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इतिहास में पहली बार साबरमती में एक भी मूर्ति विसर्जित नहीं की गई, 1000 सिपाहियों ने रखी निगरानी

अहमदाबाद। भगवान गणेश का पर्व शुरू होने से विसर्जन के अंतिम दिन तक गुजरात में इस बार साबरमती नदी में मूर्ति नहीं बहाई गईं। मूर्ति विसर्जन के लिए लोगों के लिए रिवरफ्रंट एवं अन्य स्थानों पर कृत्रिम कुंड बनाए गए। म्युनिसिपल कारपोरेशन की ओर से ऐसे 61 विसर्जन कुंडों का निर्माण कराया गया। शहरभर से करीब 50 हजार मूर्तियाें को लोगों ने इन कुड़ों में ही विसर्जित किया। इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ। खुशी जाहिर करते हुए म्युनिसिपल कमिश्नर विजय नेहरा ने कहा कि लोगों की जागरूकता के कारण यह संभव हो सका।

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बता दें कि, नदी को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए इस बार खास व्यवस्था की गई थीं। लोग मूर्तियों को साबरमती में न डालें, इसकी 5 बोट द्वारा सतत निगरानी रखी गई। साथ ही 1000 पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की गई। 1500 मजदूरों को कृत्रिम कुंड की ड्यूटी पर लगाया गया था। इतना ही नहीं, शहरभर से यहां 71 क्रेन की व्यवस्था भी की गई थी। यह सब होने के चलते शहरवासियों ने साबरमती के बजाए कृत्रिम कुडों में गणपति का विसर्जन करना ही उचित समझा। इससे पर्यावरण की रक्षा की दिशा में अच्छा संदेश भी गया।

For the first time in the history, Ganesha idols had been immersed in Sabarmati river

संवाददाता के अनुसार, साबरमती में विसर्जन रोकने के लिए एक हजार पुलिसकर्मियों के अलावा निजी सिक्योरिटी और बाउंसर भी तैनात किए गए थे। अहमदाबाद के निकट इंदिरा ब्रिज के पास कृत्रिम कुंड में ही गणपति का विसर्जन किया गया।

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