MP की लाड़ली बहना योजना: जानिए कैसे भाईदूज से खाते में आएंगे 1500 रुपये, हर महीने 318 करोड़ का अतिरिक्त खर्च
Ladli Behna Yojana: मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना, जो महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक बनी हुई है, अब एक नई ऊंचाई छूने जा रही है। मोहन यादव सरकार ने अगस्त में घोषणा की थी कि रक्षाबंधन के बाद दीपावली से योजना की मासिक सहायता 1250 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये कर दी जाएगी।
अब, भाईदूज (23 अक्टूबर 2025) से यह फैसला लागू होगा, जिसका सीधा असर राज्य के खजाने पर पड़ेगा - हर महीने 318 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च। कर्ज के बोझ तले दबी सरकार को अब इस योजना के लिए अलग से वित्तीय प्रबंधन करना होगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि पहली बढ़ी किस्त 15 अक्टूबर से पहले ही 1.27 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में पहुंच जाएगी, क्योंकि मुख्यमंत्री हमेशा महीने के मध्य तक ट्रांसफर सुनिश्चित करते हैं।

इस विस्तृत रिपोर्ट में हम योजना की वृद्धि, वित्तीय प्रभाव, किस्त की तारीख, लाभार्थियों की संख्या और हालिया प्रशासनिक फेरबदल के बीच इसके महत्व को समझाते हैं। क्या यह महिलाओं की आर्थिक आजादी का नया अध्याय है, या राज्य के कर्ज के जाल में एक और कदम?
योजना का नया अध्याय: 1250 से 1500 रुपये, भाईदूज से शुरू
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अगस्त 2025 में इंदौर के एक कार्यक्रम में ऐलान किया था कि लाड़ली बहना योजना की मासिक सहायता 1250 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये की जाएगी। यह वृद्धि दीपावली के बाद भाईदूज (23 अक्टूबर) से प्रभावी होगी। योजना की शुरुआत 5 मार्च 2023 को हुई थी, जब तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 21-60 वर्ष की महिलाओं को 1000 रुपये मासिक देने का वादा किया था। रक्षाबंधन 2024 पर इसे 1250 रुपये किया गया, और अब 250 रुपये की बढ़ोतरी से 1500 रुपये हो जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, "लाड़ली बहनें हमारी सरकार की प्राथमिकता हैं। यह वृद्धि महिलाओं को घरेलू खर्च, शिक्षा और छोटे व्यवसायों में मदद देगी। 2028 तक इसे 3000 रुपये तक ले जाएंगे।" योजना के तहत पात्र महिलाओं (ग्रामीण-शहरी, 21-60 वर्ष, आय सीमा से नीचे) को डीबीटी से सीधे खाते में राशि जाती है। नए पंजीकरण बजट 2025-26 के बाद शुरू होंगे।
वित्तीय बोझ: हर महीने 318 करोड़ का अतिरिक्त खर्च, कर्ज का सहारा
वृद्धि का सबसे बड़ा असर राज्य के खजाने पर पड़ेगा। वर्तमान में 1.27 करोड़ लाभार्थियों को 1250 रुपये देने पर मासिक खर्च करीब 1587 करोड़ रुपये है। 250 रुपये की बढ़ोतरी से यह 318 करोड़ रुपये प्रति माह बढ़ जाएगा। सालाना बोझ 3816 करोड़ रुपये का होगा। राज्य का कर्ज 2025 में 3.5 लाख करोड़ पार कर चुका है, इसलिए सरकार को बॉन्ड जारी कर या केंद्र से सहायता लेकर प्रबंधन करना होगा।
वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार, अगस्त 2025 में रक्षाबंधन पर 250 रुपये का शगुन भेंट अलग से दिया गया था, जो 1.26 करोड़ 89 हजार 823 बहनों को 1859 करोड़ रुपये का खर्चा पड़ा। अब नियमित 1500 रुपये से खर्च स्थायी हो जाएगा। अर्थशास्त्री डॉ. अजय शर्मा ने कहा, "यह लोकप्रिय योजना है, लेकिन कर्ज बढ़ने से विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। सरकार को राजस्व बढ़ाने के उपाय करने चाहिए।"
किस्त की तारीख: 15 अक्टूबर से पहले पहली 1500 रुपये, डीबीटी से ट्रांसफर
मुख्यमंत्री हमेशा महीने के 15 तारीख से पहले किस्त ट्रांसफर सुनिश्चित करते हैं। जुलाई 2025 की 26वीं किस्त 12 जुलाई को ही पहुंची थी। इसलिए, अक्टूबर की 29वीं किस्त (पहली 1500 रुपये) 15 अक्टूबर से पहले - संभवत: 10-12 अक्टूबर - खातों में आ जाएगी। भाईदूज (23 अक्टूबर) से पूर्ण रूप से लागू।
लाभार्थी cmladlibahna.mp.gov.in पर आधार या पंजीकरण नंबर से स्टेटस चेक कर सकती हैं। हेल्पलाइन 181 पर संपर्क। योजना ने अब तक 41,000 करोड़ रुपये वितरित किए, और 1.3 करोड़ महिलाएं पात्र।
योजना का प्रभाव: महिलाओं की जिंदगी में बदलाव की कहानियां
लाड़ली बहना ने ग्रामीण महिलाओं को नई उड़ान दी। इंदौर की रीता बाई ने कहा, "1250 से सिलाई मशीन खरीदी, अब कमाई हो रही। 1500 से सपने पूरे होंगे।" भोपाल की प्रिया शर्मा ने ऑनलाइन बिजनेस शुरू किया। आंकड़ों में:
- लाभार्थी: 1.27 करोड़ (कुल पात्र 1.3 करोड़)।
- कुल व्यय: 41,000 करोड़ (2023-25)।
- प्रभाव: महिलाओं की बचत 20% बढ़ी, घरेलू हिंसा में कमी।
विपक्ष ने सराहना की, लेकिन कहा, "कर्ज पर चल रही योजना। स्थायी समाधान चाहिए।"












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