बागेश्वर धाम सरकार के बाबा को कांग्रेस ने घेरा, गोविंद सिंह ने कहा- मुझे पाखंड और ढोंग पर भरोसा नहीं
बागेश्वर धाम विवाद को लेकर मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने बड़ा बयान दिया है उन्होंने कहा कि मैं पाखंड और ढोंग में नहीं पड़ना चाहता। सनातन धर्म आस्था का बिंदु है।

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के विवाद में अब मध्य प्रदेश के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भी एंट्री हो गई है। छतरपुर में स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर गोविंद सिंह ने कहा कि जब बागेश्वर सरकार पर आरोप लगे तो, वे अपना बिस्तर लेकर क्यों भागे। यदि उनके पास चमत्कारी शक्तियां हैं तो उन्हें प्रमाणित करें। बता दे नागपुर की जादू टोना विरोधी नियम जनजागृति प्रचार-प्रसार समिति ने बाबा को चैलेंज दिया था। समिति के अध्यक्ष का आरोप था कि उनके चैलेंज करने के बाद बाबा नागपुर से अपना बोरिया बिस्तर लेकर भाग गए थे। जिसके बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने रायपुर में चैलेंज को लेकर जवाब दिया। इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर कुछ लोग इसके समर्थन में, तो कुछ इसके खिलाफ पोस्ट कर रहे हैं। इसी विवाद में अब कांग्रेस नेता गोविंद सिंह ने बाबा को भेजना शुरू कर दिया है।

नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने बाबा को घेरा
नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने कहा कि वे हिंदू धर्म और सनातन धर्म में विश्वास करते हैं, लेकिन पाखंड और ढोंग में उनका भरोसा नहीं है। देश में हिंदुओं की बड़ी तादाद है। वे भी पाखंड को ठीक नहीं मानते। जब बाबा को नागपुर की श्रद्धा उन्मूलन समिति ने शक्तियां प्रमाणित करने की चुनौती दी, तो वे वहां से क्यों भाग गए। अगर उनमें सच्चाई है तो जवाब दे। प्रमाणिकता के आधार पर जवाब दें।

क्या है पूरा मामला
बता दे बागेश्वर धाम के फेमस पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पिछले दिनों नागपुर गए थे। जहां उन्होंने अपना दिव्य दरबार लगाया था इसे लेकर अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक और नागपुर की जादू टोना विरोधी नियम जनजागृति प्रचार प्रसार समिति के अध्यक्ष श्याम मानव ने पुलिस को शिकायत की थी। इसके बाद उनकी शिकायत सोशल मीडिया पर बाबा के खिलाफ प्रचारित की जा रही थी। मीडिया से चर्चा के दौरान श्यामा राम ने बताया कि नागपुर में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा 5 से 13 जनवरी तक चलनी थी आमंत्रण पत्र और पोस्टर में भी 13 जनवरी तक कथा का जिक्र था। लेकिन महाराज पूरी कथा करने के 2 दिन पहले ही नागपुर से चले गए। श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दरबार को डर का दरबार बताया और कार्रवाई की मांग की। उन्होंने बताया कि दिव्य दरबार में धीरेंद्र शास्त्री भक्तों के नाम और नंबर से लेकर कई चीजे बताने का दावा करते हैं। हमने उनके एक ऐसे वीडियो को देखा, जिसमें ऐसे दावों को सिद्ध करने को कहा गया था। इसके बाद हमने उन्हें चुनौती दी लेकिन, वे नागपुर से चले गए।

पत्रकारों को बुलाकर दिखाई सिद्धि
आज बागेश्वर धाम के महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने रायपुर में चल रही कथा के दौरान पत्रकारों को बुलाया और कहा कि आज वह ऐसा कुछ कर दिखाएंगे, जिसके बाद अंधविश्वास नहीं कहा जाएगा। उन्होंने एबीपी न्यूज के रिपोर्टर ज्ञानेंद्र तिवारी को बुलाया और कहा कि आप हमारे चाचा का नाम बता सकते हो क्या? इसके बाद धीरेंद्र शास्त्री ने तिवारी के चाचा का नाम बता दिया। इतना ही नहीं, बाबा ने उनकी भतीजी भी नाम बता दिया। ग्रैंड कृष्ण शास्त्री ने कहा कि आज उन्होंने अपने गुरु से आज्ञा ली थी कि आज वे सनातन का झंडा गाड़ेंगे। इसके बाद ही रायपुर में चल रही कथा में कई बड़े चैनलों के पत्रकार कवरेज करने पहुंचे थे।

हमारे पास चमत्कार नहीं : धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
इससे पहले रायपुर में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा था कि श्याम मानव को भगवान की शक्ति का अनुभव करना है, तो रायपुर में आइए। आगे दरबार बागेश्वर धाम में लगेगा वहां आइए। भारत देश में चादर चढ़ना श्रद्धा है, लेकिन बालाजी का नाम बताना या उनके नाम से लोगों को जोड़ना अंधश्रद्धा है। यहां कैंडल जलाना श्रद्धा है लेकिन कोई बीमार, परेशान व्यक्ति को हनुमान जी के नाम से जोड़ा जाए, वह अंधश्रद्धा है। इतना खोखलापन आप लाते कहा से हैं। हमने ये तो नहीं कहा कि हम इश्वर हैं। हमारे पास चमत्कार है। हम यह भी नहीं कहते कि हम तो सिर्फ साधक है। गुरु को ध्यान करके जो प्रेरणा मिलती है वह हम बता देते हैं।

₹30 लाख का नाम देती समिति
बता दे श्याम मानव की समिति ने अपने 10 लोगों को धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सामने लेकर जाने को कहा था। धीरेंद्र शास्त्री को समिति के इन 10 लोगों के बारे में अपने अंतर ज्ञान से ये बताना था। जिसमें उनका नाम, नंबर, उम्र और उनके पिता का नाम बताना था। इसे दो बार रिपीट करते या यदि वे 90% रिजल्ट भी देते तो समिति उन्हें ₹30 लाख का नाम देती। हालांकि इसके लिए उन्हें ₹3 लाख डिपाजिट करना होता। समिति अध्यक्ष के मुताबिक उन्होंने चुनौती नहीं स्वीकार की और पहले ही नागपुर से रवाना हो गए।












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