नाम के आगे नहीं लिखा था 'कुमार', 8 महीने ज्यादा जेल में रहना पड़ा, हाईकोर्ट की जेलर को फटकार
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर में एक शख्स को 'कुमार' की वजह से आठ महीने अधिक जेल में रहना पड़ा। दरअसल, कोर्ट के आदेश में अभियुक्त के नाम के बीच में कुमार लिखना छूट गया। इस वजह से सिद्धार्थ नगर जेल अधीक्षक ने अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने से इनकार करके अवैध निरुद्धि में बनाए रखा। जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया कि अभियुक्त को 8 दिसंबर 2020 को जमानत पर रिहा कर दिया गया है। इस पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जेल अधीक्षक को फटकार लगाते हुए भविष्य में सावधानी बरतने की नसीहत दी है। कोर्ट ने कहा कि जेल अधीक्षक कोर्ट में हाजिर होकर बताएं कि उनके खिलाफ उचित विभागीय जांच की सिफारिश क्यों नहीं की जाए।

क्या है पूरा मामला?
यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने विनोद कुमार बरूआर की अर्जी पर दिया है। दरअसल, सिद्धार्थ नगर जेल में बंद अभियुक्त की जमानत अर्जी चार सितंबर 2019 को सत्र न्यायालय ने निरस्त कर दी थी। इस पर उसने हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। हाई कोर्ट से 9 अप्रैल 2020 को जमानत मंजूर कर ली गई थी। जमानत पर छोड़ने के आदेश में विनोद बरूआर लिखा था, जबकि रिमांड आदेश में विनोद कुमार बरूआर था।
नाम में 'कुमार' न होने की वजह से आठ महीने रहना पड़ा जेल
इस पर याची ने आदेश संशोधित करने की अर्जी दाखिल की। जमानत आदेश में नाम के बीच से कुमार न होने की वजह से अभियुक्त को आठ महीने और जेल में रहना पड़ा। जमानत आदेश में तकनीकी खामी की वजह से अभियुक्त को रिहा न करने को लेकर हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया और जेल अधीक्षक को तलब किया। सिद्धार्थ नगर के जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया कि अभियुक्त को 8 दिसंबर 2020 को जमानत पर रिहा कर दिया गया है। कोर्ट ने जेल अधीक्षक को फटकार लगाते हुए भविष्य में सावधानी बरतने की बात कही है।












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