फूलपुर में 7 अप्रैल को रोड शो के साथ कांग्रेस-अद गठबंधन दिखायेगा अपनी ताकत

प्रयागराज। फूलपुर लोकसभा के लिए भाजपा और सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी का नाम अभी भी अंधेरे में है। पिछले एक पखवारे से हर दिन कयास और नये समीकरणों के बनने बिगड़ने का क्रम जारी है। इनका प्रत्याशी कौन होगा? यह अभी तक तय नहीं हो सका है। लेकिन, इन सबके बीच कांग्रेस धीरे धीरे अपनी सियासत की गोटियां चलने में मशगूल है। सबसे पहले प्रत्याशी घोषित करने के बाद अब कांग्रेस-अपना दल गठबंधन अपनी ताकत की नुमाइश करने जा रहा है। 7 अप्रैल से गठबंधन के प्रत्याशी पंकज निरंजन के लिये रोड शो शुरू हो रहा है, जो 8 अप्रैल को भी फूलपुर में लोगों को अपनी ताकत का एहसास करायेगा।

कांग्रेस को अपनी ताकत दिखाने का मौका

कांग्रेस को अपनी ताकत दिखाने का मौका

रोड शो के माध्यम से कांग्रेस और अपना दल कृष्णा गुट गठबंधन भीड़ जुटाकर वोटों को अपनी ओर खींचने का प्रयास करेगा। कांग्रेस भी इसी बहाने अपनी खोयी और बिखरी ताकत को जीवंत करने के लिये हुंकार करेगी। चूंकि प्रियंका के प्रयागराज दौरे के बाद यहां कांग्रेसी खासे उत्साहित हैं और अब लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यह पहला ऐसा मौका होगा, जब कांग्रेस को अपनी ताकत दिखाने का मौका होगा। पंकज निरंजन इसमे कितने सफल होंगे, यह तो दो दिन में पता चल जायेगा, लेकिन भीड़ का जुटना तय है और कुर्मी बाहुल्य इलाके में सबसे पहले आये पंकज निरंजन पटेल वोटों को अपनी ओर मोडने का हर जतन करते हुये जरूर नजर आयेंगे।

गठबंधन और भाजपा से आगे चल रही कांग्रेस

गठबंधन और भाजपा से आगे चल रही कांग्रेस

भले ही फूलपुर सीट पर सबसे तगड़ा दावा सपा-बसपा गठबंधन और भाजपा का हो, लेकिन मौजूदा समय में कांग्रेस इन दोनों दलों से कहीं आगे चल रही हैं। जहां भाजपा अपने दावादारों की भीड़ से परेशान है, वहीं सपा-बसपा गठबंधन के सामने मुस्लिम वोटों के बिखराव से बचाने के लिए दबाव है। 72 हजार की स्कीम लेकर जनता के बीच आये राहुल गांधी को आम तबके के बीच वरीयता दी जा रही है, लोग कांग्रेस के इस प्लान को अपने हित से जोड़कर देख रहे हैं और तेजी के साथ चुनाव मैदान में उतर चुकी कांग्रेस भी अपनी बातें जनता तक सबसे पहले पहुंचाकर वोटों की संख्या बढ़ाना चाह रही है।

बेटी के सितम का होगा सवाल

बेटी के सितम का होगा सवाल

कांग्रेस से गठबंधन करने वाली अपना दल की मुखिया कृष्णा पटेल अपने सजातीय वोटों को एक जुट करने के लिए फूलपुर में खुद प्रचार प्रसार की बड़ी जिम्मेदारी निभायेंगी। वह अपने कोर वोटरों तक अनुप्रिया की बगावत व उनके प्रार्टी को तोड़ने के सितम को कुरेद कर सजातीय वोटों से सहनुभूति हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। समय रहते कृष्णा का मैदान में उतरना सही भी नजर आ रहा है, जिस तरह फूलपुर में पटेल वोटों की बाहुल्यता है, ऐसे में उनके हित में आवाज उठाना व उनहें सीधे फायदा पहुंचाने की रणनीति अगर अंतर्मन में उतरी तो यह गठबंधन के लिऐ संजीवनी होगी। कृष्णा 72 हजार की स्कीम को लेकर अपने सजीयत वोटरों को लुभाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगी।

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