Indore MP News: लोकायुक्त ने स्कूल मान्यता के लिए 30,000 की रिश्वत लेते BRC नीरज गर्ग रंगे हाथ गिरफ्तार
26 अगस्त 2025 की शाम इंदौर के कालानी नगर चौराहे पर एक हाई-प्रोफाइल ड्रामा तब सामने आया, जब लोकायुक्त पुलिस की विशेष टीम ने शिक्षा विभाग के खंड स्रोत समन्वयक (BRC) नीरज गर्ग (45) को 30,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ धर दबोचा।
यह रिश्वत नगीन नगर, एरोड्रम रोड स्थित द सेंट पीटर्स कॉन्वेंट हायर सेकंडरी स्कूल की मान्यता नवीनीकरण के लिए मांगी गई थी। इस कार्रवाई में शामिल लोकायुक्त की ट्रैप टीम का नेतृत्व डीएसपी सुनील कुमार तालान और कार्यवाहक निरीक्षक आशुतोष मिठास ने किया।

लोकायुक्त पुलिस को शिकायत द सेंट पीटर्स स्कूल के संचालक रामविलास गुर्जर ने दी थी। रामविलास ने बताया कि नीरज गर्ग ने स्कूल की मान्यता नवीनीकरण के लिए पहले 80,000 रुपये की मांग की थी। इस राशि में से 50,000 रुपये पहले ही पड़ोस के ओएसिस स्कूल के कर्मचारी कमल सिंह वीरजी को 25 अगस्त 2025 को दे दिए गए थे। बाकी 30,000 रुपये 26 अगस्त को कालानी नगर चौराहे पर देने की योजना थी। लोकायुक्त ने इस सूचना के आधार पर ट्रैप तैयार किया और जैसे ही रामविलास ने नीरज को रिश्वत दी, आसपास छिपी लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।
शिकायत से कार्रवाई तक: लोकायुक्त का ऑपरेशन
रामविलास गुर्जर ने 24 अगस्त 2025 को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय को शिकायत दर्ज की कि नीरज गर्ग, जो इंदौर शहर-1 के BRC हैं, स्कूल की मान्यता नवीनीकरण के लिए 80,000 रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं। लोकायुक्त ने शिकायत की तस्दीक के लिए रामविलास की बात नीरज से कराई, जिसमें नीरज ने 50,000 रुपये कमल सिंह वीरजी को देने और बाकी 30,000 रुपये बाद में लेने की बात कही।
25 अगस्त को रामविलास ने 50,000 रुपये कमल सिंह को दे दिए, जिसके बाद लोकायुक्त ने 26 अगस्त को ट्रैप की योजना बनाई। डीएसपी सुनील तालान के नेतृत्व में ट्रैप टीम, जिसमें निरीक्षक आशुतोष मिठास, प्रधान आरक्षक प्रमोद यादव, आरक्षक आशीष नायडू, कमलेश परिहार, रामेश्वर निंगवाल, सतीश यादव, और चालक शेरसिंह ठाकुर शामिल थे, ने कालानी नगर चौराहे पर जाल बिछाया। शाम 6 बजे जैसे ही रामविलास ने नीरज को 30,000 रुपये दिए, लोकायुक्त ने उसे धर दबोचा।
कौन हैं नीरज गर्ग और क्या है मामला?
नीरज गर्ग (45) इंदौर शहर-1 में शिक्षा विभाग के खंड स्रोत समन्वयक (BRC) के पद पर तैनात हैं। उनकी जिम्मेदारी निजी और सरकारी स्कूलों की मान्यता और अन्य प्रशासनिक कार्यों की देखरेख करना है। रामविलास गुर्जर ने अपनी शिकायत में बताया कि नीरज ने स्कूल की मान्यता नवीनीकरण के लिए पहले 80,000 रुपये की मांग की थी। जब रामविलास ने राशि कम करने की गुहार लगाई, तो नीरज ने 50,000 रुपये तुरंत और 30,000 रुपये बाद में लेने की बात कही।
लोकायुक्त सूत्रों के अनुसार, कमल सिंह वीरजी, जो ओएसिस स्कूल का कर्मचारी है, नीरज का मध्यस्थ था। 50,000 रुपये की राशि कमल सिंह को दी गई थी, जिसकी जांच अब लोकायुक्त कर रही है। कमल सिंह की भूमिका और अन्य संभावित संलिप्तता की जांच के लिए लोकायुक्त ने अलग से पूछताछ शुरू की है।
लोकायुक्त की सख्ती: योगेश देशमुख के निर्देश
लोकायुक्त के महानिदेशक योगेश देशमुख ने हाल ही में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उनके निर्देशों का पालन करते हुए इंदौर लोकायुक्त इकाई ने यह ट्रैप ऑपरेशन चलाया। डीएसपी सुनील तालान ने बताया, "हमारी टीम ने पूरी सावधानी और गोपनीयता के साथ यह कार्रवाई की। यह भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है।"
लोकायुक्त ने पिछले कुछ महीनों में इंदौर में कई बड़ी कार्रवाइयां की हैं। जुलाई 2025 में एक नायब तहसीलदार को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया था, और मई 2025 में एक नगर निगम कर्मचारी को 15,000 रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करती है।
सियासी और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
इस कार्रवाई ने इंदौर में सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस ने इसे BJP सरकार की नाकामी का सबूत बताया। कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला ने कहा, "BJP सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है। शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में रिश्वतखोरी शर्मनाक है।"
स्थानीय निवासियों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया। स्कूल संचालक राजेश मेहता ने कहा, "शिक्षा विभाग में रिश्वतखोरी आम हो गई थी। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से स्कूल संचालकों को राहत मिलेगी।" X पर @IndoreCitizen ने लिखा, "लोकायुक्त ने सही समय पर सही कदम उठाया। शिक्षा में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं। #CleanEducation"
शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार: एक बड़ी चुनौती
मध्य प्रदेश में शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है। स्कूलों की मान्यता, शिक्षक भर्ती, और अन्य प्रशासनिक कार्यों में रिश्वतखोरी की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही हैं। 2023 में भोपाल में एक DEO को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में भ्रष्टाचार से बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ता है।
शिक्षाविद् डॉ अनीता शर्मा ने कहा, "शिक्षा विभाग में रिश्वतखोरी स्कूलों की गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य पर सीधा असर डालती है। लोकायुक्त की यह कार्रवाई स्वागतयोग्य है, लेकिन इसे और सख्त करना होगा।"
आगे की जांच और सवाल
लोकायुक्त अब नीरज गर्ग से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वह पहले भी ऐसी रिश्वतखोरी में शामिल था। कमल सिंह वीरजी की भूमिका और अन्य संभावित अधिकारियों की संलिप्तता की जांच भी तेज कर दी गई है। डीएसपी तालान ने कहा, "हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस मामले में सभी दोषियों को सजा मिले।"
इस घटना ने कई सवाल उठाए हैं:
- क्या शिक्षा विभाग में रिश्वतखोरी का यह नेटवर्क और बड़ा है?
- क्या नीरज गर्ग अकेले काम कर रहा था, या इसमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं?
- स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया को और पारदर्शी कैसे बनाया जा सकता है?












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