गुना हवाला कांड: जानिए कैसे हुआ 1 करोड़ कैश पर ‘सेटलमेंट’ का खेल? 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड, जांच तेज
Guna Hawala Scandal: मध्य प्रदेश के गुना जिले में सामने आए कथित हवाला और घूसखोरी कांड ने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला उस समय तूल पकड़ गया जब गुजरात के एक कारोबारी की गाड़ी से करीब 1 करोड़ रुपये कैश बरामद होने के बाद भी पुलिस ने कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं की।
आरोप है कि थाना स्तर पर ही 'सेटलमेंट' कर कारोबारी को छोड़ दिया गया, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।

क्या है पूरा घटनाक्रम?
घटना 19 मार्च 2026 की रात की बताई जा रही है, जब रूठियाई चौकी क्षेत्र में चेकिंग के दौरान पुलिस ने गुजरात नंबर की स्कॉर्पियो को रोका। तलाशी में करीब 1 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए। लेकिन सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने मौके पर ही बातचीत कर 20 लाख रुपये लेकर मामला रफा-दफा कर दिया और शेष रकम वापस कर दी। हैरानी की बात यह रही कि न तो इस मामले में FIR दर्ज की गई और न ही आयकर विभाग को इसकी सूचना दी गई।
एक फोन कॉल से पलटा पूरा मामला
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। बताया जा रहा है कि कारोबारी ने गुजरात के एक वरिष्ठ IPS अधिकारी से संपर्क किया। इसके बाद पुलिस अचानक बैकफुट पर आ गई और पहले लिए गए 20 लाख रुपये भी वापस कर दिए। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है।
आधी रात कार्रवाई, 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल एक्शन लिया। डीआईजी अमित सांघी आधी रात को गुना पहुंचे और जांच शुरू कराई। आईजी अरविंद सक्सेना के निर्देश पर धरनावदा थाना प्रभारी प्रभात कटारे समेत चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया। प्रारंभिक जांच में इनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है और पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।
पुराने मामलों से मिलती-जुलती कहानी
यह मामला पहले सामने आए सिवनी जिले के हवाला कांड से मिलता-जुलता नजर आता है, जहां करोड़ों रुपये की बरामदगी में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति से यह सवाल उठता है कि क्या सिस्टम में सुधार की जरूरत है या फिर भ्रष्टाचार की जड़ें और गहरी हो चुकी हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत करार दिया है, जबकि सत्तापक्ष ने जांच पूरी होने के बाद सख्त कार्रवाई की बात कही है। सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है।
बड़ा सवाल: क्या सिस्टम में पारदर्शिता आएगी?
गुना का यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के कामकाज पर सवाल खड़ा करता है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। फिलहाल जांच जारी है और सभी की नजर इस पर टिकी है कि आखिर इस मामले में सच्चाई क्या है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।












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