MP News: इंजीनियर कैसे बना चोर, जानकार हो जाएंगे हैरान, भोपाल पुलिस का बड़ा खुलासा, अय्याशी के लिए अपराध
मध्य प्रदेश की भोपाल पुलिस ने एक ऐसे चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके सरगना इंजीनियरिंग की डिग्री धारक हैं। विदिशा और रायसेन जैसे छोटे शहरों से भोपाल आए यशवंत रघुवंशी और अभिलाष विश्वकर्मा ने अपनी तकनीकी समझ का इस्तेमाल चोरी की साजिश रचने में किया।
इनके साथी भूपेंद्र साहू के साथ मिलकर यह गिरोह लग्जरी गाड़ियों में सवार होकर चोरी की वारदातों को अंजाम देता था और चुराए गए माल को मुथूट फाइनेंस में गिरवी रखकर लाखों रुपये का गोल्ड लोन लेता था। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि ये शातिर अपराधी चोरी की कमाई से बैंकाक और श्रीलंका की सैर कर चुके हैं और महंगे होटलों में ऐय्याशी करते थे।

इंजीनियरिंग की डिग्री, अपराध की दुनिया
यशवंत रघुवंशी (30) और अभिलाष विश्वकर्मा (33), दोनों कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग डिग्री धारक, भोपाल में एक सुनियोजित चोर गिरोह के सरगना निकले। यशवंत विदिशा के नटेरन का रहने वाला है, जबकि अभिलाष छिंदवाड़ा का निवासी है। तीसरा आरोपी भूपेंद्र साहू (29), रायसेन का रहने वाला, एक निजी कंपनी में नौकरी करता है। इन तीनों ने मिलकर भोपाल के कोलार रोड और कटारा हिल्स इलाकों में चार बड़ी चोरियों को अंजाम दिया।
पुलिस कमिश्नर हरीनारायणचारी मिश्रा ने बताया कि 14 मई 2025 को दानिशकुंज के मकान नंबर 3/53 में हुई चोरी के बाद पुलिस को एक सफेद हुंडई औरा कार (MP04-TB-4680) का सीसीटीवी फुटेज मिला। इस सुराग के आधार पर यशवंत को विदिशा, भूपेंद्र को कटारा हिल्स और अभिलाष को छिंदवाड़ा से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में पता चला कि अभिलाष पहले तेलंगाना में जेल की सजा काट चुका है।
चोरी का माल, गोल्ड लोन और विदेश यात्राएं
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे चोरी का माल लोकल मार्केट में बेचने से बचते थे, क्योंकि इससे पकड़े जाने का खतरा ज्यादा था। इसके बजाय, वे चुराए गए जेवरात को मंडीदीप की मुथूट फाइनेंस में गिरवी रखकर 40 लाख रुपये का गोल्ड लोन लेते थे। इस रकम को रियल एस्टेट और शेयर मार्केट में निवेश किया जाता था। इतना ही नहीं, लोन की रकम से इन्होंने सोने-चांदी के जेवरात भी खरीदे। पुलिस ने इनके पास से 22 लाख रुपये के जेवरात, 24 हजार रुपये नकद और दो कारें (हुंडई औरा और स्विफ्ट डिजायर) बरामद की हैं।

पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि ये अपराधी चोरी की कमाई से ऐय्याशी में डूबे थे। हाल ही में ये श्रीलंका और बैंकाक की सैर करके लौटे थे। महंगे होटलों में ठहरना, शराब और अन्य सुख-सुविधाओं पर पानी की तरह पैसा बहाना इनकी जीवनशैली बन चुकी थी।
शातिराना साजिश और बाहरी साथी
आरोपियों की चोरी की रणनीति भी कम चालाक नहीं थी। वे बाहरी राज्यों से साथियों को बुलाते थे, ताकि उनकी शिनाख्त मुश्किल हो। लंबे समय तक कोई वारदात न करके वे पुलिस की नजरों से बचते थे। नया टारगेट चुनने से पहले ये महीनों की प्लानिंग करते थे। लेकिन इस बार पुलिस ने समय रहते इन्हें दबोच लिया। पुलिस अब इनके फरार साथियों की तलाश में छिंदवाड़ा, रायसेन और विदिशा में छापेमारी कर रही है।
बुरी संगत और परिवार से दूरी बनी कारण
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ये युवा छोटे शहरों से भोपाल पढ़ाई के लिए आए थे, लेकिन बुरी संगत और परिवार के नियंत्रण की कमी ने इन्हें अपराध की दुनिया में धकेल दिया। यशवंत और अभिलाष अपनी इंजीनियरिंग की तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल चोरी की साजिश रचने में करते थे। इनके सात बैंक खातों में 60 लाख रुपये से अधिक का लेन-देन पाया गया, जिन्हें फ्रीज कर दिया गया है।

पुलिस की कार्रवाई और कोर्ट में पेशी
आरोपियों को गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि यह मामला उन युवाओं के लिए सबक है, जो गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं। पुलिस अब इनके नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने के लिए जांच को और गहरा कर रही है।
समाज के लिए चेतावनी
यह मामला न केवल पुलिस की सतर्कता को दर्शाता है, बल्कि यह भी चेतावनी देता है कि शिक्षा और तकनीकी कौशल का गलत इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है। भोपाल पुलिस की इस कार्रवाई ने शहर में बढ़ती चोरियों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।












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