13 साल की मासूम को बचाने के लिए 'भगवान' बनी डॉक्टर

बेंगलुरू। 13 साल की मासूम को ऐसी बीमारी हुई कि उसे हमेशा ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत रहने लगी, लेकिन इसका खर्च इतना था कि बच्ची के पिता ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदने की स्थिति में नहीं थे। ऐसी सूरत में एक डॉक्टर ने दया दिखाते हुए बच्ची के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराने का फैसला लिया।

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मासूम के दोनों फेफड़े हुए खराब

जिस उम्र में लड़कियां अपने दोस्त बनाती हैं, उनके साथ खेलती हैं। उस उम्र में 13 साल की मालिनी को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ रहना पड़ रहा है।

दरअसल मालिनी को एक बीमारी की वजह से आक्सीजन सिलेंडर लगाकर रखना पड़ता है क्योंकि उसे कई बार आक्सीजन की ज्यादा मात्रा की जरूरत पड़ जाती है।

बैंगलोर मिरर में छपी खबर के मुताबिक मालिनी की जांच में पाया कि जब वह तीन साल की थी तभी उसे फेफड़ों के बीच में कोई बीमारी हो गई। जांच और इलाज के दौरान उसे बचाने के लिए ऐसे केमिकल्स का इस्तेमाल किया गया कि उसके दोनों फेफड़े खराब हो गए।

इलाज का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं थे बच्ची के पिता

कुछ महीने पहले तक बच्ची के पिता उसके लिए ऑक्सीजन संकेन्द्रक की व्यवस्था करते रहे। उनके पिता चिन्नारेदप्पा डॉक्टर भरत रेड्डी के पास पहुंचे। डॉक्टर भरत रेड्डी ही बच्ची का इलाज कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि मालिनी के लिए हर महीने आने वाला सिलेंडर चार हजार का पड़ता है। जिससे उनके घर के आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। इसलिए उन्होंने डॉक्टर से इलाज रोकने के लिए कहा।

उन्होंने कहा कि उनके घर में 6 सदस्य हैं और कमाने वाले वो अकेले हैं। इसलिए बच्ची के लिए आगे वो सिलेंडर की व्यवस्था नहीं कर सकते हैं।

इलाज कर रहे डॉक्टर ने सोशल मीडिया को बनाया जरिया

मालिनी के पिता एक कपड़ा फैक्ट्री में श्रमिक हैं। बच्चों के डॉक्टर भरत रेड्डी ने उनको बताया कि ये सही कदम नहीं होगा। बिना ऑक्सीजन के मालिनी एक कदम भी नहीं चल सकती।

डॉक्टर भरत रेड्डी ने कहा कि मैंने इस मामले को सोशल मीडिया के जरिए दूसरे लोगों तक पहुंचाने की सोची। मेरे संदेश का असर हुआ और मैसूर के एक डॉक्टर ने मालिनी की सहायता करने का फैसला लिया।

अब करीब 4 महीने बीच चुके हैं डॉक्टर माधुरी मूर्ति मालिनी के ऑक्सीजन सिलेंडर का खर्च उठा रही हैं। हालांकि वह कभी भी इस बच्ची से मिली नहीं हैं बावजूद इसके उसकी हरसंभव सहयोग में देरी नहीं करती हैं।

बता दें कि डॉक्टर माधुरी मूर्ति प्रसूतिशास्री (गाइनाकोलॉजिस्ट) हैं और मैसूर के जेएसएस अस्पताल में प्रैक्टिस कर रही है। उन्होंने बताया कि मैंने कई ऐसे मामले देखें हैं लेकिन इस बच्ची का मामले मुझे लगा कि उसकी सांस की कीमत महज पांच हजार है। ऐसे में उसकी सहायता जरूर करनी चाहिए।

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