दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े का सरप्राइज विजिट, बसई सीनियर बालक छात्रावास में बच्चों के साथ बैडमिंटन खेला
MP Datia News: दतिया जिले के कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने रविवार को बसई स्थित सीनियर बालक छात्रावास का सरप्राइज निरीक्षण किया। यहां उन्होंने न केवल छात्रावास की साफ-सफाई, रहन-सहन और भोजन की गुणवत्ता का जायजा लिया, बल्कि बच्चों के साथ बैडमिंटन खेलकर उनका उत्साह बढ़ाया और खुलकर बातचीत की।
कलेक्टर ने खुद भोजन चखा और बच्चों से उनकी पढ़ाई, स्वास्थ्य और छात्रावास की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। बच्चों ने बिना संकोच अपनी बातें रखीं, जिससे माहौल काफी खुशनुमा हो गया।

यह निरीक्षण जिले में छात्रावासों की स्थिति सुधारने की दिशा में कलेक्टर की सक्रियता को दर्शाता है। आदिवासी बहुल दतिया में कई छात्रावास हैं, जहां गरीब और दूरदराज के बच्चे पढ़ाई के लिए रहते हैं। कलेक्टर का यह दौरा बच्चों के लिए प्रेरणा बन गया। वनइंडिया हिंदी की विशेष रिपोर्ट में जानिए निरीक्षण का पूरा विवरण, बच्चों की बातें और कलेक्टर के निर्देश।
साफ-सफाई से भोजन तक का जायजा
कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े बिना पूर्व सूचना के बसई सीनियर बालक छात्रावास पहुंचे। छात्रावास में करीब 100 बच्चे रहते हैं, जो आसपास के गांवों से पढ़ाई के लिए आए हैं।
साफ-सफाई निरीक्षण: कलेक्टर ने छात्रावास के कमरे, किचन, बाथरूम और परिसर का दौरा किया। साफ-सफाई पर संतोष जताया, लेकिन कुछ कमियों पर तुरंत सुधार के निर्देश दिए।
भोजन चखा: कलेक्टर ने बच्चों के लिए बना भोजन खुद चखा। दाल, चावल, सब्जी और रोटी की गुणवत्ता पूछी। बच्चों ने बताया कि भोजन अच्छा है, लेकिन कभी मसाले कम हो जाते हैं। कलेक्टर ने वार्डन को बेहतर व्यवस्था के निर्देश दिए।
खेल का मैदान: छात्रावास में खेलने की जगह देखी। बैडमिंटन कोर्ट पर बच्चों के साथ रैकेट थामा और खेला। बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था।
कलेक्टर ने कहा, "बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास जरूरी है। खेल से अनुशासन और टीमवर्क आता है।"
बच्चों से खुलकर बातचीत: पढ़ाई-स्वास्थ्य से समस्याएं सुनीं
कलेक्टर ने बच्चों को घेरकर बैठाया और एक-एक से बात की:
- पढ़ाई: "किताबें मिल रही हैं? टीचर अच्छा पढ़ाते हैं?"
- स्वास्थ्य: "बीमार पड़ते हो तो दवा मिलती है?"
- छात्रावास: "खाना अच्छा है? कोई समस्या तो बताओ।"
बच्चों ने बिना डरे बातें रखीं:
- "सर, लाइट कभी-कभी जाती है।"
- "पानी की टंकी साफ नहीं होती।"
- "खेल का सामान और बढ़ाओ।"
कलेक्टर ने तुरंत वार्डन और स्टाफ को निर्देश दिए। एक बच्चे ने कहा, "सर, आप आए तो अच्छा लगा।" कलेक्टर मुस्कुराए और बोले, "तुम्हारी समस्याएं मेरी जिम्मेदारी हैं।"
आदिवासी बच्चों की पढ़ाई का सहारा
बसई सीनियर बालक छात्रावास आदिवासी बहुल क्षेत्र का है। यहां 8वीं से 12वीं तक के बच्चे रहते हैं। ज्यादातर गरीब परिवारों से। छात्रावास में मुफ्त रहना-खाना और पढ़ाई की सुविधा है। लेकिन साफ-सफाई, भोजन गुणवत्ता और खेल सुविधाओं में कमी की शिकायतें आती रही हैं। कलेक्टर का यह दौरा इन कमियों को दूर करने की दिशा में कदम है।
कलेक्टर के निर्देश: तुरंत सुधार
- साफ-सफाई पर सख्ती।
- भोजन गुणवत्ता जांच।
- खेल सामग्री बढ़ाने।
- स्वास्थ्य जांच कैंप।
- बिजली-पानी की नियमित व्यवस्था के आदेश दिए।
कलेक्टर ने कहा, "छात्रावास बच्चों का दूसरा घर है। यहां उन्हें अच्छा माहौल मिलना चाहिए।"
विपक्ष का तंज, BJP का दावा
कांग्रेस ने कहा, "सरप्राइज विजिट ड्रामा है। पहले सुविधाएं क्यों नहीं दीं?" BJP ने कहा, "कलेक्टर सक्रिय हैं। बच्चों का विकास हमारी प्राथमिकता।"
बच्चों की मुस्कान, कलेक्टर की संवेदना
स्वप्निल वानखेड़े का बसई छात्रावास दौरा बच्चों के लिए यादगार बन गया। बैडमिंटन खेलना और बातचीत ने उन्हें करीब लाया। यह दिखाता है कि प्रशासनिक अधिकारी जब जमीन से जुड़ते हैं, तो बदलाव आता है। क्या सभी छात्रावासों में ऐसे विजिट होंगे? वनइंडिया हिंदी नजर बनाए हुए है।












Click it and Unblock the Notifications