हैदराबादी गढ़ को भेदने की ‘सरदारी कवायद’

अहमदाबाद। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी अब हर उस मुद्दे पर हस्तक्षेप कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय स्तर का या फिर चुनावी हो। स्वाभाविक था कि मोदी तेलंगाना जैसे मुद्दे पर चुप क्यों रहते। उन्होंने तेलंगाना के गठन पर यूपीए सरकार की मुहर के 24 घण्टे के भीतर ही मुँह खोला और तेलंगाना का समर्थन करते हुए बड़ी सफाई से यूपीए सरकार के फैसले पर सवालिया निशान लगा दिए।

भारतीय जनता पार्टी में प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद नरेन्द्र मोदी जहाँ एक तरफ लोकसभा चुनाव 2014 की तैयारियों में जुट गए हैं, वहीं अपनी तैयारियों को तेज धार देने के लिए वे निरंतर खबरों में बने रहने की भी कोई कोशिश नहीं चूक रहे। यही कारण है कि मोदी कभी गुजरात दंगों पर पिल्ले वाला बयान देकर राजनीतिक उथल-पुथल मचा देते हैं, तो कभी अमरीकी वीजा पर मौन रह कर भी पूरे देश में हंगामा खड़ा करवा देते हैं। बीच-बीच में अमर्त्य सेन जैसी फुलझड़ियाँ भी छूटती रहती हैं, जो मोदी को चर्चित रखने की उनकी कवायद को रोशन कर जाती हैं।

modi

खैर, गुजरात दंगे या अमरीकी वीजा आदि तो घिसे-पिटे मुद्दे हैं और इन मुद्दों के जरिए मोदी निरंतर और अस्खलित ढंग से लोकप्रियता एवं नकारात्मक प्रसिद्धि बँटोरते रहते हैं, लेकिन इस बार मोदी ने जो मुद्दा उठाया है, वह है देश के दक्षिणी राज्य से जुड़ा है, जहाँ भाजपा को अभी जमीन तलाशनी है। आंध्र प्रदेश से पृथक राज्य तेलंगाना के गठन के मुद्दे पर मोदी ने मुँह खोला है और बहुत ही सलीके से खोला है। नरेन्द्र मोदी ने तेलंगाना के मुद्दे पर जो सवाल उठाए हैं, वह एक कुशल राजनेता के तौर पर तो सटीक हैं ही, अपितु भाजपा के लिए अभेद्य हैदराबादी गढ़ में सेंध लगाने की दृष्टि से रणनीतिक भी है। मोदी ने तेलंगाना के मुद्दे पर एक तरह से सरदारी कवायद शुरू की है।

यहाँ यह याद दिलाने की जरूरत नहीं है कि वह सरदार वल्लभभाई पटेल ही थे, जिनकी वजह से आज भारत के पास हैदराबाद (वर्तमान आंध्र प्रदेश) है। हैदराबाद के लोगों को पाकिस्तान में जाने से बचाने वाले सरदार पटेल गुजरात से हैं और यह भी सर्वविदित है कि मोदी को लेकर उनके समर्थकों में सरदार की ही छवि है। सरदार के नाम पर गुजरात में राजनीति तो कांग्रेस और भाजपा सहित सभी राजनेताओं ने की है और करते रहे हैं, परंतु नरेन्द्र मोदी ने सरदार पटेल के नाम पर जितनी सफलता हासिल की, शायद उतनी किसी नेता को नहीं मिली।

सरदार की आड़ में नरेन्द्र मोदी अक्सर कांग्रेस को कोसते आए हैं और अब उसी सरदारी स्टाइल में नरेन्द्र मोदी उसी हैदराबादी गढ़ में सेंध लगाने की कवायद कर रहे हैं। नरेन्द्र मोदी जानते हैं कि 11 अगस्त को उन्हें हैदराबाद में जनसभा को सम्बोधित करना है। आंध्र प्रदेश में भाजपा का कोई जनाधार नहीं है। मोदी के समक्ष इस हैदराबादी गढ़ में सरदार की तरह ही सेंध लगाने की चुनौती है और उन्होंने तेलंगाना के नाम पर पहला तीर छोड़ दिया है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+