किसान और ममता के कैच आउट होने से 2024 की ट्रॉफी भी उठाएंगे मोदी ?
किसान और ममता के कैच आउट होने से 2024 की ट्रॉफी भी उठाएंगे मोदी ?
नई दिल्ली। राजनीति और क्रिकेट के खेल में बहुत समानता है। क्रिकेट के खेल में कभी-कभी कोई बल्लेबाज गेंदबाज की काबिलियत से नहीं बल्कि अपनी गलतियों से आउट होता है। उसका शॉट सेलेक्शन गलत होता है। वह साधारण गेंद को भी हवा में खेल कर गेंदबाज को तोहफे में विकेट दे जाता है। भारत की राजनीति में भी कुछ यही खेल हो रहा है। किसान आंदोलन की जमी हुई पारी एक गलत फैसले से बिखर गयी। किसानों की टीम के बल्लेबाज गलत शॉट(हिंसा और लाल किले पर चढ़ाई) खेल कर मुफ्त में अपना विकेट (आंदोलन) गवां बैठे। इसी तरह ममता बनर्जी अपनी ही स्ट्रेट ड्राइव पर रन आउट हो गयीं। जय श्रीराम के नारे पर उनकी प्रतिक्रिया ने मोदी का काम आसान कर दिया। कैप्टेन्सी के सवाल पर बंटी हुई कांग्रेस पहले ही मोदी की घुमती हुई गेंदें पर असहज थी। विपक्ष के बल्लेबाज एक-एक कर कैच थमा कर पवेलियन लौट रहे हैं। मोदी को अपनी टीम की खूबियों से अधिक विपक्ष की गलतियों से फायदा मिला। देश में गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई के रहने के बाबजूद नरेन्द्र मोदी की पारी इसलिए जमी हुई दिख रही है क्यों कि विपक्ष धाराशायी है। वैसे भी राम मंदिर, धारा 370 और कोरोना वैक्सीन के ग्लोबल असर ने खेल के मोमेंटम को नरेन्द्र मोदी की तरफ शिफ्ट कर दिया है। इसकी वजह से मोदी और उनकी टीम 2021 और 2024 में अगर 'बेस्ट परफॉर्मर’ साबित हो तो कोई आश्चर्य नहीं।

कोई यूं विकेट गंवाता है क्या ?
किसानों की पारी चेतेश्वकर पुजारा की तरह पिच पर जुटी हुई थी। सरकार यह विकेट लेने के लिए गेंदबाजी में तरह-तरह के प्रयोग कर रही थी। बाउंसर, गुगली सब डाली। लेकिन किसानों की टीम मजबूती से क्रीज पर जुटी हुई थी। लेकिन तभी उनकी एकाग्रता भंग हुई। खेल (आंदोलन) के एथिक्स को तोड़ कर लाल किले की तरफ गेंद को उछालना उनके लिए आत्मघाती साबित हुआ। उनकी हालत उस बल्लेबाजी की तरह हो गयी जो 99 के स्कोर पर अपना विकेट थ्रो कर सिर झुकाये मैदान से बाहर होता है। ऐसे खराब खेल की किसी ने उम्मीद नहीं की थी। 26 जनवरी को सरकार की मुराद बिन मांगे पूरी हो गयी। किसानों की पारी के पतन से नरेन्द्र मोदी और मजबूत हुए। किसानों को मिल रहा अपार जनसमर्थन एक झटके में खत्म हो गया। कल तक जो मुकाबला मोदी के दूर जा रहा था वो अचनाक उनकी तरफ मुड़ गया।

ममता बनर्जी की चूक
जयश्री राम का नारा सुन कर ममता बनर्जी की 'रनिंग बिटविन विकेट' खराब हो जाती है। इसकी वजह से लोकसभा के चुनावी मुकाबले में भी उन्हें नुकसान उठाना पड़ा था। 2021 के विधानसभा मुकाबले पहले उन्होंने फिर एक बार वही गलती दोहरायी है। इस गेंद को वे खामोश रह कर छोड़ सकती थी। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। मई 2019 में ममता बनर्जी एक दिन आरामबाग लोकसभा सीट से चुनाव प्रचार कर लौट रहीं थीं। जब उनका काफिला मेदिनीपुर के चंद्रकोना शहर से गुजर रहा था तो वहां के लोगों ने जय श्रीराम का नारा लगा दिया। ममता बनर्जी की कार का शीशा खुला हुआ था। उनके कानों में ये आवाज पहुंची। गुस्से में लाल ममता ने कार रुकवायी। वे नीचे उतर कर उस तरफ देखने लगीं जिधर से जय श्रीराम की आवाज आयी थी। नारा लगाने वाले लोग भागने लगे। इस पर ममता ने उन्हें ललकारते हुए कहा, अब भागते क्यों हो ? एक मुख्यमंत्री की एक नारे पर इतनी उग्र प्रतिक्रिया देख कर लोग भौंचक्के रह गये। ममता की यह राजनीतिक सोच उनके खिलाफ चली गयी।दो सीटों वाली भाजपा 18 पर पहुंच गयी।

ऐसे रन आउट हुईं ममता
2021 में विधानसभा चुनाव के पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर कोलकाता में भव्य कार्यक्रम था। ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मंच साझा करना था। वे जानती थीं कि जहां मोदी होंगे वहां जय श्रीराम के नारे लगेंगे। नारा लगा भी। ममता ने फिर आपा खो दिया। स्ट्रेट ड्राइव (जयश्री राम पर सीधे नाराज होना) लगा दी। वहां रन नहीं था फिर भी दौड़ पड़ी। नतीजे के तौर पर रन आउट हुईं। इस गेंद को अगर वे छोड़ देतीं तो उनकी पारी को कोई नुकासन नहीं होता। उनके रनआउट (भाषण नहीं देना) होने से 2021 के मुकाबले में भाजपा के लिए उम्मीदें पैदा कर गया है। किसी की नाराजगी मोल लेकर किसी को खुश करना कभी फायदे का सौदा नहीं होता। लेकिन टारगेट को चेज कर रही ममता ने हड़बड़ी में गड़बड़ी कर दी। खेल के जानकारों का कहना है कि ममता ने एक बार फिर अपनी गलती से मैच का रुख मोदी की तरफ मोड़ दिया है।

मोदी की पारी के अहम फैक्टर
धारा 370 की समाप्ति और राम मंदिर निर्माण को नरेन्द्र मोदी की टीम अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानती है। भाजपा का कहना है कि मोदी राज में दो ऐसी जटिल समस्याओं के हल निकाले गये जिन्हें पहले की सरकारें नामुमकिन मानती थीं। कोरोना की वैश्विक महामारी के बीच जिस तेजी से भारत ने इसका टीका इजाद किया है उससे दुनिया भर में उसकी प्रतिष्ठा बढ़ी है। दूसरे मुल्क भी अब भारत की तरफ आशा भरी नजरों से देख रहे हैं। जब कोरोना टीका के लिए चीन ने बांग्लादेश से पैसा मांगा तो उसने भारत की तरफ रुख कर लिया। भारत ने न केवल अपने पड़ोसी देशों की मदद की बल्कि मध्यपूर्व के देश बहरीन को भी कोरोना का टीका दिया। इससे नरेन्द्र मोदी की साख और मजबूत हुई है। भारत में सभी नागरिकों को कोरोना का टीका मुफ्त में दिया जाना है। इसे भी भाजपा का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। विपक्ष की खराब बल्लेबाजी के बीच भाजपा ने अपनी पारी को सजाने की भरपूर कोशिश की है। कुछ दिनों के बाद जब असम और पश्चिम बंगाल में मुकाबले शुरू होंगे तो भाजपा को इसका फायदा मिल सकता है। कांग्रेस का खेमा कप्तानी के सवाल पर बंटा हुआ है। बाकी टीमों के दिग्गज भी धाराशायी हैं। अब ऐसे में अगर नरेन्द्र मोदी 2024 की ट्रॉफी भी अपने नाम कर लें तो कोई अचरज नहीं।












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