लाड़ली बहनों को लेकर ये बोल गए मंत्री जी, शहीद के गांव में बयान से मचा बवाल—जानिए पूरी खबर | MP News |
Ladli Behna Yojana: सीहोर जिले की इछावर तहसील का ग्राम धामंदा यूं तो पूरे प्रदेश में अपने वीर सपूत, शहीद नायक जितेंद्र कुमार वर्मा की वजह से सम्मान के साथ जाना जाता है, लेकिन इन दिनों यह गांव एक राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गया है।
देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद के गांव में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के एक बयान ने ऐसा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है, जिसने ग्रामीणों से लेकर सोशल मीडिया तक आक्रोश की लहर दौड़ा दी है।

दरअसल, धामंदा में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मंत्री करण सिंह वर्मा ने मंच से लाड़ली बहनों को संबोधित करते हुए कथित तौर पर यह कहा कि यदि महिलाएं कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी तो उनके नाम लाड़ली बहना योजना की सूची से हटा दिए जाएंगे। मंत्री का यह बयान सामने आते ही माहौल गर्मा गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि महिलाओं पर दबाव बनाने और सरकारी योजना को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने का प्रयास है।
शहीद के गांव में बयान से गहरी चोट
धामंदा के लोगों के लिए यह बयान इसलिए भी ज्यादा पीड़ादायक है क्योंकि यही गांव शहीद नायक जितेंद्र कुमार वर्मा का पैतृक गांव है। जितेंद्र कुमार वर्मा केवल एक सैनिक नहीं थे, बल्कि भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 3 पैरा स्पेशल फोर्सेस के बहादुर कमांडो थे। वे देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत की व्यक्तिगत सुरक्षा टीम का हिस्सा भी रहे। 8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलीकॉप्टर हादसे में उन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
गांव के बुजुर्गों और युवाओं का कहना है कि जिस धरती ने देश को ऐसा वीर सपूत दिया, वहां महिलाओं को धमकाने जैसी भाषा का इस्तेमाल करना बेहद शर्मनाक है। ग्रामीणों का कहना है कि शहीद के गांव में कम से कम मर्यादा और सम्मान का ख्याल रखा जाना चाहिए था।
लाड़ली बहनों में नाराज़गी, सोशल मीडिया पर विरोध
मंत्री के इस बयान के बाद गांव की लाड़ली बहनों में खासा आक्रोश देखने को मिल रहा है। कई महिलाओं का कहना है कि लाड़ली बहना योजना उनका अधिकार है, कोई एहसान नहीं। योजना को कार्यक्रम में उपस्थिति से जोड़ना न सिर्फ गलत है, बल्कि महिलाओं के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाला भी है।
सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से तूल पकड़ रहा है। मंत्री के बयान के वीडियो और ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद लोग इसे सत्ता का दुरुपयोग बता रहे हैं। कई यूजर्स ने सवाल उठाए हैं कि क्या सरकारी योजनाएं अब राजनीतिक कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने का साधन बन गई हैं? वहीं कुछ लोगों ने इसे महिलाओं के सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ करार दिया है।
गांव की गरिमा बनाम सत्ता की भाषा
धामंदा के ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं हैं, लेकिन शहीद के गांव में इस तरह की भाषा स्वीकार्य नहीं है। लोगों का कहना है कि यदि सम्मान नहीं दिया जा सकता तो कम से कम अपमान से तो बचा ही जा सकता है।
फिलहाल इस पूरे मामले पर मंत्री करण सिंह वर्मा की ओर से कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह से मामला बढ़ता जा रहा है, उससे साफ है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और राजनीतिक रंग ले सकता है। शहीद के गांव से उठी यह आवाज अब सिर्फ धामंदा तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे प्रदेश में सम्मान, अधिकार और सत्ता की भाषा पर बहस छेड़ चुकी है।












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