इलाहाबाद सीट पर कांग्रेसियों के लिए बढ़ी चिंता, रीता बहुगुणा जोशी के समर्थन में कई बड़े नेता छोड़ सकते हैं कांग्रेस

प्रयागराज। कभी कांग्रेस से पारंपरिक तौर पर जुड़े बहुगुणा परिवार की बढ़ती दूरिया कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं। इलाहाबाद संसदीय सीट से बहुगुणा फैमली फिर से कांग्रेस की मुश्किल बढ़ाने वाली हैं। दरअसल रीता जोशी के भाजपा द्वारा उम्मीदवार बनाये जाने के बाद इतनी तेजी से समीकरण बदले हैं कि दर्जनों बड़े कांग्रेसी कांग्रेस का हाथ छोडने वाले हैं। रीता जोशी की मौजूदगी में एक दर्जन से अधिक नेता भाजपा की सदस्यता लेने के लिये तैयार हैं और उनके साथ समर्थकों की बड़ी संख्या भी बीजेपी के लिए राह आसान करेंगी।

कांग्रेस छोड़ सकते है पार्टी!

कांग्रेस छोड़ सकते है पार्टी!

गौरतलब है कि कांग्रेस को इलाहाबाद में जीवंत रखने वाले हेमवतीनंद बहुगुणा के परिवार का जुडाव शुरू से पारंपरिक तौर पर बीजेपी से रहा है। लेकिन पहले रीता जोशी के भाई का कांग्रेस छोड़ना और फिर अपने कद के अनुरूप पार्टी में महत्व ना दिए जाने से नाराज रीता ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ दिया था। रीता के साथ उनके कई नजदीकी कांग्रेसियों ने रीता के साथ ही कांग्रेस छोड़ दी थी, लेकिन जिन्होंने जब तक बीजेपी का दामन नहीं थामा था वह अब रीता को प्रत्याशी बनाये जाने के बाद भगवा दल में शामिल होना चाह रहे हैं।

रीता का प्रयागराज से रहा है जुडाव

रीता का प्रयागराज से रहा है जुडाव

रीता बहुगुणा जोशी भले ही लखनऊ से विधायक रही, लेकिन उनका जुडाव हमेशा से प्रयागराज से रहा। यहां स्थानीय राजनीति में उनके नाम कई बड़ी उपलब्धि रही, जिसमें किसान यूनियर, मजदूर यूनियन, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, छात्रसंघ के कई बडे मामले रीता ने सुलझा कर खूब नाम बटोरा था। उनसे जुडने वाले लोग कांग्रेस छोडने के बाद से उनसे नाराज चल रहे थे। जिसमें इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के कई पुराने व बड़े नेता भी रहें। लेकिन अब जब उन्हें इलाहाबाद का नेतृत्व करने का मौका बीजेपी दे रही है। ऐसे में रीता को मजबूत करने के लिए उनके पुराने सहयोगी हर हाल में उनके साथ आना चाह रहे हें। जबकि कांग्रेस के जिन नेताओं के साथ इलाहाबाद में रीता जोशी ने अपने पांव जमाये थे, वह भी इसी चुनाव में रीता के साथ खुलकर मंच पर दिखायी पडेंगे। कांग्रेस की जिला कमेटी के अध्यक्ष ने भी सोशल मीडिया पर तंज कसते हुये कहा कि जो कांग्रेसी भाजपा को पीठ पीछ से सपोर्ट कर रह हे। उन्हें बाहर निकालने का वक्त आ गया है। फिलहाल कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारियों के सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं से उनकी भडास का दौर भी शुरू हो गया है, जो अभी आगे और बढ़ेगा।

पिछली बार नंदी आये थे

पिछली बार नंदी आये थे

गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में उठा पटक का दौर जब शुरू हुआ था तो नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कांग्रेस का दामन थामा था और चुनाव लड़कर लगभग डेढ लाख वोट हासिल किये थे। उस दरमियान भी कई नेताओं के पाला बदलने का क्रम शुरू हुआ जो विधान सभा चुनाव आते तक इतना बदला कि कांग्रेस छोडकर नंदी भाजपा में आ गये थे। वहीं इसी विधान सभा चुनाव के दौरान ही रीता जोशी भी कांग्रेस छोडकर भाजपा में आयी थी और दोनों ही इस वक्त योगी कैबिनेट में मंत्री हैं। फिलहाल इन दोनों नेताओं के कुछ समर्थक व बेहद नजदीकी पहले ही बीजेपी में आ गये थे, लेकिन कांग्रेस के दर्जन भर स्थानीय कद्दावर नेता कांग्रेस में बने हुये थे। पर वह इंतजार भी अब खत्म होने को है और बडे मंच पर कांग्रेस को जोर का झटका मिलने वाला है।

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