MP News: कलेक्टर–SDM बिना रिश्वत नहीं करते काम! मुख्य सचिव अनुराग जैन का बड़ा खुलासा, अफसरों पर गिरी गाज
MP News: मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की सरकार में प्रशासनिक कामकाज को लेकर अब सबसे सख्त संदेश सीधे मंत्रालय से आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि मुख्यमंत्री जी का कहना है-बिना पैसे लिए कोई कलेक्टर काम नहीं करता। उन्होंने जिलों की सुशासन समीक्षा बैठक में प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि कई जगह एसडीएम और पटवारी लाखों रुपए लिए बिना काम नहीं करते।
मुख्य सचिव की यह टिप्पणी न सिर्फ चौंकाने वाली रही, बल्कि पूरे प्रशासनिक अमले के लिए एक सख्त चेतावनी भी मानी जा रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी अगर पद पर बने रहते हैं, तो यह सुशासन की अवधारणा के साथ धोखा है।

"कम बोलते हैं, लेकिन सच्चाई कड़वी है" - अनुराग जैन
सुशासन की वर्चुअल समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बेहद कड़े शब्दों में कहा- "हम बहुत कम बोलते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि कई जगह बिना पैसे लिए काम ही नहीं होता। अगर कोई कलेक्टर, एसडीएम या पटवारी ऐसा कर रहा है, तो उसे पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।" उन्होंने साफ कहा कि ऐसे अधिकारियों को हटाने में किसी भी स्तर पर कोई हिचक नहीं होनी चाहिए।
शिकायतों का अंबार, सुशासन पर सवाल
बैठक में पेश किए गए आंकड़ों ने शासन स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी। मुख्य सचिव के सामने बताया गया कि प्रदेश में शिकायत निवारण प्रणाली लगभग ठप जैसी स्थिति में है-
- 1 लाख 80 हजार शिकायतें 100 दिन से अधिक समय से लंबित
- 27 हजार शिकायतें 3 महीने से ज्यादा पुरानी
- 90 हजार से अधिक शिकायतें ऐसी, जिन्हें अब तक देखा तक नहीं गया
इन आंकड़ों पर नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि जनता की शिकायतों को नजरअंदाज करना सीधे-सीधे सुशासन के खिलाफ है।

इंदौर पुलिस का मामला, कमिश्नर गायब, फोन स्विच ऑफ
कॉन्फ्रेंस के दौरान इंदौर से जुड़ा एक संवेदनशील मामला भी सामने आया। शिकायत दर्ज न होने को लेकर जब इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह को स्क्रीन पर बुलाया गया, तो वे वर्चुअली उपस्थित नहीं मिले।
फोन करने पर उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला। इस पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम पर डीजीपी कैलाश मकवाना को संज्ञान लेना चाहिए।
अब VC में रहना होगा अनिवार्य
- मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जब तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग चलेगी-
- संबंधित जिले के एसपी
- वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी
- को अनिवार्य रूप से मौजूद रहना होगा। लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नामांतरण के बदले रिश्वत मांगने का खुला आरोप
कॉन्फ्रेंस में एक नामांतरण से जुड़ी शिकायत का जिक्र भी हुआ, जिसमें साफ लिखा था कि काम करने के बदले पैसे मांगे जा रहे हैं।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बताया कि- शिकायत को संबंधित कलेक्टर को जांच के लिए भेजा गया है। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार सबसे ज्यादा शिकायतों की वजह बन रहा है।
मंत्रालय के अंतिम चैंबर से सख्त संदेश
यह पूरी वर्चुअल समीक्षा बैठक मंत्रालय के अंतिम चैंबर से शुरू की गई। मुख्य सचिव ने साफ कहा- "सुशासन तभी संभव है, जब अधिकारी ईमानदारी से काम करें। वरना सरकार कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।"
प्रशासन में हलचल, जिलों में बढ़ी बेचैनी
मुख्य सचिव के इस बयान के बाद जिलों के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में-
- शिकायतों की सघन समीक्षा
- एसडीएम-पटवारी स्तर पर जांच
- और कड़ी कार्रवाई
- देखने को मिल सकती है।
विपक्ष का तीखा हमला: "यह आरोप नहीं, सरकार की स्वीकारोक्ति है"
मुख्य सचिव के बयान पर उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि, "मुख्य सचिव स्वयं कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री जी का कहना है-बिना पैसे लिए कोई कलेक्टर काम नहीं करता। यह विपक्ष का आरोप नहीं, बल्कि भाजपा सरकार में फैले भ्रष्टाचार की खुली स्वीकारोक्ति है।"
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब जिले चलाने वाले जिम्मेदार अधिकारी ही लेन-देन और अवैध वसूली की प्रक्रिया में जकड़े हों, तो आम जनता को न्याय, सेवा और पारदर्शिता कैसे मिलेगी। यह स्थिति सुशासन नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का संस्थागत मॉडल बन चुकी है।
उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री से सवाल करते हुए कहा कि यदि सरकार को वास्तव में प्रदेश की चिंता है, तो मध्यप्रदेश को दलालों, कमीशनखोरी और भ्रष्ट प्रशासन से मुक्त करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यह किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की अनिवार्य मांग है।
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