AMU में कोरोना का कहर: कब्रिस्तान में नहीं बची जगह, खोदनी पड़ रही पुरानी कब्रें
अलीगढ़, मई 13: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में हाल के दिनों में कोरोना से करीब 44 कर्मचारियों ने जान गंवा दी। इनमें 19 प्रोफेसर और 25 गैर-शिक्षक कर्मचारी शामिल हैं। विवि में महामारी से इतनी बड़ी संख्या में लोगों के जान गंवाने के बाद वायरस के जिनोम अनुक्रमण (सिक्वेसिंग) की मांग उठने लगी है। उधर, एएमयू के कब्रिस्तान में जगह नहीं बची है। नौबत ये आ गई है कि पुरानी कब्रों को खोदकर नए शवों को के लिए जगह बनाई जा रही है। राजनीति विभाग के प्रोफेसर डॉ. अर्शी खान ने बताया कि विश्वविद्यालय के कब्रिस्तान में अब जगह नहीं बची है। यह एक बहुत बड़ी त्रासदी है। एक डीन, चेयरमैन सहित वरिष्ठ प्रोफेसरों एवं बड़े डॉक्टरों की मौत हो चुकी है। सेहतमंद युवाओं की भी जान गई है।

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कोरोना की दूसरी लहर ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में तबाही मचा रखी है। कोरोना की चपेट में आकर अब तक 44 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में 19 प्रोफेसर और 25 गैर टीचिंग स्टॉफ शमिल हैं। एएमयू के वीसी तारिक मंसूर ने आईसीएमआर (ICMR) को खत लिखकर आशंका जताई है कि अलीगढ़ के सिविल लाइंस क्षेत्र में कोविड-19 का कोई जानलेवा वैरिएंट फैला हुआ है। वायरस की जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए उन्होंने सैंपल सीएसआईआर को भेजे हैं। वीसी ने कहा है कि विश्वविद्लायल में ये मौतें वायरस के 'घातक' स्वरूप से हुई हैं।
बता दें, वायरस के खौफ को देखते हुए इस इलाके में संक्रमित लोगों के सैंपल जांच के लिए वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और जिनोमिक्स एवं इंटेग्रेटिव बॉयलोजी को भेजे गए हैं। ये दोनों संस्थाएं जिनोम सिक्वेसिंग करते हुए वायरस के खास स्वरूप की पहचान करेंगी। एएमयू के प्रेस ऑफिसर ने कहा कि जब कोरोना की पहली लहर आई थी तो विश्वविद्यालय ने स्थानीय लोगों की मदद की थी। विवि के प्रवक्ता सैफी किदवई ने कहा कि इस बार यह काफी बुरा है, मृत्यु दर इस बार काफी ज्यादा है और यह काफी चिंता का विषय है। कोरोना संक्रमण से हाल के दिनों में औषधि विभाग से डॉ. शादाब खान और डॉक्टर आरिफ सिद्दिकी और जूलॉजी विभाग से प्रोफेसर हुमायूं मुराद की मौत हो गई।












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