Bhopal News Love Jihad: प्राइवेट कॉलेज की छात्राओं पर धर्मांतरण का दबाव, राष्ट्रीय महिला आयोग ने संभाला मोर्चा
Bhopal Love Jihad: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एक नामी प्राइवेट कॉलेज में हिंदू छात्राओं को निशाना बनाकर रेप, ब्लैकमेलिंग और तथाकथित 'लव जिहाद' का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह घटना 1992 के कुख्यात अजमेर रेप कांड की भयावह यादें ताजा करती है। एक सुनियोजित गिरोह ने छात्राओं को प्रेम के जाल में फंसाया, उनके साथ यौन शोषण किया, वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला।
इस मामले ने न केवल भोपाल, बल्कि पूरे देश में हंगामा मचा दिया है। रविवार, 4 मई 2025 को राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की तीन सदस्यीय जांच टीम भोपाल पहुंची और पुलिस के साथ मैराथन बैठक कर मामले की तह तक जाने का फैसला किया।

मामला क्या है? एक संगठित साजिश की कहानी
यह सब तब शुरू हुआ, जब 18 अप्रैल 2025 को एक नाबालिग छात्रा ने भोपाल के बागसेवनिया थाने में हिम्मत जुटाकर शिकायत दर्ज की। उसने बताया कि कॉलेज का पूर्व छात्र फरहान अली उर्फ फराज ने हिंदू नाम का इस्तेमाल कर उससे दोस्ती की। धीरे-धीरे वह उसे प्रेम जाल में फंसा ले गया। इसके बाद फरहान ने नशीले पदार्थ देकर उसका यौन शोषण किया और वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। इस वीडियो के जरिए वह उसे ब्लैकमेल करने लगा। इतना ही नहीं, उसने अपनी सहेलियों और अन्य छात्राओं को भी अपने दोस्तों से मिलवाने के लिए मजबूर किया।
इस शिकायत ने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया। एक के बाद एक, अब तक छह छात्राओं ने पुलिस के सामने अपनी आपबीती सुनाई। सभी पीड़िताएं भोपाल के टेक्नोक्रेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (TIT) कॉलेज की हैं। पुलिस को आरोपियों के मोबाइल से 10-15 छात्राओं के आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं, जिनमें कुछ वीडियो में फरहान और उसके साथी पीड़िताओं को सिगरेट से जलाते और प्रताड़ित करते नजर आए। पुलिस का अनुमान है कि पीड़िताओं की संख्या और बढ़ सकती है।
गिरोह का खौफनाक मॉडस ऑपरेंडी
पुलिस जांच में सामने आया कि फरहान ने अपने दोस्तों साहिल, साद, अली, नबील और अबरार के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह बनाया था। इस गिरोह का मकसद सिर्फ हिंदू छात्राओं को निशाना बनाना था। फरहान ने पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा किया कि उसका गैंग खास तौर पर "सेकुलर विचारधारा" वाली हिंदू लड़कियों को टारगेट करता था, क्योंकि उन्हें लगता था कि ऐसी लड़कियां आसानी से उनके जाल में फंस जाएंगी।
Bhopal Love Jihad: गिरोह का तरीका सुनियोजित था
- प्रेम जाल: आरोपी पहले हिंदू नामों का इस्तेमाल कर या अपनी पहचान छिपाकर छात्राओं से दोस्ती करते थे।
- नशीले पदार्थ: छात्राओं को गांजा, शराब या अन्य नशीले पदार्थ दिए जाते थे। कुछ मामलों में उन्हें जबरन मटन खिलाया गया।
- यौन शोषण और वीडियो: शारीरिक संबंध बनाकर वीडियो रिकॉर्ड किए जाते थे। इन वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेलिंग शुरू होती थी।
- धर्मांतरण का दबाव: पीड़िताओं पर इस्लाम कबूल करने और बुर्का पहनने का दबाव डाला जाता था। फरहान की बहन ने भी एक पीड़िता को ब्रेनवॉश करने में अहम भूमिका निभाई थी।
- सहेलियों को फंसाना: ब्लैकमेलिंग के जरिए पीड़िताओं को अपनी सहेलियों को गैंग के पास लाने के लिए मजबूर किया जाता था।
पुलिस को यह भी पता चला कि फरहान छात्राओं के वीडियो को पोर्न साइट्स पर अपलोड करने की योजना बना रहा था, जिसमें उसके साथी अबरार और नबील उसकी मदद करने वाले थे। गिरोह ने कॉलेज के पास 'क्लब 90' नाम के रेस्तरां का इस्तेमाल भी सेफ हाउस के तौर पर किया, जिसे पुलिस ने सील कर दिया है।
Bhopal Love Jihad: पुलिस की कार्रवाई: पांच गिरफ्तार, एक फरार
भोपाल पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू की। अब तक पांच आरोपी-फरहान अली, साहिल, साद, अली और नबील-गिरफ्तार किए जा चुके हैं। छठा आरोपी अबरार अभी फरार है। पुलिस ने भारतीय नवीन संहिता (बीएनएस), पॉक्सो एक्ट, आईटी एक्ट और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए हैं।
25 अप्रैल को फरहान की गिरफ्तारी के बाद से मामले ने तूल पकड़ा। 29 अप्रैल को जिला कोर्ट में पेशी के दौरान वकीलों के एक समूह ने आरोपियों की पिटाई कर दी, जिसके बाद पुलिस को अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा। 2 मई की रात एक और ड्रामाई घटनाक्रम हुआ, जब फरहान ने पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की। उसने सब-इंस्पेक्टर की सर्विस रिवॉल्वर छीनने की कोशिश की, जिस दौरान गोली चल गई और वह अपने दाहिने पैर में घायल हो गया। उसे हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत स्थिर है।
पुलिस ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, जो गैंग की फंडिंग और संभावित बाहरी कनेक्शन की जांच कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, भोपाल का एक नामी बदमाश इस गैंग को फंडिंग कर रहा था, जिसके तार इंदौर तक जुड़े हो सकते हैं।
राष्ट्रीय महिला आयोग का दखल: भोपाल में तीन दिन का डेरा
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया। आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने 29 अप्रैल को तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता झारखंड की पूर्व डीजीपी निर्मला कौर कर रही हैं। अन्य सदस्यों में जबलपुर हाईकोर्ट की अधिवक्ता निर्मला नायक और आयोग के अवर सचिव आशुतोष पांडेय शामिल हैं।
4 मई को यह टीम भोपाल पहुंची और होटल रेडिसन में पुलिस अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक की। एसआईटी के अधिकारियों को तलब किया गया और अब तक की कार्रवाई का ब्योरा लिया गया। अगले तीन दिन (3-5 मई) तक यह टीम भोपाल में रहेगी और पीड़ित छात्राओं, उनके परिजनों और कॉलेज प्रशासन से मुलाकात करेगी।
टीम का मकसद है:
- जमीनी हकीकत जानना: घटना के सभी पक्षों से बातचीत कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना।
- न्याय सुनिश्चित करना: पीड़िताओं को त्वरित और निष्पक्ष न्याय दिलाने के लिए सुझाव देना।
- पुनरावृत्ति रोकना: ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कॉलेजों और पुलिस प्रशासन को दिशा-निर्देश देना।
निर्मला कौर ने कहा, "हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़िताओं को इंसाफ मिले और दोषियों को कड़ी सजा हो। हम सभी पक्षों से बात करेंगे और एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करेंगे।"
सामाजिक और राजनीतिक उबाल
इस मामले ने भोपाल में सामाजिक और राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। हिंदू संगठनों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कॉलेज परिसर में प्रदर्शन किए और 'लव जिहाद' के खिलाफ प्रतीकात्मक अर्थी जुलूस निकाला। एबीवीपी ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कॉलेजों में छात्राओं की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की।
बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस घटना को 'द केरल स्टोरी' फिल्म जैसी साजिश करार देते हुए आरोपियों को सार्वजनिक सजा देने की मांग की। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त लहजे में कहा, "मध्य प्रदेश में 'जिहाद' या 'लव जिहाद' बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।" कांग्रेस ने भी इस मामले की निंदा की और निष्पक्ष जांच की मांग की।
पीड़िताओं की दर्दनाक कहानियां
पीड़िताओं की कहानियां रोंगटे खड़े करने वाली हैं। एक पीड़िता ने बताया कि फरहान ने उसे बुर्का पहनने और रोजा रखने के लिए मजबूर किया। उसकी बहन ने उसे ब्रेनवॉश कर कहा कि "यह सब सही है।" एक अन्य पीड़िता, जो बैतूल की रहने वाली है, ने बताया कि फरहान और उसके साथियों ने उसे और उसकी बहन को गांजा पिलाया, मटन खिलाया और फिर गैंग के अन्य सदस्यों को सौंप दिया।
कई पीड़िताओं ने सामाजिक बदनामी के डर से शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया। पुलिस की महिला अधिकारियों ने ऐसी छात्राओं की काउंसलिंग शुरू की है। एक पीड़िता ने पढ़ाई तक छोड़ दी, क्योंकि वह डर के मारे कॉलेज नहीं जा सकती थी।
कॉलेज प्रशासन पर सवाल
TIT कॉलेज प्रशासन भी सवालों के घेरे में है। छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि कॉलेज में सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे। क्लब 90 रेस्तरां, जो कॉलेज से महज 100 मीटर दूर था, गैंग का अड्डा बन गया था, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया। कुछ अभिभावकों ने मांग की है कि कॉलेज के खिलाफ भी कार्रवाई हो।
फरहान के पिता का बयान
मुख्य आरोपी फरहान के पिता रिजवान खान ने इस मामले पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि मेरा बेटा ऐसी घिनौनी हरकत कर सकता है। वह घर में शरीफ और धार्मिक दिखता था। अपनी बहनों के सामने पर्दे का सख्ती से पालन करता था।" हालांकि, पुलिस फरहान की बहन और परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
अजमेर कांड से तुलना
यह मामला 1992 के अजमेर रेप कांड से कई मायनों में मिलता-जुलता है। अजमेर में भी एक मुस्लिम गैंग ने हिंदू छात्राओं को प्रेम जाल में फंसाकर उनका यौन शोषण किया था। वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग कर 100 से अधिक लड़कियों को शिकार बनाया गया था। भोपाल में भी गैंग का मॉडस ऑपरेंडी ऐसा ही था, जिसके चलते इसे "भोपाल का अजमेर कांड" कहा जा रहा है।
अब आगे क्या?
- राष्ट्रीय महिला आयोग की जांच और पुलिस की कार्रवाई से इस मामले में तेजी आई है। लेकिन कई सवाल अभी अनुत्तरित हैं:
- क्या फरार आरोपी अबरार को पकड़ा जाएगा?
- गैंग की फंडिंग के पीछे कौन है?
- कॉलेज प्रशासन की जवाबदेही कैसे तय होगी?
- क्या पीड़िताओं को सामाजिक बदनामी के डर के बिना इंसाफ मिल पाएगा?
महिला आयोग की टीम अगले तीन दिनों में अपनी जांच पूरी करेगी और एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। इस बीच, भोपाल पुलिस ने कॉलेज परिसरों में सुरक्षा बढ़ा दी है और अन्य संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी शुरू कर दी है।












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