घोटाले के खिलाफ मुंह बंद रखने के लिए तो नहीं अधिकारियों को प्रमोशन!

आपको बता दें कि दिल्ली ऐसा राज्य हैं जहां पर जाने के लिए लगभग सभी अधिकारियों की ओर से सबसे ज्यादा मांग होती है। ऐसे शहरों पर मंत्री हो अधिकारी सभी उच्च स्तरीय पदाधिकारी जाने के लिए लाखों जतन करते हैं। 24 कलक्टरों और संभाग आयुक्तों सहित 76 अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। विश्लेषक मान रहे हैं कि हो न हो यह कदम दो हजार करोड़ के व्यापमं घोटाले को देखते हुए भी भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सोची समझी रणनीति हो सकती है।
घोटाले की जांच पर पड़ेगा असर
इस घोटाले की चपेट में एक लाख से ज्यादा युवाओं की नियुक्तियां आई हैं। व्यवसायिक परीक्षा मंडल के तहत राज्य में विभिन्न स्तर पर भर्ती के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित हुईं थीं। वर्ष 2006 में पहली एफआईआर दर्ज होने के बाद यह घोटाले की एक परत खुली। जिसके बाद इसी साल यह खुलासा होने के साथ ही राज्य विधानसभा में भाजपा सरकार ने भी मान लिया था कि हां घोटाला हुआ है।
हो सकता है कि जिन अधिकारियों के ट्रांसफर किए गए हैं और जिनके प्रमोशन किए गए हैं उन्हें महत्वपूर्ण जानकारी पता हो जिससे घोटाले की और भी परते खुल सकती हों। और इसके पीछे यह भी डर हो सकता है कि कोई अधिकारी व्हिसल ब्लोअर न बन जाए। यानी कोई अधिकारी राज न खोल दे। हो न हो इससे टीम की ओर से की जा रही जांच पर असर पड़ सकता है।
यह है सवाल
व्यापमं घोटाला प्रशासनिक स्तर पर हुआ एक बड़ा घोटाला है। इसमें करीब दो हजार करोड़ रुपए का हेरफेर हुआ है। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों, व्यवसायिकों और मंत्रियों के नाम आ रहे हैं। इस पर अभी गंभीर जांच भी चल रही है। गौरतलब है कि ऐसे में नियमानुसार कैसे तबादले और प्रमोशन किए जा सकते हैं। जबकि जांच अभी अधर में है।












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