UP News: फर्जी दस्तावेज बनाकर बेची गई पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह की ज़मीन, पुलिस जांच में जुटी
UP News: उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले में जालसाजों ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की जमीन पर कब्जा कर लिया और कथित तौर पर उसे बेच भी दिया। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। यह मामला बीते कुछ दिनों से सुर्खियों में बना हुआ है।
बताया जा रहा है कि दिग्विजय सिंह की जमीन की देखभाल करने वाले अनिल यादव ने जिलाधिकारी, उप-जिलाधिकारी और पुलिस के पास इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना है कि जब जमीन पर अवैध निर्माण कार्य शुरूहोने के बाद उन्हें इस धोखाधड़ी का पता चला।

दरअसल, अंबेडकरनगर जिले की आलापुर तहसील के राम नगर महुवर गांव में स्थित 0.152 हेक्टेयर जमीन (प्लॉट संख्या 1335) दिग्विजय सिंह के नाम पर दर्ज है। हालांकि, जालसाजों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर इसे तीसरे पक्ष को बेच दिया। जिससे प्रशासन और स्थानीय लोगों में हलचल मच गई।
जमीन बेचने की साजिश कैसे रची गई?
प्रशासनिक जांच में पता चला है कि यह जमीन पहले दिग्विजय सिंह की मां अपर्णा कुमारी के नाम पर थी। उनकी मृत्यु 18 फरवरी 1986 को हुई, जिसके बाद दिग्विजय सिंह ने वरासत के लिए आवेदन किया। 18 मई 2024 को यह जमीन आधिकारिक रूप से उनके नाम पर पंजीकृत हो गई।
शिकायतकर्ता अनिल यादव के मुताबिक, आलापुर तहसील के केवटला गांव निवासी राम हरक चौहान ने 1989 में खुद को दिग्विजय सिंह बताकर सेवानिवृत्त अपर पुलिस अधीक्षक जियालाल और अन्य लोगों को जमीन बेच दी। इस फर्जी सौदे में राम नगर महुवर गांव के रहने वाले राजबहादुर और मंगली भी शामिल थे।
प्रशासन ने निर्माण कार्य पर लगाई रोक
शुक्रवार को खरीदारों के परिवार के सदस्यों ने जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया, जिसके बाद अनिल यादव ने इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। अधिकारियों ने तत्काल निर्माण कार्य पर रोक लगा दी और भूमि रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है।
कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेजों में हेरफेर
राजस्व विभाग के सूत्रों के अनुसार, तीन लोगों ने इस जमीन को बिक्री विलेख के माध्यम से खरीदा था, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में इसका दाखिल खारिज नहीं कराया गया था। दिग्विजय सिंह ने कानूनी प्रक्रिया के तहत 2024 में इसे अपने नाम पर ट्रांसफर करवाया था।
यह भी बता दें कि दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं। उनकी पैतृक जमीन पर कब्जा करने और फिर इसे बेचने की घटना ने प्रशासन को भी चौंका दिया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि इस धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अगर इसमें सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता पाई जाती है, तो उन पर भी कार्रवाई होगी।












Click it and Unblock the Notifications