Baba Bageshwar: दतिया में संविधान बचाओ की गूंज! चंद्रशेखर रावण की एंट्री, इन धर्म गुरुओं के खिलाफ बड़ा आंदोलन
MP News: मध्य प्रदेश के दतिया जिले में बहुजन समाज की राजनीति एक बार फिर गरमाती नजर आ रही है। डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर 6 दिसंबर को आयोजित होने वाली 'संविधान बचाओ रैली' ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नागिना से सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण (जिन्हें चंद्रशेखर रावण के नाम से भी जाना जाता है) की इस रैली में एंट्री से यह आयोजन अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त आंदोलन बन चुका है।
रैली का मुख्य निशाना बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बाबा बागेश्वर), सीहोर के पंडित प्रदीप मिश्रा और जगद्गुरु रामभद्राचार्य जैसे धर्म गुरुओं पर है, जिन्हें 'पाखंड, जातिवाद और संविधान-विरोधी गतिविधियों' का प्रतीक माना जा रहा है।

वनइंडिया हिंदी के संवाददाता द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह रैली दतिया के इंदरगढ़ क्षेत्र में आयोजित होगी, जहां भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी और विभिन्न दलित-पिछड़ा संगठनों का संयुक्त मंच बनेगा। रैली में चंद्रशेखर रावण के अलावा राष्ट्रीय प्रवक्ता, रविंद्र भाटी, आजाद समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव दामोदर सिंह यादव और अन्य बहुजन नेताओं की भागीदारी सुनिश्चित है। यह आयोजन न केवल संविधान की रक्षा का संदेश देगा, बल्कि जातिवादी ताकतों के खिलाफ एक मजबूत हुंकार भी भरेगा। स्थानीय कार्यकर्ताओं का दावा है कि इसमें 50 हजार से अधिक लोग शामिल होंगे, जो दतिया की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
चंद्रशेखर रावण का एजेंडा: संविधान की रक्षा और पाखंड का अंत
चंद्रशेखर आजाद रावण, जो भीम आर्मी के संस्थापक के रूप में दलित-बहुजन आंदोलन के प्रमुख चेहरे हैं, का यह दौरा मध्य प्रदेश में उनकी पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास है। 1987 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जन्मे रावण ने अपनी राजनीतिक यात्रा 2015 में भीम आर्मी के माध्यम से शुरू की, जो दलित अधिकारों और शिक्षा के लिए संघर्ष करती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में नागिना से जीतकर वे संसद पहुंचे, और अब वे 'संविधान बचाओ' अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर ले जा रहे हैं।
रावण का मुख्य एजेंडा स्पष्ट है: संविधान के मूल्यों-समानता, स्वतंत्रता और भाईचारा-की रक्षा। वे आरोप लगाते हैं कि कुछ धर्म गुरु अपनी कथाओं और बयानों के माध्यम से जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 17 का उल्लंघन है। विशेष रूप से, धीरेंद्र शास्त्री की हालिया 'सनातन हिंदू एकता पदयात्रा' (7-16 नवंबर 2025, दिल्ली से वृंदावन तक) को वे 'जातिवादी विभाजन का हथियार' बता रहे हैं। इस पदयात्रा में शास्त्री ने कहा था, "जातिवाद ने देश को खोखला कर दिया है, हम हिंदुओं को एकजुट करेंगे ताकि भारत विश्वगुरु बने।" लेकिन रावण समर्थक इसे 'सवर्णवादी एकता' का नाम देकर खारिज करते हैं।
रावण ने हाल ही में एक वीडियो संदेश में कहा, "संविधान बाबासाहेब का अमूल्य उपहार है। पाखंडी बाबाओं की कथाओं से दलित-बहुजन समाज का अपमान हो रहा है। 6 दिसंबर को दतिया में हम हुंकार भरेंगे-जय भीम, जय संविधान!" उनका लक्ष्य युवाओं को संगठित करना, शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर फोकस करना, और 2028 के विधानसभा चुनाव में आजाद समाज पार्टी को मजबूत बनाना है। रैली के बाद वे स्थानीय अधिकारियों से मिलकर जातिवादी हिंसा के मामलों की जांच की मांग करेंगे।
दामोदर सिंह यादव ने क्या कहा? 'पाखंड का अंत संविधान से ही'
रैली के प्रमुख आयोजकों में शुमार आजाद समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव दामोदर सिंह यादव ने वनइंडिया हिंदी से विशेष बातचीत में कहा, "ये बाबा संविधान को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा में जातिगत भेदभाव को बढ़ावा दिया गया, प्रदीप मिश्रा की कथाओं में दलितों को नीचा दिखाया जाता है, और रामभद्राचार्य जैसे विद्वान भी मनुस्मृति को प्राथमिकता देकर संविधान को चुनौती देते हैं। हम इसका विरोध करेंगे।"
यादव ने 3 नवंबर को दतिया में आयोजित एक छोटी रैली में कहा, "साथियो, मैं आ रहा हूं दतिया-संविधान की रक्षा, पाखंड आडंबर का खात्मा और अपनों को हक दिलाने के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए। जय भीम, जय संविधान!" यादव, जो यदुवंशी महासभा के प्रमुख भी हैं, ने हाल ही में जबलपुर हाईकोर्ट में शास्त्री की पदयात्रा के खिलाफ याचिका दाखिल की थी, जिसमें 'गैर-सनातनी' प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की गई। वे रैली को बहुजन एकता का प्रतीक बताते हैं और कहते हैं, "यह आंदोलन सड़क से संसद तक जाएगा।"
रैली से प्रदेश की राजनीति में क्या असर? बहुजन वोट बैंक में सेंध
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2028 से पहले यह रैली भाजपा-कांग्रेस दोनों के लिए चुनौती है। दतिया-ग्वालियर संभाग में दलित-पिछड़ा वोट (लगभग 25%) निर्णायक है। चंद्रशेखर रावण की लोकप्रियता से आजाद समाज पार्टी का वोट शेयर 5-7% तक बढ़ सकता है, जो सपा-बसपा जैसे दलों को कमजोर करेगा। स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली 'संविधान बचाओ' को ब्रांड बना देगी, जो 2027 के नगरीय निकाय चुनावों में असर दिखाएगी।
पिछले महीने 8 नवंबर को दतिया के इंदरगढ़ में भीम आर्मी ने धीरेंद्र शास्त्री का पुतला दहन किया था, जिसमें हिंदू संगठनों से झड़प हुई। पुलिस ने लाठीचार्ज कर स्थिति संभाली। यह घटना रैली का पूर्वाभास थी। रावण की रैली से बहुजन समाज में एकता मजबूत होगी, लेकिन जातिगत तनाव बढ़ने का खतरा भी है। कांग्रेस और भाजपा दोनों चुप्पी साधे हैं, लेकिन आंतरिक सर्कल में चर्चा है कि यह 'रावण बनाम राम' की राजनीति को जन्म दे सकता है।
भारी सुरक्षा इंतजाम क्यों? संवेदनशीलता और हिंसा का डर
दतिया पुलिस ने रैली के लिए भारी सुरक्षा इंतजाम किए हैं। एसपी दतिया ने बताया, "कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहेगा। 500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात होंगे, ड्रोन से निगरानी होगी।" कारण साफ है-पिछले आंदोलनों में हिंसा हुई है। 8 नवंबर की घटना में 200 भीम आर्मी कार्यकर्ताओं ने पुतला दहन किया, तो सनातन हिंदू संगठनों ने पथराव किया। धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा के दौरान भी दलित संगठनों के विरोध प्रदर्शन हुए।
इलाके में धार्मिक संवेदनशीलता चरम पर है। शास्त्री के समर्थक रैली को 'धर्म-विरोधी' बता रहे हैं, जबकि रावण समर्थक इसे 'संवैधानिक अधिकार'। कलेक्टर ने धारा 144 लागू करने का ऐलान किया है। रैली स्थल अंबेडकर पार्क से ग्वालियर चौराहे तक होगा, जहां स्वागत समितियां सक्रिय हैं।
बहुजन हुंकार का नया अध्याय
6 दिसंबर को दतिया न केवल आंबेडकर की स्मृति मनाएगा, बल्कि संविधान की रक्षा के लिए एक नया आंदोलन शुरू करेगा। चंद्रशेखर रावण की यह 'दस्तक' पाखंड के खिलाफ लड़ाई को तेज करेगी। लेकिन सवाल यह है-क्या यह एकता लाएगी या विभाजन? वनइंडिया हिंदी की टीम घटना की लाइव कवरेज करेगी। जय भीम! जय संविधान!
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