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दुनिया को अलविदा कह गईं सुषमा स्वराज लेकिन उनकी वो ख्वाहिश जो रह गई अधूरी

प्रयागराज/इलाहाबाद। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद ट्विटर पर आखिरी संदेश में अपनी इच्छा जाहिर करने वालीं सुषमा स्वराज की एक ख्वाहिश थी जो उनके जिंदा रहते पूरी नहीं हो सकी। वह अपनी यह ख्वाहिश कई बार जाहिर भी कर चुकी थीं और इसे पूरा करने के लिये लगभग पूरे प्रयास भी हुए थे लेकिन, आखिरी क्षणों में उनकी एक धार्मिक ख्वाहिश अधूरी रह गई।

कुंभ नहीं आ सकीं सुषमा

कुंभ नहीं आ सकीं सुषमा

दरअसल उनकी यह ख्वाहिश धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है। सनातन संस्कृति में अगाध आस्था के कारण सुषमा स्वराज का लगाव संगम नगरी से भी रहा और वह यहां आयोजित हुए कुंभ मेले में भी शामिल होना चाहती थीं। लेकिन, कुछ परिस्थितियां ऐसी बनी कि वह यहां ना आ सकीं।

अधूरी रही कुंभ में आने की ख्वाहिश

अधूरी रही कुंभ में आने की ख्वाहिश

प्रयागराज में संपन्न हुए कुंभ मेले के दौरान दुनियाभर के देशों से उनके प्रतिनिधि और मुखिया के जब प्रयागराज आने का कार्यक्रम तय हुआ तब सुषमा स्वराज का भी प्रयागराज के कुंभ में आने का कार्यक्रम बना था। लेकिन, आखिरी क्षणों में सुषमा का कार्यक्रम रद्द हो गया और वीके सिंह की अगुवाई में विदेशी प्रतिनिधियों का स्वागत व आगमन हुआ। इसके बाद जब प्रवासी भारतीयों के कुंभ में आने की रूप रेखा तैयार हुई तो एक बार फिर से सुषमा का कार्यक्रम संगम नगरी के लिये तय हुआ लेकिन, इस बार भी बिल्कुल आखिरी क्षणों में वह संगम नगरी नहीं आ सकीं।

बार-बार आने का कार्यक्रम हुआ रद्द

बार-बार आने का कार्यक्रम हुआ रद्द

यही क्रम मौनी अमावस्या पर दोहराया गया लेकिन, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कुंभ मेले में शिरकत करने व पूरी दुनिया को संदेश देने का आधिकारिक कार्यक्रम घोषित हुआ, तब यह पूरी तरह से तय हो गया था कि इस बार सुषमा स्वराज कुंभ मेले में जरूर आएंगी। लेकिन, उनकी इच्छा उस समय भी पूरी नहीं हुई और बतौर विदेश मंत्री उनकी कुंभ में आने की ख्वाहिश अधूरी रह गई।

विदेशों में दिया कुंभ आने का निमंत्रण

विदेशों में दिया कुंभ आने का निमंत्रण

कुंभ की विश्वस्तरीय ब्रांडिंग में जितना श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया जाता है। उसी तरह का श्रेय सुषमा स्वराज के हिस्से में भी था। वह विदेशों में अपने समकक्षों को न सिर्फ कुंभ आने के लिये प्रेरित करती रहीं, बल्कि कुंभ के दौरान निमंत्रण भी देती रहीं। हालांकि 2011 के कुंभ मेले में वह प्रयागराज आई थीं। उस समय न तो वह विदेश मंत्री थीं और न ही कुंभ का ऐसा भव्य आयोजन था। अपने कार्यकाल में आयोजित दिव्य और भव्य कुंभ की चर्चा जब पूरी दुनिया में हो रही थी, जब विदेशों से बड़ी संख्या में लोग आये तब सुषमा की भी इच्छा थी कि वह प्रयागराज आएं। लेकिन, भाजपा की लगभग सभी बड़ी हस्तियों के प्रयागराज कुंभ स्नान की हसरत तो पूरी हुई लेकिन, लोकप्रिय नेता सुषमा की ख्वाहिश अधूरी ही रह गई।

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