RTI में संसोधन के फैसले पर कार्यकर्ता नाराज, कहा लोकतंत्र के लिए खतरा

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नयी दिल्ली। आरटीआई का हथियार लोगों के हाथों में देने का श्रेष्य लूटने वाली यूपीए सरकार खुद इसकी फांस में फंसती जा रही है। राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार दायरे में रखने को लेकर सरकार खुद फंस गई है। सरकार ने राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार अधिनियम से बाहर रखने के लिए इसमें संशोधन को मंजूरी देने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले का बचाव किया और कहा कि यदि इस मामले में केंद्रीय सूचना आयोग का आदेश लागू होता है तो कोई भी राजनीतिक दल काम नहीं कर पाएगा।

सरकार ने भले ही इस अधिनियम में संसोधन को मंजूरी दे दी हो, लेकिन कार्यकर्ताओं ने सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों के पारदर्शिता और उनकी जवाबदेही का क्षरण होगा। दरअसल सीआईसी ने 6 राष्ट्रीय दलों को आरटीआई अधिनियम के दायरे में लाने का आदेश दिया था। लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल ने से ना मानते हुए इसमें संशोधन को मंजूरी दे दी। संशोधित अधिनियम में राजनीतिक दल इसके दायरे से बाहर हो जाएंगे।

संसोधित अधिनियम का यह प्रस्ताव संसद के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है। जहां कार्यकर्ता सरकार के इस फैसले स नाराज है तो वहीं कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि सरकार सीआईसी का सम्मान करती है, लेकिन इसके आदेश को लेकर चिंतित थी। यह आदेश राजनीतिक व्यवस्था पर हमला करता है। लोग राजनीतिक दलों से सभी तरह की जानकारी ले सकते हैं।

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