मोटर और ब्रेकिंग सिस्टम से लैस है ये स्मार्ट ठेला, इंजीनियरिंग छात्रों ने स्ट्रीट वेंडर्स के लिए किया तैयार

भोपाल के इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने एक ऐसा ठेला बनाया है, जिसे बिना किसी मेहनत के किसी भी ढलान, गड्ढों पर चलाया और कंट्रोल किया जा सकता है।

भोपाल, 7 सितंबर। राजधानी में संचालित इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने एक ऐसा ठेला बनाया है, जिसे बिना किसी मेहनत के किसी भी ढलान, गड्ढों पर चलाया और कंट्रोल किया जा सकता है। मैकेनिकल ब्रांच के छात्रों का कहना है कि कई बार बुजुर्ग सामान से भरा ठेला खींचते हुए देखा। इसके बाद उनके कॉलेज के बाहर एक बुजुर्ग सामान से भरा ठेला चिलचिलाती धूप में खींच रहा था उसे देखकर वह छात्र भावुक हो गए। जिसके बाद उनके मन में विचार आया कि क्यों ना एक ठेला बनाया जाए, जिससे स्ट्रीट वेंडर को कम दामों पर एक बढ़िया स्मार्ट ठेला मिल जाए।

स्मार्ट ठेले की मदद से ₹75000 का अवार्ड जीत चुके है स्टूडेंट्स

स्मार्ट ठेले की मदद से ₹75000 का अवार्ड जीत चुके है स्टूडेंट्स

भोपाल के सिस्टेक कॉलेज में पढ़ने वाले मैकेनिकल ब्रांच के छात्रों ने (हाइब्रिड पुश कार्ट) स्मार्ट ठेला बनाया है। जिसे बिना मेहनत किसी भी ढलान गड्ढों पर चढ़ाया और कंट्रोल किया जा सकता है। स्मार्ट ठेले की मदद से स्टूडेंट्स ₹75000 का अवार्ड जीत चुके हैं। हाल ही में स्टूडेंट्स ने पुणे में आयोजित स्मार्ट इंडिया हेकथौन में पार्टिसिपेट कर हाइब्रिड पुशकार्ट को प्रजेंट किया था।

बता दें कि मेकेनिकल ब्रांच से फाइनल ईयर के 3 छात्रों और सेकंड ईयर की एक छात्रा ने मिलकर इस कार्ट को तैयार किया है। फाइनल ईयर की स्टूडेंट उत्तम कुमार यादव अभिषेक विश्वकर्मा और कांता प्रजापति वही सेकंड ईयर की ज्योति सिंह ने कार्ट यानी स्मार्ट ठेले को बनाया है।

कैसे आया आईडिया

कैसे आया आईडिया

छात्रों का कहना है कि उन्होंने कई बार कॉलेज के पास स्ट्रीट वेंडर्स को देखा। जिन्हें कई किलो का वजन लेकर ठेला धकेलना पड़ता है। इतना ही नहीं कुछ स्ट्रीट वेंडर्स तो बिना हाथ ठेले के ही शरीर पर सामान लाथ कर चलते हैं। इसी परेशानी को देखते हुए उनके दिमाग में यह आइडिया आया और उन्होंने हाइब्रिड पुशकार्ट यानी स्मार्ट ठेले को बनाया।

कार्ट को हाइब्रिड मॉडल मनाते हुए तीन सिस्टम के साथ तैयार किया। मोटर सिस्टम, ब्रेकिंग सिस्टम, टर्निंग सिस्टम। छात्रों ने बताया कि उन्होंने यह मॉडल 6 महीने में तैयार किया है उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स कार्ट मार्केट में अवेलेबल कार्ट बहुत महंगे होते हैं। इसलिए उन्होंने इस मॉडल को ज्यादा फीचर के साथ सस्ते दामों पर बनाया है स्टूडेंट्स को हाइब्रिड पूछ कार्ड बनाने में मात्र ₹40 हजार का खर्चा आया।

स्टियरिंग लगाने की भी की जा कोशिश

स्टियरिंग लगाने की भी की जा कोशिश

छात्रों द्वारा स्मार्ट ठेले में स्टीयरिंग लगाने की भी कोशिश की जा रही है। जिससे ठेले वालों को परेशानी कम हो। वह आसानी से इसको टर्न कर सके। इसके अलावा छात्र स्पीड भी ऐड करेंगे। हेविवेट को देखते हुए छात्रों ने कार्ड में मोटर सिस्टम भी लगाया है। इसके अलावा उसकी स्पीड बढ़ाई जाने पर भी विचार किया जा रहा है। और इसके लिए छात्र इसमें सोलर पैनल का भी ट्राई कर रहे हैं इससे बैटरी बैकअप और बढ़ेगा। ग्रुप ने बताया कि ज्यादातर स्ट्रीट वेंडर धूप में रहते हैं तो यह बेहतर ऑप्शन है।

स्मार्ट ठेले में ब्रेकिंग सिस्टम भी लगाया गया

स्मार्ट ठेले में ब्रेकिंग सिस्टम भी लगाया गया

छात्रों ने बताया कि कार्ट को रोकने के लिए लिवर एंड गियर मेकैनिज्म के साथ ब्रेकिंग सिस्टम भी लगाया गया है। ब्रेक के कारण आसानी से किसी भी ढलान पर कार्ट को रोका जा सकता है। जिससे स्ट्रीट वेंडर को सामान ले जाने में दिक्कत ना हो। इसके अलावा मोटर सिस्टम की मदद से इस स्मार्ट ठेले को स्कूटी के एक्सीलेटर की तरह चलाया जा सकता है।

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