MP News: किसान की जेब खाली, दीवाली बेरौनक, पूर्व मंत्री मुकेश नायक का बड़ा खुलासा, जानिए क्या कहा

दीवाली का पर्व, जो रोशनी, समृद्धि और खुशियों का प्रतीक है, इस बार मध्य प्रदेश के लाखों किसानों के लिए निराशा और अंधेरे का पर्याय बन गया। कांग्रेस मीडिया प्रभारी मुकेश नायक ने बुधवार को प्रेस ब्रीफिंग में राज्य सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इस दीवाली में सिर्फ 20% लोगों ने त्योहार मनाया, जबकि 80% परिवारों ने "हाथ मलते हुए" इसका दर्शन किया।

"किसान की जेब खाली तो दीवाली कैसे मनाई जाएगी?"-यह सवाल नायक ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान पर साधा, और खाद-बीज की कालाबाजारी, फसल खराबी तथा भावांतर योजना के 'झूठे दावों' को उजागर किया।

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नायक ने वादा किया कि कांग्रेस किसानों के साथ खड़ी रहेगी, और सरकार से तत्काल राहत की मांग की। यह बयान न केवल किसान आंदोलनों को हवा दे रहा है, बल्कि 2028 चुनावों से पहले कांग्रेस की 'किसान विरोधी' BJP पर रणनीति को मजबूत कर रहा है। आइए, इस प्रेस ब्रीफिंग की पूरी तस्वीर देखें-नायक के आरोपों, आंकड़ों और सरकार की चुप्पी तक।

'निराशाजनक दीवाली': 80% किसान 'हाथ मलते' रह गए, राजगीर लड्डू ही बचा सहारा

नायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत ही दीवाली की 'नीरस' तस्वीर से की। "इस बार भारत में दीवाली निराशाजनक रही। मध्य प्रदेश में 80% किसान परिवारों ने त्योहार मनाने की कोई ठोस वजह ही नहीं पाई। सोयाबीन तेल ₹180 प्रति लीटर के भाव पर खरीदने की हैसियत नहीं रही, तो कई परिवार राजगीर के लड्डुओं के सहारे गुजारा करने को मजबूर हुए।" उनका यह बयान हालिया सर्वे पर आधारित था, जहां ग्रामीण इलाकों में 70% से ज्यादा किसानों ने बताया कि फसल नुकसान और कम दामों से दीवाली का बजट फेल हो गया।

नायक ने कहा कि अत्यधिक बारिश और पीला मोजेक बीमारी ने सोयाबीन की फसल को तबाह कर दिया। "किसान पहले ही कर्ज के बोझ तले दबे हैं, ऊपर से राहत का नामोनिशान नहीं। सरकार की नीतियां किसानों को बर्बाद करने पर तुली हुई हैं।" उन्होंने अपील की कि दीवाली का असली संदेश समृद्धि है, लेकिन BJP राज में यह 'पीड़ा का पर्व' बन गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भोपाल में प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया, जहां किसानों ने खाली थालियां दिखाकर सरकार को आइना दिखाया।

शिवराज के 'खोखले वादे': कृषि को 'लाभकारी धंधा' बनाने का सपना चूर-चूर

नायक ने पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के पुराने वादों पर सीधा निशाना साधा। "शिवराज जी ने कृषि को लाभकारी धंधा बनाने का दावा किया था, लेकिन हकीकत में किसानों की कमर टूट चुकी है। डीजल, कृषि उपकरणों की कीमतें आसमान छू रही हैं, फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा।" उन्होंने सोयाबीन का उदाहरण दिया: "₹6,000 प्रति क्विंटल का MSP का वादा किया गया, लेकिन बाजार में ₹2,700-₹3,500 के भाव मिले। किसान ने क्या कमाया? सिर्फ नुकसान।" हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, MP में सोयाबीन का औसत भाव ₹4,419 प्रति क्विंटल रहा, जो MSP (₹4,892) से नीचे था, और किसानों को ₹24,000 करोड़ का नुकसान हुआ।

नायक ने कहा, "फसल खराबी पर राहत नहीं, कर्ज माफी का झुनझुना बजाया जा रहा है। किसान आत्महत्या कर रहे हैं, और सरकार विदेश यात्राओं में व्यस्त है।" कांग्रेस का दावा है कि 2025 में MP में 1,200 से ज्यादा किसान आत्महत्याएं हुईं, जो NCRB डेटा से मेल खाता है।

खाद की कालाबाजारी: 'किसान घंटों लाइन में, फिर भी महंगे दामों पर खरीद'

श्री नायक ने उर्वरकों की कालाबाजारी को 'सबसे बड़ा घोटाला' बताया। "डीएपी की आधिकारिक कीमत ₹1,350 प्रति बोरी है, लेकिन कालाबाजारी में ₹2,000-₹2,500 तक बिक रही। यूरिया ₹267 प्रति बोरी की है, निजी बाजार में ₹450-₹500। किसान घंटों कतारों में खड़े रहते हैं, स्टॉक खत्म मिलता है, और मजबूरी में महंगे दामों पर खरीदते हैं।" उन्होंने कहा कि यह कालाबाजारी खरीफ सीजन में चरम पर है, और सरकार चुप्पी साधे है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 में DAP का स्टॉक 42% कम था, जिससे कालाबाजारी बढ़ी। नायक ने अपील की, "कृषि मंत्री शिवराज जी, खाद की कमी क्यों? किसानों को सस्ते में उपलब्ध कराएं, वरना आंदोलन होगा।" कांग्रेस ने 'खाद बचाओ' कैंपेन शुरू किया, जहां 500+ किसानों ने शिकायतें दर्ज कीं।

भावांतर योजना का 'झूठा दावा': '35-50% किसान पहले ही बेच चुके, लाभ कौन पाएगा?'

नायक ने भावांतर भुगतान योजना को 'धोखा' करार दिया। "शिवराज जी ने 2017 में शुरू की, लेकिन पंजीयन प्रक्रिया इतनी देर से शुरू हुई कि 35-50% किसान दीवाली से पहले फसल बेच चुके। क्या इनका लाभ मिलेगा? यह योजना किसानों को लूटने का जरिया बनी।" योजना के तहत MSP और बाजार मूल्य के अंतर की भरपाई होती है, लेकिन देरी से किसानों को नुकसान। हालिया डेटा से साफ है कि सोयाबीन के लिए पंजीयन 25 सितंबर 2025 से शुरू हुआ, जब फसल बिक्री चरम पर थी। नायक ने कहा, "केंद्र ने MP को सोयाबीन MSP खरीद की मंजूरी दी, लेकिन राज्य सरकार ने 13 लाख MT का कोटा लिया-क्या पूरा होगा?"

शिवराज पर तीखा प्रहार: 'बेटे की शादी में हेलीकॉप्टर से कुदाल, किसान की पीड़ा पर उपहास'

नायक ने शिवराज सिंह चौहान की बेटे कुणाल की शादी (फरवरी 2025) पर तंज कसा। "शिवराज जी ने बेटे की शादी में हेलीकॉप्टर से कुदाल लेकर उतरने का ड्रामा किया, लाखों खर्चे हुए। लेकिन किसानों की पीड़ा पर? उनके बेटे की शादी में VIPs की भरमार, जबकि किसान राजगीर लड्डू खा रहे।" शादी में VP जगदीप धनखड़, CM योगी आदित्यनाथ समेत सैकड़ों नेता पहुंचे, जो ₹50 करोड़ से ज्यादा का खर्च बताई गई।

नायक ने जीतू पटवारी का उदाहरण दिया: "पटवारी जी ने किसानों का बोझ समझने के लिए 50 किलो की बोरी कंधे पर लादकर 2 किलोमीटर पैदल चले। शिवराज जी ने इसका उपहास किया-यह उनकी संवेदनहीनता है।" अक्टूबर 2025 में पटवारी ने शिवराज के घर धान की बोरी लेकर प्रदर्शन किया, जो किसान पीड़ा का प्रतीक बना।

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सरकार की चुप्पी और मांगें: 'उचित दाम, सस्ते उर्वरक, समय पर राहत दें'

नायक ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की: "किसानों को फसलों का उचित दाम दें, खाद-बीज सस्ते उपलब्ध कराएं, और राहत तुरंत पहुंचाएं। अन्यथा, कांग्रेस आंदोलन करेगी।" उन्होंने कहा कि पटवारी की अगुवाई में 'किसान बचाओ यात्रा' शुरू होगी। BJP ने जवाब में कहा, "कांग्रेस झूठ फैला रही, MSP खरीद चल रही है।" लेकिन किसान संगठनों ने नायक का समर्थन किया।

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