चीतों की सुरक्षा के लिए अब STSF अस्थाई कैंप के जरिए उतरेगी मैदान में, खुफिया तंत्र विकसित करने के निर्देश
एमपी सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स के बाद अब कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की सुरक्षा के लिए स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स STSF को मैदान में उतार दिया है।
भोपाल, 29 सितंबर। पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर श्योपुर के कुनो नेशनल पार्क में छोड़े गए चीतों को लेकर राज्य सरकार लगातार चिंतित है। इसलिए सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स के बाद अब कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की सुरक्षा के लिए स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स एसटीएसएफ को मैदान में उतार दिया है। इसके कर्मचारी शिवपुरी में अस्थाई कैंप के जरिए शिकारियों पर नजर रखने का काम करेंगे। वही इसके लिए फ़ोर्स को स्थानीय स्तर पर भी कर्मचारी दिए जा रहे हैं, जो पार्क से सटे क्षेत्रों में खुफिया तंत्र विकसित करेंगे और चीतों की सुरक्षा को देखते हुए सरकार की गतिविधियों पर नजर रखेंगे।

राज्य सरकार चीतों की सुरक्षा को लेकर अलर्ट
नामीबिया आए भारत आए चीतों पर देश दुनिया की नजर है। इसके सफल होने पर भारत में और चीते एवं अन्य वन्य प्राणी लाने के रास्ते खुल जाएंगे, इसलिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार चीतों की सुरक्षा को लेकर कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती। इसलिए चीतों के खान पान से लेकर उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा हैं। इसलिए एसटीएसएफ को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है

कूनो में पहले हो चुकी है शिकार की घटनाएं
बता दें कि कुनों राष्ट्रीय उद्यान में शिकार की घटनाएं कई बार सामने आ चुकी है। इसी से पार्क प्रबंधन चिंतित रहता है। जुलाई के दूसरे पखवाड़े में चीते वाले बाड़े में एक तेंदुए के शिकार की घटना सामने आई थी। जहां पाइप से गेयर वायर बांधकर तेंदुए का शिकार किया गया था। इस मामले में पार्क के पास के ग्रामीण को गिरफ्तार किया गया था। इसलिए सरकार चीतों की सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है।

20 भूतपूर्व बंदूकधारी सैनिकों को चीतों की सुरक्षा में किया तैनात
बता दे की चीतों की सुरक्षा के लिए जिला सैनिक कल्याण बोर्ड ग्वालियर से 20 भूतपूर्व बंदूकधारी सैनिकों को चीतों की सुरक्षा में लगाया गया है। ड्रोन से नजर रखने के अलावा चीतों के क्वॉरेंटाइन बाडे में सीसीटीवी कैमरे लगाकर उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। साथ ही प्रशिक्षित डॉग की भी मदद ली जा रही है।

ऐसे काम करेगी एसटीएसएफ
एसटीएसएफ कर्मचारी पार्क और आसपास की निगरानी करेंगे। वे नजदीकी गांवों में जाकर खुफिया तंत्र विकसित करेंगे, ताकि किसी भी गड़बड़ी की सूरत में उन्हें पहले ही भनक लग जाए। वन अपराध में लिप्त रहे लोगों को चिन्हित करेंगे और उन पर नजर रखेंगे। ऐसे लोगों पर नजर रखने का जिम्मा स्थानीय कर्मचारियों को सौंपा जाएगा उल्लेखनीय है कि वन्य प्राणियों से संबंधित अपराधों की रोकथाम और जांच के लिए एसटीएसएफ का गठन किया गया है। फोर्स ने पिछले 12 सालों में चंबल घड़ियाल अभ्यारण से कछुओं की तस्करी सहित बाघ और तेंदुए के शिकार के कई मामलों का राजफाश किया है।
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