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MP Politics: इंदौर में 20 मौतों से उबाल, कांग्रेस ने बताया ‘सरकारी हत्या’, 1 करोड़ मुआवजे की मांग की

Indore MP News: मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में ज़हरीला पानी पीने से 20 लोगों की मौत और 1000 से अधिक नागरिकों के बीमार होने की घटना को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।

कांग्रेस नेताओं ने इस घटना को "सरकारी हत्या" करार देते हुए महापौर के इस्तीफे, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जवाबदेही और मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है। इसी के साथ मनरेगा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर भी कांग्रेस ने खुला मोर्चा खोल दिया है।

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राजीव गांधी सभागार में गरजी कांग्रेस

आज जिला कांग्रेस कमेटी भोपाल शहर एवं ग्रामीण द्वारा प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, भोपाल स्थित राजीव गांधी सभागार में संयुक्त पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। पत्रकार वार्ता में इंदौर की जल त्रासदी और मनरेगा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

"20 मौतें हादसा नहीं, सरकारी हत्या हैं" - प्रवीण सक्सेना

भोपाल शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना ने इंदौर की घटना को भाजपा सरकार की आपराधिक लापरवाही और प्रशासनिक विफलता बताया। उन्होंने कहा, "इंदौर के भागीरथपुरा में ज़हरीला पानी पीने से 20 लोगों की मौत और 1000 से अधिक लोगों का बीमार होना कोई हादसा नहीं, बल्कि सरकारी हत्या है। नगर निगम और सरकार की नाकामी की कीमत आम जनता ने अपनी जान देकर चुकाई है।"

प्रवीण सक्सेना ने ऐलान किया कि इस घटना के विरोध में 11 जनवरी 2026, रविवार, सुबह 11 बजे
बड़ा गणपति मंदिर से राजवाड़ा चौक (माँ अहिल्याबाई होल्कर प्रतिमा स्थल) तक प्रदेश स्तरीय पैदल मार्च निकाला जाएगा।

इस जनआक्रोश मार्च में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आम नागरिक शामिल होंगे।

कांग्रेस की चार बड़ी मांगें

  1. इंदौर के नाकारा महापौर को तत्काल हटाया जाए
  2. मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से असंवेदनशील बयानबाज़ी पर इस्तीफा लिया जाए
  3. मृतकों के परिजनों को 2 लाख नहीं, 1 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए
  4. पूरे मामले की न्यायिक जांच कर दोषियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए

कांग्रेस ने साफ किया कि जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रहेगा।

"मनरेगा को खत्म करना गांधी के विचारों की हत्या" - पी.सी. शर्मा

पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने मनरेगा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने कहा, "शिवराज सिंह चौहान के शासन में मध्य प्रदेश पहले से ही 4 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में डूबा है। अब मनरेगा में 60:40 का खर्च अनुपात लागू कर राज्य पर हर साल 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।"

पीसी शर्मा ने बताया कि प्रदेश में 90.5 प्रतिशत सक्रिय मनरेगा मजदूरों की e-KYC लंबित है, जो देश में सबसे ज्यादा है। यह साफ़ संकेत है कि सरकार जानबूझकर गरीबों और मजदूरों को उनके अधिकारों से वंचित कर रही है। उन्होंने मांग की कि मोदी सरकार मनरेगा कानून में किए जा रहे बदलाव तुरंत वापस ले। कांग्रेस ने "मनरेगा बचाओ संग्राम" को पंचायत से लेकर सड़क तक तेज करने का ऐलान किया।

"शिवराज सिंह चौहान हैं साजिश के मुख्य शिल्पकार" - राहुल राज

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राहुल राज ने केंद्र सरकार के नए VB-G RAM G अधिनियम को गरीबों के काम के अधिकार पर सीधा हमला बताया।

उन्होंने कहा, "मोदी सरकार मनरेगा को खत्म करने की साजिश कर रही है और इसके मुख्य शिल्पकार केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं। यह कानून महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने का अपमान है।"

राहुल राज ने चेताया कि- राज्य पर पहले से मौजूद 4.50 लाख करोड़ के कर्ज के ऊपर हर साल 5,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। फसल सीजन में 60 दिन काम बंद रखने का प्रावधान मजदूरों को पलायन और सस्ते श्रम की ओर धकेलेगा। किसान का हित दिखाकर मजदूर का हक छीनना समाज को आपस में लड़ाने की राजनीति है

उन्होंने सवाल उठाया कि- "जैसे फसल बीमा में किसानों का भुगतान दो-दो साल में होता है, क्या अब मनरेगा मजदूरों की मजदूरी भी दो-दो साल में मिलेगी?"

राहुल राज ने तीखा तंज कसते हुए कहा- "शिवराज सिंह चौहान की राजनीति 'मुंह में राम और बगल में छुरी' जैसी है, जिसमें मजदूर और किसान दोनों का हक काटा जा रहा है।"

राजनीतिक तापमान और बढ़ेगा

इंदौर की जल त्रासदी और मनरेगा को लेकर कांग्रेस के तेवर साफ़ संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की राजनीति और गरमाने वाली है। कल होने वाला पैदल मार्च न सिर्फ इंदौर, बल्कि पूरे प्रदेश में सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक इम्तिहान साबित हो सकता है।

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