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बब्बा के ढाबे पर फौजियों के लिए फ्री भोजन,बाप-बेटे ने पेश की देशसेवा की अनूठी मिसाल

रायसेन के बाड़ी में बाबा जी के ढाबा पर फौजियों को फ्री में भोजन कराया जाता है। ढाबा संचालक ने कहा कि फौजियों की सेवा करना मतलब देश की सेवा करना।

भोपाल 4 मई। बाड़ी नगर कस्बे में एनएच 12 भोपाल- जबलपुर रोड पर स्थित बब्बा जी के ढाबे पर फौजियों की गाड़ियों के ब्रेक अपने आप लग जाते हैं और लगे भी क्यों न क्योंकि ढाबा संचालक में देश सेवा और फोजियों की सेवा का संकल्प लिया है। आर्मी व्हीकल्स का स्टे सेंटर यह ढाबा बना हुआ है। इस ढाबे पर अक्सर सेना की गाड़ियां खड़ी नजर आते है साथ ही यहां फौजियों को ढाबा संचालक द्वारा भोजन भी निशुक्ल कराया जाता है। इस ढाबे को खोलने की कहानी दिलचस्प है। तो चलिए आपको बताते है ढाबे के इसके पीछे की कहानी...

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    बब्बा के ढाबे पर फौजियों के लिए फ्री भोजन,बाप-बेटे ने पेश की देशसेवा की अनूठी मिसाल
    फौजियों के लिए फ्री भोजन क्यों ?

    फौजियों के लिए फ्री भोजन क्यों ?

    ढाबा खोलने बाले अरबिंद चौहान सेना में जाकर देश सेवा करना चाहते थे, लेकिन यह सपना किसी कारण पूरा नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने अपने पिता के नाम से ढाबा शुरू किया और इसे फौजियों के लिए रिजर्व कर दिया।

    बाड़ी नगर मे रहने बाले अरविंद चौहान की बचपन से इच्छा थी की सेना में जा कर देश की सेवा करें और रक्षा करें, बहुत प्रयास किए लेकिन सेना में नहीं जा पाए। लेकिन देश भक्ती की कसक मन में बनी रही. चार महीने पहले शुरु हुए इस ढाबे पर आए दिन फौजी भोजन करने पंहुचते हैं। पिता-पुत्र की देश भक्ती को देखकर फौजी भी उन्हें सलाम करके जाते है।

    पिता रिटायर हुए तो बनाया प्लान

    पिता रिटायर हुए तो बनाया प्लान

    साल 2016 मे अंरबिद के पिता पीएस चौहान जो की बाड़ी नगर परिषद में सहायक राजस्व अधिकारी थे। सेवा निवृत्त हुए तो घर पर रहने के कारण बीपी जैसी समस्या होने लगी। ऐसे में उन्होंने अपनी हाईवे की जमीन पर ढाबा खोलने का प्लान बनाया। अंरबिद ने भी पिता की बात पर हामी भरते हुए कहा पिता जी हम फौज में नहीं जा पाए तो हम ढाबे पर फौजियों को फ्री भोजन कराएंगे। अंरबिद बाड़ी नगर परिषद में कंप्यूटर आपरेटर हैं।

    जबलपुर से आते हे सेना के जवान

    जबलपुर से आते हे सेना के जवान

    अंरबिद चौहान का कहना है हम माता- पिता और फौजियों का कर्ज नहीं चुका सकते। माता पिता हमें जन्म देते हैं और फौजी भाई हमारी सुरक्षा करते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मैंने पिता के नाम ढाबा शुरू किया। जबलपुर से बहुत जवान आर्मी के और गाडियां आती है एक दिन में पांच से आठ गाड़ियां आती है।

    सेना के जवान कहते है गुप्तदांन ले लो

    सेना के जवान कहते है गुप्तदांन ले लो

    बीते दिनों केन्द्रीय गृहमंत्री का भौपाल दौरा था। इस दौरान बब्बा के ढाबे पर आर्मी की आठ गाडियां से सेना के जवान भी आए। सभी ने भोजन भी किया बिल चुकाने जब अधिकारी आए तो, ढाबा संचालक पीएस चौहान ने ढाबे के बहार बोर्ड की तरफ ईशारा किया, और कहां कि यहां पर फौजियों का भोजन फ्री है, तो अधिकारी भी दंग रह गए। अधिकारियों ने कहा आप यहां पर एक दान पेटी रख दे, तो हम गुप्त दान कर देंगे। लेकिन ढाबा संचालक ने निवेदन किया। वह ऐसा देश सेवा के लिए करते हैं, इसलिए दान पेटी नहीं रख सकते।

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