खुशी दुबे की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज, कहा- पुलिसकर्मियों की हत्या जघन्य अपराध
प्रयागराज, 17 जुलाई: कानपुर के बिकरू शूटआउट कांड से चर्चाओं में आईं विकास दुबे के शॉर्प शूटर अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे एक बार फिर चर्चाओं में है। दरअसल, खुशी दुबे के इस बार चर्चाओं का कराण है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर ही है। बता दें कि खुशी दुबे की जमानत पर बीते 2 जुलाई को सुनवाई हुई थी और हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को जमानत अर्जी खारिज होने से बचाव पक्ष और खुशी के परिवारीजनों को गहरा धक्का लगा है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कर रहे हैं।

अमर दुबे की शादी बीते 29 जून 2020 को खुशी दुबे से हुई थी। शादी के महज तीन दिनों बाद 2 जुलाई 2020 की रात विकास दुबे के घर पर पुलिस टीम दबिश देने के लिए पहुंची थी। इसी दौरान विकास दुबे ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। बिकरू कांड को अंजाम देने के बाद अमर दुबे फरार हो गया था। बीते 8 जुलाई को हमीरपुर के मौदाहा में एसटीएफ ने अमर दुबे को मुठभेड़ में मार गिराया था।
पुलिस ने खुशी को बिकरू कांड में आरोपी बनाया था और घटना के बाद गिरफ्तार कर जेल भेजा था। लेकिन किशोर न्याय बोर्ड द्वारा खुशी दुबे को नाबालिग घोषित कर दिया गया था। जिसके बाद उसे बाराबंकी के बालसंरक्षण गृह में रखा गया है। उसने जमानत याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने एक जुलाई को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। यह फैसला जस्टिस जेजे मुनीर की सिंगल बेंच ने दिया है।
सेहत खराब होने का दिया था हवाला
खुशी ने खुद के बेगुनाह होने और जेल में सेहत खराब होने का हवाला देकर जमानत पर रिहा किए जाने की अपील की थी। इस मामले में जमानत अर्जी जनवरी में ही दाखिल की गई थी। कोरोना की वजह से पिछले कई महीनों से सुनवाई नहीं हो सकी थी। एक जुलाई को मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई दोबारा की गई।












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