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जिस विमान हादसे में गई थी 133 की जान, उसमें बचे व्यापारी की घर पर हुई मौत, सड़ती रही लाश

Ahmedabad: गुजरात के अहमदाबाद में गुरुवार की दोपहर हुए विमान हादसे ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया है। अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही एक इंटरनेशनल फ्लाइट हादसे का शिकार हो गई। एयर इंडिया की इस फ्लाइट ने लंदन के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन टेकऑफ के कुछ ही मिनटों बाद वह दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसा इतना भीषण था कि एयरपोर्ट के पास का इलाका काले धुएं से भर गया। इस विमान में 242 लोग सवार थे।

ऐसा ही हादसा साल 1988 में हुआ था जब इंडियन एयरलाइन्स के विमान हादसे में 133 लोगों की मौत हुई थी। उस हादसे में सिर्फ दो लोगों की जान बची थी। जिनमें से एक गुजरात के कपड़ा व्यापारी अशोक अग्रवाल भी थे। उनका नसीब तब ऐसा था कि, सैकड़ों लोगों के बीच भी बच गए थे, लेकिन अब अहमदाबाद में उनकी अपने घर पर ही मौत हुई तो किसी को पता ही नहीं चला। उनकी लाश गलने लगी, लेकिन कई दिनों तक कोई उनके घर नहीं पहुंचा। 8 मार्च 2020 को उनकी लाश के बारे में पता चला, जिसे पुलिस ने बरामद किया।

घर पर अकेले ही रहते थे

घर पर अकेले ही रहते थे

आनंदनगर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर साजिद बलोच के मुताबिक, अशोक अग्रवाल घर पर अकेले ही रहते थे। वर्ष 1988 के मुंबई-अहमदाबाद जाने वाले विमान हादसे में उनकी पत्नी आभा और बेटी रूही की भी मौत हो गई थी। मार्च 2020 में अशोक की मौत का पता तब चला जब, एक सफाईकर्मी को जब घर से बदबू आई। सफाईकर्मी ने ही सिक्यॉरिटी और अपार्टमेंट के दूसरे लोगों को जानकारी दी। फिर, जब अपार्टमेंट का दरवाजा तोड़ा गया तो अग्रवाल को उसमें मरा हुआ पाया गया।

ऐसे चला उनकी लाश का पता

ऐसे चला उनकी लाश का पता

बलोच का कहना है कि, अग्रवाल अकेले रहते थे और अकेले में ही उनकी मौत हुई। उनके घर से पुलिस को किसी तरह के झगड़े का निशान नहीं मिला। इसे प्राकृतिक मौत ही माना जा रहा है। हालांकि, उनकी मौत के बाद तथ्य की पुष्टि के लिए फरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। बहरहाल हमने ऐक्सिडेंटल डेथ का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

विमान हादसे में बचने के बाद से ही सदमे में थे

विमान हादसे में बचने के बाद से ही सदमे में थे

बता दें कि, 1988 का विमान हादसा 10 अक्टूबर के दिन हुआ था। जब सरदार वल्लभभाई पटेल एयरपोर्ट से 2 किमी दूर विमान सुबह करीब 6:35 बजे द्रुघटनाग्रस्त हो गया था। उस वक्त उसमें 135 लोग सवार थे।जिनमें से अशोक और विनोद शंकर त्रिपाठी ही बचे थे। जबकि,6 क्रू मेंबर्स समेत 133 लोगों की मौत हो गई थी। अग्रवाल के परिजनों का कहना है कि अशोक उस हादसे के बाद से कभी उबर नहीं पाए। उन्होंने करीब 4 साल तक इलाज कराया था और हिप रिप्लेसमेंट के लिए अमेरिका भी गए थे।

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