशकश की, जिस पर बाबू ने सहमति जताई और पहली किस्त के रूप में 25 हजार रुपये ले लिए। बाबू ने पैसे लेने के लिए अपने कार्यालय में बुलाया, और जैसे ही विक्रम ने उसे रिश्वत की रकम दी, लोकायुक्त पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बाबू को गिरफ्तार कर लिया।
विक्रम ने यह भी बताया कि बाबू ने पैसे ना देने पर फोन के जरिए ट्रांसफर की धमकी दी और अभद्रता भी की। फिलहाल, लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले में धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
इससे पहले, 12 सितंबर को मऊगंज में रीवा लोकायुक्त पुलिस ने अपर कलेक्टर अशोक कुमार ओहरी को 5000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा था। यह कार्रवाई रामनिवास तिवारी की शिकायत पर की गई थी, जिन्होंने लोकायुक्त को बताया था कि जमीन बंटवारे की फाइल में राजस्व न्यायालय द्वारा उसके पक्ष में कार्रवाई करने के लिए 20 हजार रुपये रिश्वत मांगी गई थी। अंततः 15 हजार पर बात बनी, और 5 हजार की दूसरी किस्त देने पर लोकायुक्त ने अपर कलेक्टर को पकड़ लिया।
इन घटनाओं ने एक बार फिर से भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की आवश्यकता को उजागर किया है, और लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।












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