Bhopal News: शावर खान ने पत्नी और ससुराल वालों पर लगाएं झूठे केस लगाने के आरोप; ऐशबाग थाने पर मिलीभगत का दावा
Bhopal News: राजधानी भोपाल के ऐशबाग थाना क्षेत्र में एक शासकीय कर्मचारी शावर खान की जिंदगी वैवाहिक कलह के कारण नर्क बनी हुई है। वन इंडिया हिंदी को दिए विशेष साक्षात्कार में शावर ने खुलासा किया कि उनकी पत्नी तलत और ससुराल वाले आए दिन पैसों की मांग करते हैं।
पैसे न देने पर थाना ऐशबाग में झूठे मामले दर्ज करवाते हैं, जिससे उनकी मानसिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि अवसाद और तनाव ने उन्हें घेर लिया है।

शावर ने हेड कांस्टेबल प्रेम नारायण विश्वकर्मा पर ससुराल वालों के साथ मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाते हुए जोन वन के पुलिस उपायुक्त आशुतोष गुप्ता को शिकायत सौंपी है। RTI आवेदन के बाद थाने से बदतमीजी का आरोप लगाते हुए शावर ने सवाल उठाया है कि क्या थाना ऐशबाग सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) से मांगी गई जानकारी से चिढ़ गया है? यह मामला न केवल एक पारिवारिक विवाद है, बल्कि पुलिस की कथित मनमानी, RTI के दुरुपयोग और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
भोपाल जैसे शहर में, जहां वैवाहिक विवादों के मामले रोजाना दर्ज होते हैं, यह घटना पुलिस की भूमिका और पारदर्शिता की कमी को उजागर कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे केसों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता की कमी से पीड़ितों की स्थिति और बिगड़ जाती है। शावर खान का मामला इसी की मिसाल है, जहां एक सरकारी कर्मचारी न्याय की आस में दर-दर भटक रहा है।
शावर खान का दर्द: पत्नी और ससुराल वालों से लगातार मानसिक प्रताड़ना
शावर खान, जो मध्य प्रदेश शासन के एक विभाग में लोकसेवक के रूप में कार्यरत हैं, ने अपनी आपबीती सुनाते हुए आंखें नम कर लीं। "विवाह के बाद से ही तलत अपने भाइयों के साथ मिलकर आर्थिक शोषण कर रही है। पैसे की मांग कभी खत्म ही नहीं होती। जब मैं पैसे देने में असमर्थ होता हूं, तो झूठे केस दर्ज करा दिए जाते हैं। थाने में धारा 174 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 के तहत NCR कायम कर दी जाती है, जो पूरी तरह झूठी है," शावर ने वन इंडिया हिंदी को बताया। NCR नंबर 518/25 के तहत दर्ज शिकायत में तलत ने शावर पर घरेलू हिंसा और गायब होने का आरोप लगाया है, लेकिन शावर का दावा है कि यह सब ससुराल की साजिश है।
शावर ने ससुर गफूर बख्श (उम्र 69 वर्ष) के निजी जीवन का चौंकाने वाला खुलासा किया। "मेरे ससुर की दो पत्नियां हैं - पहली आफताब (ऐशबाग में रहती हैं) और दूसरी सबरा (कबाड़ खाने में रहती हैं)। गफूर तीन दिन पहली पत्नी के साथ और तीन दिन दूसरी के साथ रहते हैं। सवाल यह है कि रविवार को वे किसके साथ घूमते हैं? यह पारिवारिक कलह को उजागर करता है, जो मेरे खिलाफ झूठे केस का कारण बन रहा है," शावर ने कहा। यह जानकारी स्थानीय लोगों से मिली है, जो विवाद को और जटिल बना रही है। शावर का कहना है कि इस पारिवारिक अस्थिरता के बावजूद ससुराल वाले उन्हें ब्लैकमेल कर रहे हैं, जिससे उनकी मानसिक स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ रही है। "मैं सरकारी नौकरी करता हूं, लेकिन यह तनाव मेरी जिंदगी तबाह कर रहा है। डॉक्टर ने अवसाद की दवाइयां दी हैं, लेकिन न्याय न मिलने से कुछ फर्क नहीं पड़ रहा," उन्होंने जोड़ा।
मध्य प्रदेश में वैवाहिक विवादों के आंकड़े चिंताजनक हैं। राज्य महिला आयोग के अनुसार, 2025 में भोपाल में ही 1,200 से अधिक घरेलू हिंसा के केस दर्ज हुए हैं, जिनमें से 40% आर्थिक शोषण से जुड़े हैं। लेकिन पुरुष पीड़ितों के मामले अक्सर अनदेखे रह जाते हैं, जिससे उनकी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं।
ऐशबाग थाने पर गंभीर आरोप: हेड कांस्टेबल की कथित मिलीभगत
शावर ने थाना ऐशबाग के हेड कांस्टेबल प्रेम नारायण विश्वकर्मा पर सीधा आरोप लगाया है कि वे ससुराल वालों के साथ मिले हुए हैं। "हर बार विश्वकर्मा ही NCR कायम करते हैं। बिना किसी जांच के, बस ससुराल वालों के कहने पर," शावर ने कहा। इस मिलीभगत के खिलाफ उन्होंने 29 सितंबर 2025 को जोन वन के पुलिस उपायुक्त आशुतोष गुप्ता को शिकायत दर्ज की, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 217 (सार्वजनिक सेवक द्वारा गलत कार्रवाई) और धारा 248 (झूठी शिकायत) के तहत आवेदन दिया गया।
कार्रवाई न होने पर शावर ने हनुमानगंज थाने के हेड कांस्टेबल विवेक शर्मा का नाम लिया, जिन्होंने जोन 3 के आदेश के बावजूद शावर के साथ बदतमीजी की। इसकी शिकायत भी डीसीपी आशुतोष गुप्ता को की गई। 24 अक्टूबर 2025 को थाना प्रभारी ऐशबाग को विशेष आवेदन देकर सूचित किया गया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। ऐशबाग थाने पर पहले भी विवादास्पद मामले सामने आ चुके हैं, जैसे 2023 में साइबर ठगी में साठगांठ के आरोप, जहां थाना प्रभारी सस्पेंड हुए थे।
RTI का सहारा: थाने की 'चिढ़' और प्रतिबंधात्मक नोटिस
सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब शावर ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 (RTI) का इस्तेमाल किया। 31 अक्टूबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय के एसपी गुप्ता मामले (RTI में पारदर्शिता पर आधारित) का हवाला देते हुए 24 अक्टूबर के आवेदन पर कार्रवाई और संलग्न दस्तावेजों की प्रमाणिक जानकारी मांगी गई। लेकिन जवाब में थाने ने उल्टा शावर को धारा 130 BNSS (संदिग्ध गतिविधि पर नोटिस) के तहत कारण बताओ नोटिस और धारा 126, 135(3) BNSS के तहत प्रतिबंधात्मक कार्यवाही का नोटिस भेज दिया।
शावर ने सवाल उठाया, "क्या थाना ऐशबाग RTI से मांगी गई जानकारी से चिढ़ गया है? यह RTI के भय का स्पष्ट उदाहरण है। पुलिस को पारदर्शिता से डर क्यों लग रहा है?" RTI कार्यकर्ताओं का कहना है कि भोपाल में RTI से जुड़े मामलों में पुलिस की ऐसी प्रतिक्रिया आम है। 2011 में RTI एक्टिविस्ट शेहला मसूद की हत्या के बाद भी पुलिस पर सवाल उठे थे, जहां RTI क्वेरी को खतरे का कारण बताया गया। मध्य प्रदेश में 2025 तक 50 से अधिक RTI से जुड़े हमलों की रिपोर्ट्स हैं, जो पारदर्शिता की कमी दर्शाती हैं।
तारीख,घटना/कार्रवाई,धाराएं/नोटिस
- 29 सितंबर 2025,डीसीपी जोन वन को मिलीभगत की शिकायत,"धारा 217, 248 BNS"
- 24 अक्टूबर 2025,थाना प्रभारी को विशेष आवेदन,सूचना और कार्रवाई की मांग
- 31 अक्टूबर 2025,RTI आवेदन (कार्रवाई की जानकारी मांगी),"RTI 2005, एसपी गुप्ता केस"
- नवंबर 2025 (हाल),थाने से कारण बताओ और प्रतिबंध नोटिस,"धारा 130, 126, 135(3) BNSS"
अधिवक्ता अभिषेक घाडगे का साथ: "न्याय तक लड़ेंगे"
शावर के मेंटर, युवा अधिवक्ता अभिषेक घाडगे और उनके एसोसिएट्स ने मजबूती से साथ दिया है। घाडगे ने कहा, "यह मामला न केवल वैवाहिक विवाद है, बल्कि पुलिस की मनमानी का भी। हम डीसीपी से लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय तक लड़ेंगे। RTI पारदर्शिता का हथियार है, इसे दबाया नहीं जा सकता।" घाडगे ने हनुमानगंज थाने की बदतमीजी की शिकायत भी दर्ज की है। अभिषेक का कार्यालय भोपाल में सामाजिक न्याय के कई केस लड़ चुका है, और वे शावर को मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग भी दिला रहे हैं।
पुलिस का पक्ष: "जांच जारी, नोटिस वैध"
ऐशबाग थाना प्रभारी ने कहा, "शिकायत मिली है, जांच चल रही है। NCR और नोटिस BNSS के तहत वैध हैं।" डीसीपी आशुतोष गुप्ता ने 7 दिनों में कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, शावर का कहना है कि यह सिर्फ आश्वासन है, वास्तविक राहत नहीं।
शावर खान: "मेरा जीवन तबाह हो रहा है। न्याय मिलना चाहिए, वरना मैं टूट जाऊंगा।"
- अभिषेक घाडगे: "पुलिस जवाबदेह बने। RTI का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं।"
- महिला संगठन (तलत की ओर से): "यह घरेलू हिंसा का केस है। शावर के आरोप झूठे हैं।"
- RTI कार्यकर्ता संघ: "ऐशबाग थाने पर पहले भी सवाल। मध्य प्रदेश में RTI से 300+ हमले।"
- कर्मचारी संघ: "शासकीय कर्मचारियों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता मिलनी चाहिए।"
भोपाल में वैवाहिक विवादों में झूठे केस और पुलिस की भूमिका पर बहस तेज हो गई है। हाल ही में जहांगीराबाद थाने में झूठे रेप केस से जुड़ा धर्मांतरण का मामला सामने आया, वहीं यह केस पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है। राज्य मानव अधिकार आयोग ने ऐसे मामलों में हेल्पलाइन की सिफारिश की है।
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