MP News: दिग्विजय के हिंदू मुसलमान वाले बयान पर वीडी शर्मा का पलटवार, लगाया कोर्ट की अवमानना का आरोप
प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि दिग्विजय सिंह को धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाने से पहले यह जान लेना चाहिए कि धार स्थित भोजशाला परिसर में एएसआई का सर्वे इंदौर हाईकोर्ट के आदेश पर हो रहा है। एक सामाजिक संस्था द्वारा लगाई गई याचिका पर न्यायालय ने उक्त आदेश पारित किया था।
सर्वप्रथम तो दिग्विजय सिंह ने बिना जानकारी के इस सर्वे पर जो आपत्ति लगाई है, उसे स्पष्ट करें। यह धार्मिक भेंदभाव का आरोप स्पष्ट तौर पर न्यायालय की अवमानना है, जिस पर न्यायालय को स्वतः संज्ञान लिया जाकर अवमानना का केस दर्ज होना चाहिए।

वीडी शर्मा ने कहा कि दिग्विजय सिंह को तुष्टीकरण पर विश्वास है और वे सदैव हिन्दू समाज की धार्मिक भावनाओं पर आघात पहुंचाते रहे हैं। बिना किसी तथ्य और तर्क के प्रभु राम के अस्तित्व पर सवाल उठाने वाले कांग्रेसी अब भोजशाला में एएसआई के सर्वे पर प्रश्न-चिन्ह खड़ा कर रहे हैं।
कांग्रेसियों को न तो प्रभु राम पर विश्वास है और न ही देश के संविधान और न्यायपालिका पर। कांग्रेस नेता और दिग्विजय सिंह अप्रसांगिक हो गये हैं और अपना अस्तित्व खो चुके हैं, यह वहीं हैं, जिन्होंने राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का न्यौता तक ठुकरा दिया था और अब मॉ सरस्वती के मंदिर भोजशाला पर तुष्टिकरण की रोटियां सेक रहे हैं। दिग्विजय सिंह लोकसभा चुनाव की करारी हार से पहले जानबूझकर विषवमन कर रहे हैं, ताकि सामाजिक विद्वेष व तनाव पैदा कर राजनीतिक लाभ लिया जा सके।
वीडी शर्मा ने कहा कि देश और प्रदेश में जब भी चुनाव होते हैं, कांग्रेस हार के डर से ईवीएम, जांच एजेंसी एवं न्यायालय पर सवाल खड़ा करती है। केजरीवाल की गिरफ्तारी की निंदा करना, आंतकवादियों का समर्थन करना, न्यायालय के फैसलों पर आपत्ति करना और देश विरोधियों का साथ देना कांग्रेस और दिग्विजय सिंह का मूल चरित्र रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का जो कायाकल्प हो रहा है, उसके चलते पूरे देश में मोदी और भाजपा के पक्ष में लहर है।

दिग्विजय सिंह और कांग्रेस बताए कि उन्होंने कहां से वसूली की
प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड को भारतीय राजनीति में काले धन के चुनावी चंदे का वर्चस्व समाप्त करने के लिए लाया गया था। इलेक्टोरल बॉन्ड पर सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही का हम सम्मान करते हैं। इलेक्टोरल बॉन्ड को हम पारदर्शी दान कहते हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी इसे वसूली कहती है। दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं के संज्ञान में रहना चाहिए कुल 20 हजार करोड़ के चुनावी बॉन्ड में से भाजपा को 303 सांसद होने के बाद भी सिर्फ 6 हजार करोड़ मिले हैं। वहीं कांग्रेस सहित इंडी गठबंधन के 242 सांसद ही हैं, जिन्हें 14 हजार करोड़ चुनावी बॉन्ड से मिले हैं। जब इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी सभी के सामने आएगी तो कांग्रेस और इंडी गठबंधन में शामिल दल देश की जनता से नजरें नहीं मिला पाएंगे। इलेक्टोरल बॉन्ड को वसूली कहने वाले दिग्विजय सिंह बताएं कि काग्रेस और इंडी गठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों ने चुनावी बॉन्ड की वसूली कहां-कहां से की है।












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