दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बेंगलुरु की बच्ची ने जीती नोवार्टिस की लॉटरी, अब 16 करोड़ का इंजेक्शन मिलेगा मुफ्त
बेंगलुरु के निवासी नंदगोपाल और उनकी पत्नी भावना के एक 11 साल की बेटी है, जो एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है और इसकी दवा की कीमत 16 करोड़ रुपए है।
बेंगलुरु, 21 दिसंबर। दोस्तों, भगवान जब देता है तो छप्पड़ फाड़ के देता है और इसका ताजा उदाहरण सामने आया है बेंगलुरु से। दरअसल बेंगलुरु के निवासी नंदगोपाल और उनकी पत्नी भावना के एक 11 साल की बेटी है। उनकी 11 साल की बेटी दिया एक आनुवंशिक बीमारी टाइप 2 स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से पीड़ित है। इस बीमारी का इलाज इतना महंगा है कि वो यदि अपनी सारी संपत्ति भी बेच देते तो भी अपनी बेटी के इलाज के लिए पैसे नहीं जुटा पाते। लेकिन बेटी का इलाज तो कराना ही था, इसके लिए उन्होंने क्राउडफंडिंग सहित हर संभव उपाय तलाशने शुरू किये। लेकिन उन्हें क्या पता था कि भगवान उन पर इतनी जल्दी मेहरबान हो जाएगा।

एक कॉल ने बदल दी दिव्या और उसके परिवार की किस्मत
18 नवंबर को उन्हें अचानक एक फोन आया। फोन पर उन्हें बताया गया कि उनकी बेटी दिव्या ने नोवार्टिस 'लॉटरी' जीत ली है और अब टाइप 2 स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के इलाज में सहायक Zolgensma नामक इंजेक्शन एकदम फ्री मिलेगा। यह खबर सुनते ही दिव्या के माता पिता के होश उड़ गए। पहली बार तो उन्हें इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ।

16 करोड़ रुपए है Zolgensma की कीमत
बता दें कि दिव्या की बीमारी का इलाज केवल Zolgensma इंजेक्शन से हो सकता है। इस इंजेक्शन की कीमत 16 करोड़ रुपए हैं। यानि अगर किसी व्यक्ति को ये बीमारी हो जाए तो उसकी पूरे जीवन भर की जमा पूंजी भी उसका इलाज कराने के लिए कम पड़ सकती है, लेकिन दिव्या को अब यह इंजेक्शन एकदम मुफ्त में मिलेगा। आपको बता दें नोवार्टिस कंपनी द्वारा दिव्या को यह इंजेक्शन प्राप्त हो चुका है। नोवार्टिस कंपनी the global Managed Access Program (MAP) नाम से एक कार्यक्रम चलाती है। जिसके माध्यम से कंपनी हर साल दुनियाभर के 100 बच्चों का चयन कर उन्हें मुफ्त दवा उपलब्ध कराती है।

इंजेक्शन लगने के बाद दिव्या में दिखने लगा बदलाव
दिव्या जब सात महीने की थी तब उन्हें इस बीमारी का पता चला था। इस इंजेक्शन की खास बात ये है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चे को ही यह इंजेक्शन लगाया जा सकता है, इससे अधिक उम्र होने पर यह असर नहीं करता। हालांकि जैसी ही दिव्या के माता पिता को उनकी इस बीमारी का पता चला उन्होंने तुरंत क्राउडफंडिंग शुरू कर दी। यही नहीं उन्होंने इसके जरिए 2.7 करोड़ रुपए भी जुटा लिए थे। बता दें कि बेंगलुरु का Baptist Hospital देश का एकमात्र ऐसा अस्पताल हैं जहां इस बीमारी का इलाज होता है। यहीं पर दिव्या को यह इंजेक्शन दिया गया। दिव्या के माता-पिता ने कहा कि अब उनकी बेटी में कुछ बदलाव दिखने शुरू हो गए हैं।












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