कौन हैं अरविंद कुमार त्रिपाठी? जिनकी लीडरशिप में होगी डॉन ब्रदर्स Atiq-Ashraf हत्याकांड की जांच
डॉन ब्रदर्स अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ हत्या कांड की जांच रिटायर्ड जज अरविंद्र कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता वाली कमेटी द्वारा की जाएगी। आइए जानते है कौन हैं अरविंद कुमार त्रिपाठी?

Arvind Kumar Tripathi: प्रयागराज में डॉन ब्रदर्स अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की 15 अप्रैल की देर रात पुलिस कस्टडी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड की जांच के लिए प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने तीन सदस्यीज जांच आयोग का गठन किया है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर गृह विभाग ने जो जांच कमेटी गठित की है, उसके अध्यक्षता इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज अरविंद कुमार त्रिपाठी करेंगे। वहीं, इस संपूर्ण हत्याकांड की विस्तृत जांच रिपोर्ट दो महीने में योगी सरकार को देंगे। आइए जानते हैं अरविंद कुमार सिंह के बारें में...
अरविंद कुमार त्रिपाठी ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित जीवाजी यूनिवर्सिटी से साल 1973 में कानून की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद 1974 में अरविंद त्रिपाठी ने वकालत की प्रैक्टिस शुरू की। वकालत की प्रैक्टिस करते हुए साल 1978 से 1996 तक वह उच्च न्यायिक सेवा में भी रहे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2007 में अरविंद कुमार त्रिपाठी का प्रमोशन जिला-सत्र न्यायाधीश के रूप में हुआ। 17 अप्रैल, 2012 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अतिरिक्त जज के रूप में पदोन्नत हुए। इसके बाद 06 अगस्त 2013 में स्थायी जज बन गए और इलाहाबाद हाई कोर्ट में आठ जनवरी 2015 तक न्यायमूर्ति के रूप में कार्यरत रहे।
बता दें, अरविंद कुमार त्रिपाठी अब रिटायर्ड हो चुके है। लेकिन, उनकी अध्यक्षता में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ हत्याकांड की जांच होगी। इस जांच में उनके साथ सेवानिवृत्त IPS अधिकारी सुबेश कुमार सिंह और सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार सोनी भी शामिल हैं।
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बृजेश कुमार सोनी, सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश हैं और वो प्रदेश में अपर विधि परामर्शी तथा अपर जिला जज भी रहे हैं। इससे पहले सरकार ने उनको अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की पांच सदस्यीय कमेटी में रखा था। इस आयोग ने निकाय चुनाव में ओबीसी वर्ग को आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
बता दें कि उस रिपोर्ट के आधार पर ही प्रदेश की योगी सरकार ने सरकार निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण निर्धारित किया है। इस जांच आयोग में 1984 में IPS बने और अपराध शाखा से सेवानिवृत सुबेश कुमार सिंह भी शामिल हैं।












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