Bhopal News: इंजीनियर को डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनाया, ठगों ने किया अजीब तरीका अपनाकर फिरौती की मांग
MP News: भोपाल के गायत्री नगर निवासी प्रमोद कुमार, जो एक फील्ड इंजीनियर हैं, को ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 6 घंटे तक बंधक बनाया और 3.50 लाख रुपये की फिरौती की मांग की।
प्रमोद कुमार के मुताबिक ठगों ने न सिर्फ उन्हें घबराहट में डाल दिया, बल्कि उनके मोबाइल कॉल्स और अन्य व्यक्तिगत जानकारी तक की जानकारी हासिल कर ली थी, जिससे वह और अधिक डर गए थे।

कैसे ठगों ने किया डिजिटल अरेस्ट?
इंजीनियर प्रमोद कुमार ने बताया कि उन्हें एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। कॉलर ने कहा कि उनके नंबर से किसी को कॉल कर फिरौती मांगी जा रही थी और अगर प्रमोद कुमार ने तत्काल पैसे नहीं दिए, तो उनकी गिरफ्तारी कर ली जाएगी। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि कॉलर ने उनके पते की पुष्टि की और यह भी बताया कि उनके मोबाइल पर आ रही वेटिंग कॉल किसने की थी।
प्रमोद कुमार ने कहा, "मैं पूरी तरह से घबरा गया था क्योंकि मुझे लगा कि पुलिस मेरे फोन की निगरानी कर रही है। ठगों ने मेरे फोन में मौजूद अन्य जानकारियों के बारे में भी बताया, जैसे कि मेरी वॉट्सऐप चैट और कॉल्स, जिससे मुझे यकीन हो गया कि वे मेरी निजी जानकारी तक पहुंच सकते हैं।"
आरोपी कैसे दबाव बना रहे थे?
धमकी देने के बाद, एक आरोपी ने प्रमोद से कहा कि अगर वह गिरफ्तारी से बचना चाहते हैं, तो उन्हें डिजिटल निगरानी में रहना होगा। आरोपी ने कहा, "भले आदमी लगते हो, इसलिए हम आपके केस की जांच करेंगे। जांच के बाद ही यह तय होगा कि आपको आगे क्या करना है।"
इससे घबराए हुए प्रमोद ने अपनी यूपीआई ऐप्स डिलीट कर दीं और स्थिति को लेकर तनाव में आ गए। दिल की धड़कन तेज हो गई और वह इस स्थिति से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं देख पा रहे थे। तभी एक अन्य आरोपी, जो वर्दी पहने हुआ था, ने कहा कि यदि वह इस केस से बचना चाहते हैं, तो खर्चा करना होगा। यह सुनकर प्रमोद कुमार ने रात 11:30 बजे कॉल डिस्कनेक्ट कर दी और ठगों को अपनी कॉल पिक नहीं करने दी।

वॉट्सऐप कॉल्स से की और धमकी
इसके बाद, आरोपियों ने वॉट्सऐप के जरिए भी दो बार कॉल की। प्रमोद कुमार ने इन कॉल्स का जवाब नहीं दिया और स्थिति को समझते हुए ठगों से दूरी बनाने की कोशिश की। प्रमोद कुमार ने पूरी घटना को समझते हुए अपनी परेशानियों को साझा किया और अपनी जानकारी साइबर क्राइम पुलिस को दी।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने आईपी एड्रेस के आधार पर आरोपियों का पता लगाने की कोशिश की और इसे एक ऑनलाइन ठगी का मामला मानते हुए आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। बाद में, कानपुर देहात पुलिस को भी इस मामले की जानकारी दी गई और वहां पर दो संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है, लेकिन आरोपियों ने पुलिस के दबाव से पहले ही अपना स्थान बदल लिया था और उनके मोबाइल नंबर भी बंद हो गए थे। पुलिस अब इन ठगों तक पहुंचने के लिए पूरी ताकत से काम कर रही है।
साइबर अपराधों की बढ़ती समस्या
यह घटना साइबर अपराधों की बढ़ती समस्या का एक और उदाहरण है। ठगों ने न सिर्फ डिजिटल रूप से प्रमोद कुमार को धमकाया, बल्कि उनकी निजी जानकारी तक पहुंच बनाई। प्रमोद ने पूरी घटना को पुलिस के सामने रखा और बताया कि यह किस प्रकार से ऑनलाइन ठगों का नेटवर्क है, जो इस तरह के अपराधों को अंजाम दे रहा है। पुलिस ने कहा कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।












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