जानिए कौन है महंत नरेंद्र गिरि का अगला उत्तराधिकारी, 30 सितंबर को हरिद्वार में लगेगी नाम पर अंतिम मोहर
जानिए कौन है महंत नरेंद्र गिरि का उत्तराधिकारी, 30 सितंबर को हरिद्वार में लगेगी अंतिम मोहर
प्रयागराज, 29 सितंबर: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की 20 सितंबर को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद सवाल उठने लगा था कि बाघम्बरी मठ की गद्दी पर अब कौन बैठेगा। आखिर बाघम्बरी मठ की गद्दी पर कौन बैठेगा इसका फैसला हो गया है। दरअसल, नरेंद्र गिरि की वसीयत के आधार पर पंच परमेश्वरों ने यह फैसला लिया है। फैसले के मुताबिक, बाघम्बरी मठ की गद्दी पर बलवीर गिरि विराजमान होंगे। हालांकि, इसकी औपचारिक घोषणा पांच अक्टूबर को षोडशी भोज के दिन की जाएगी।
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जानकारी के मुताबिक, बलवीर गिरि को बाघम्बरी मठ गद्दी पर बैठने का फैसला पंच परमेश्वरों ने अनौपचारिक बैठक में लिया है। बताया जा रहा है कि पांच अक्टूबर को षोडशी भोज के दिन औपचारिक तौर पर इसका ऐलान हो सकता है। इतना ही नहीं, चादरपोशी के साथ गद्दी का पीठाधीश्वर भी बनाया जा सकता है। निरंजनी अखाड़ा सचिव रविन्द्र पुरी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि 28 सितंबर की शाम को एक बैठक हुई थी, जिसमें यह फैसला हुआ कि जिसका नाम वसीयत में उसे ही गद्दी पर बैठाया जाएगा। बताया कि मुझे हरिद्वारा जाना है वहां हमारे मठ अधिकारी और संतों के साथ इस विषय पर बैठक करेंगे।
रविन्द्र पुरी ने बताया कि हम हरिद्वार में तय करेंगे की यहां की व्यवस्था कैसे होगी, कैसे नहीं होगी। कहा कि बलवीर गिरि को ही गद्दी पर बैठाया जाएगा। हालांकि, इसकी अंतिम मोहर हरिद्वार में ही लगेगी। बैठक में मोहर लगने के बाद आने वाली पांच अक्टूबर को षोडशी भोज के दिन पंचपरमेश्वर की बैठक होने के बाद पूरे विधि विधान से बलवीर गिरि का पट्टाभिषेक कर उन्हें मठ बाघम्बरी गद्दी पर महंत बना दिया जाएगा।
जानिए कौन हैं बलवीर गिरि
बलबीर गिरि करीब 30 साल पुरान शिष्य हैं महंत नरेंद्र गिरि के। महंत नरेंद्र गिरि ने बलबीर गिरि को हरिद्वार आश्रम का प्रभारी बनाया हुआ था। इन्हीं बलबीर गिरि को महंत नरेंद्र गिरि ने अपनी वसीयत औऱ सुसाइड नोट में अपना उत्तराधिकारी भी घोषित किया था। एक समय बलबीर गिरि और आनंद गिरि महंत के सबसे करीब माने जाते थे, लेकिन आनंद गिरि के निष्कासन के बाद बलबीर गिरि ही मठ का पूरा कामकाज संभाल रहे थे। किसी भी प्रमुख आयोजन या वार्ता में वह महंत नरेंद्र गिरि के साथ होते थे। 35 वर्षीय बलवीर गिरि उत्तराखंड के निवासी हैं।












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