मिशनरी स्कूल में बच्चों के माथे से टीका मिटाया, हाथ से रक्षासूत्र उतरवाए, परिजनों और हिंदू संगठन ने किया विरोध
बैतूल के सेंट थॉमस स्कूल में हिंदू धर्म से जुड़े बच्चों को टीका लगाने व रक्षा सूत्र बांधने पर प्रतिबंध था। जैसे इसकी जानकारी हिंदू संगठन को मिली,उन्होंने जमकर हंगामा किया। स्कूल प्रबंधन ने माफी मांगते हुए इसे हटा दिया।

मध्य प्रदेश में इन दिनों धर्मांतरण और धर्म के नाम पर लोगों को बरगलाने के मुद्दे कम नहीं हो रहे। प्रदेश में लगातार लव जिहाद के मामले में सामने आते रहते हैं। ऐसे में प्रदेश में धर्म को लेकर सियासत गरमाई हुई है। सरकार ने धर्मांतरण के मुद्दे पर कानून भी बना दिया। वैसे तो भारत में सभी धर्मों के अनुयायियों को अपनी मान्यता और परंपरा के अनुसार धार्मिक कर्मकांड करने की स्वतंत्रता है, लेकिन इसके बावजूद कहीं-कहीं स्वतंत्रता का हनन किया जाता है। ताजा मामला बैतूल के मिशनरी स्कूल का है। जहां बच्चों के माथे पर टीका लगाकर स्कूल आना और हाथ में रक्षा सूत्र बांधकर आने पर प्रतिबंध लगा हुआ था। स्कूल के बच्चों के माथे पर लगा टीका मिटाने के साथ उनके हाथ में बंधे रक्षा सूत्र उतरवाने के मामले में हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। स्कूल में हंगामा करने के बाद स्कूल प्रबंधन ने लिखित में माफी मांग कर स्कूल में लगाए गए प्रतिबंध को त्रुटि मानते हुए हटा दिया है।

स्कूल प्रबंधन ने लिखित में माफी मांगी
बैतूल के आमला में स्थित सेंट थॉमस मिशन हाई सेकेंडरी स्कूल में मंगलवार को माथे पर टीका लगाकर स्कूल आए बच्चे का टीका मिटाने की जानकारी परिजनों को मिली। इसके बाद परिजन और कुछ हिंदू संगठन स्कूल पहुंचे और उन्होंने इसका विरोध किया। हिंदू संगठन के युवाओं ने हंगामा किया। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने भी अपनी सफाई दी। इसके बाद ये मामला शांत हुआ। स्कूल में माथे पर टीका लगाना और हाथ में रक्षासूत्र बांधने के प्रतिबंधित पर स्कूल प्रबंधन ने लिखित में माफी मांगी। बताया जा रहा है कि स्कूल प्रबंधन ने प्रतिबंध को त्रुटि बताकर भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति ना होने का आश्वासन दिया।
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हिंदू संगठनों ने स्कूल शिक्षा विभाग से की शिकायत
हिंदू संगठनों ने इसकी शिकायत स्कूल शिक्षा विभाग को भी की है। उनका कहना है कि पिछले 4 माह से लगातार शिकायत आ रही थी कि स्कूल में जो बच्चे माथे पर टीका लगाकर आते हैं उनके टीके मिटा दिए जाते हैं और जो बच्चे हाथ में रक्षा सूत्र बांधकर आते हैं वह भी उतरवा लिए जाते हैं। इस मामले में शिक्षा विभाग ने जांच के लिए टीम गठित की है और पूरे मामले की जांच करवाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो तथ्य आएंगे उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

स्कूल की प्रिंसिपल ने दी सफाई
आमला के सेंट थॉमस मिशन हाई सेकेंडरी स्कूल में माथे पर टीका लगाकर स्कूल आए बच्चे का टीका मिटाने के मामले में परिजनों और कुछ हिंदू संगठनों ने जमकर बवाल किया। इस मामले में सेंट थॉमस मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल का कहना है कि स्कूल में जो बच्चे फैंसी तिलक लगाकर आते हैं उनका मिटाया जाता है।

स्वच्छता से धर्म परिवर्तन करने का अधिकार
एमपी में आम नागरिकों को स्वच्छता से धर्म परिवर्तन करने का अधिकार होगा। इसके लिए राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता नियम बनाकर लागू कर दिए हैं। जो भी व्यक्ति धर्म परिवर्तन करना चाहता है, उसे धर्म परिवर्तन के लिए उस जिले के जिला मजिस्ट्रेट को 60 दिन पहले सूचित करना होगा। इसके लिए उसे एक विधिवत घोषणा पत्र भरकर देना होगा। यदि कोई धर्माचार्य और कोई अन्य व्यक्ति जो धर्म परिवर्तन का आयोजन करना चाहता है तो उसे भी जिले के मजिस्ट्रेट को जहां ऐसा धर्म परिवर्तन संस्कार आयोजित किया जाना प्रस्तावित है ऐसे आयोजन से 60 दिन पहले उसकी सूचना देनी होगी। जिला मजिस्ट्रेट को इस घोषणा, सूचना घोषणाकर्ता अथवा सूचनाकर्ता व्यक्ति द्वारा स्वयं पहुंच कर दी जाएगी अथवा रजिस्ट्री कृत डाक से या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दी जा सकेगी। जिला मजिस्ट्रेट घोषणा या सूचना प्राप्त होने पर इसकी पावती भी देगा। जिला मजिस्ट्रेट प्राप्त की गई घोषणा, सूचनाओं एवं जारी अभियोजन स्वीकृति की एक रिपोर्ट हर माह की 10 तारीख तक राज्य सरकार को भेजेगा।

धर्मांतरण कराने वालों को भी देनी होगी जानकारी
जो धर्माचार्य धर्मांतरण कर आएगा उसे भी जिला मजिस्ट्रेट को धर्म परिवर्तन के लिए मिलने वाली सूचना की पूरी जानकारी देना होगी। इसमें धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति उसके माता-पिता, आयु, पता, अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग की स्थिति में जाति का पूरा ब्यौरा देना होगा। धर्म परिवर्तन के लिए आयोजन स्थल, धर्माचार्य का नाम, योग्यता और पूरा पता देना होगा। इसके बाद जिला मजिस्ट्रेट इसकी पार्टी देंगे।












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